TRP मामले में ED ने टीवी चैनलों की 32 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की

टीआरपी मामले प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को की बड़ी कार्रवाई. (प्रतीकात्मक फोटो)

प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने प्रॉपर्टीज़ ऑफ़ प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों के तहत जिन संपत्ति को अटैच किया है वह फक्त मराठी, बॉक्स सिनेमा और महा मूवी जैसे चैनलों से संबंधित हैं.

मुंबई. प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने बुधवार को कथित टीआरपी घोटाले (TRP scam) में मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) की जांच के सिलसिले में महाराष्ट्र के कुछ टेलीविजन चैनलों की 32 करोड़ की संपत्ति अटैच की है. प्रॉपर्टीज़ ऑफ़ प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों के तहत जुड़ी ये संपत्तियां फक्त मराठी, बॉक्स सिनेमा और महा मूवी जैसे चैनलों से संबंधित हैं. केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से ये जानकारी दी गई है कि इन संपत्तियों में मुंबई, इंदौर, दिल्ली और गुड़गांव की जमीन, कॉमर्शियल और रेजिडेंशियल यूनिट्स शामिल हैं.

एजेंसी की ओर से जानकारी देते हुए दावा किया गया है कि जिन चैनलों पर कार्रवाई की गई है, उनमें से दो चैनलों की मुंबई के दर्शकों में 25 प्रतिशत तक पहुंच है; जबकि तीसरे चैनल की 12 प्रतिशत तक पकड़ है. जांच एजेंसी ने टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स के कथित हेरफेरी के मामले में मुंबई पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर का अध्ययन करने के बाद इन सभी चैनलों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था. ईडी ने दावा किया है कि इन चैनलों ने टीआरपी रेटिंग को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और टीआरपी के नाम पर जमकर विज्ञापन लिया.

बता दें कि टीआरपी एक टीवी चैनल या एक कार्यक्रम की लोकप्रियता की जानकारी देने का माध्‍यम है. टीआरपी के जरिए ही विज्ञापनदाताओं को दर्शकों के पैटर्न को समझने में आसानी होती है और टीवी चैनल के कार्यक्रमों को विज्ञापन मिलता है.इसे भी पढ़ें :- TRP: टीवी जगत में मची हलचल, ‘अनुपमा’ पर मंडरा रहा खतरा, ‘इमली’ भी पड़ी फीकी वहीं, दूसरी तरफ बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस से पूछा कि कथित टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स (टीआरपी) घोटाले को लेकर पिछले साल संवाददाता सम्मेलन करने के लिए उन्‍हें किस चीज ने प्रेरित किया था. न्यायमूर्ति एस एस शिंदे और न्यायमूर्ति मनीष पिटाले की पीठ ने सवाल किया, क्या प्रेस से संवाद करना पुलिस का दायित्व है? (पुलिस) आयुक्त को प्रेस से बातचीत क्यों करनी पड़ी थी.

इसे भी पढ़ें :- मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटाए गए परमबीर सिंह, हेमंत नगरले को मिली जिम्मेदारी

पीठ ने एआरजी आउटलायर मीडिया के वकील अशोक मुंदारगी की दलीलों पर जवाब देते हुए यह टिप्पणी की. अदालत रिपब्लिक टीवी चैनल का मालिकाना हक रखने वाली कंपनी एआरजी ऑउटलायर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड और पत्रकार अर्णब गोस्वामी की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. उन्होंने टीआरपी घोटाले की जांच सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी को सौंपे जाने सहित अन्य राहत प्रदान करने का अदालत से अनुरोध किया है. मुंदारगी ने उच्च न्यायालय से कहा कि पिछले साल अक्टूबर में संवाददाता सम्मेलन करने के पीछे पुलिस के दुर्भावनापूर्ण इरादे थे.




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