Opinion: कहानी तिनका-तिनका जेल रेडियो की

गरिमा सिंह

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है. किसी भी समाज की महत्वपूर्ण इकाई है-उस समाज के लोगों की सोच और उनके विचार. इसी सोच ने जन्म दिया संचार के विभिन्न माध्यमों को जिससे विचारों की अभिव्यक्ति आदान-प्रदान किया जा सके. प्रसारण जन संचार के कई माध्यम है जो सशक्त तो हैं ही साथ ही साथ लोकप्रिय भी हैं और इसमें सबसे सहज उपलब्ध, प्रचलित, सुलभ और सस्ता साधन रेडियो है. भारत अनेकता में एकता में विश्वास रखने वाला एक लोकतांत्रिक देश है. जहां एक कोस पर पानी और दो कोस पर वाणी बदल जाती है. ऐसे में एक सूत्र में पिरोये रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रेडियो है.

बहरहाल यह क़िस्सा जेल में रेडियो का है जिसकी शुरुआत तिनका-तिनका फाउंडेशन ने की, जिसकी सूत्रधार डॉ. वर्तिका नन्दा हैं. भारत में जेल रेडियो की शुरुआत जुलाई 2013 में दक्षिण एशिया के सबसे बड़े जेल परिसर तिहाड़ जेल से हुई. तिनका-तिनका के जेल अभियान से ही भारत में जेल पत्रकारिता की शुरूआत होती है. इसका पहला पड़ाव भारत की सबसे पुरानी जेल इमारत में चल रही ज़िला जेल आगरा है. यहां जेल रेडियो की शरुआत 2019 में हुई. यही जेल रेडियो कोरोना के समय में उनका एक बड़ा आसरा बना.

31 जुलाई 2019: जिला जेल आगरा : शशिकांत मिश्रा , अधीक्षक और बबलू कुमार , आईपीएस के साथ

पूरी मुहिम में जेल के अधीक्षक शशिकांत मिश्रा और उनकी टीम का भरपूर सहयोग मिला. इस रेडियो से जुड़ने के बाद न केवल कैदियों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है बल्कि उनके अवसाद, अकेलेपन की त्रासदी और तनाव में भी कमी आ रही है.

तिनका-तिनका द्वारा शुरू किया गया यह जेल रेडियो भारत की जेलों के लिए बहुत बड़ा कदम साबित हुआ है. अगली पहल हरियाणा की जेलों से एक बड़े स्तर पर शुरू हुई. गत वर्ष अक्टूबर के महीने में प्रक्रिया शुरू हुई, दिसंबर में ऑडिशन हुआ. तीनों जेलों सेंट्रल जेल अंबाला, जिला जेल फरीदाबाद और जिला जेल पानीपत. इन जेलों से करीब 60 बंदियों ने आवेदन किया और पूरे उत्साह के साथ ऑडिशन दिया. फिर इन तीनो जेलों की ट्रेनिंग वर्कशॉप चली. इसने कई नए मापदंड तय किए.

हरियाणा की जेलों के महानिदेशक के. सेल्वाराजइस प्रक्रिया मे शामिल रहे. तीनों जेलों के सुपरिटेंडेंट– जयकिशन छिल्लर, लखबीर सिंह बरार और देवी दयाल ऑडिशन के समय स्वयं मौजूद रहे. वर्तिका नन्दा के निर्देशन और प्रोत्साहन से तीनो जेलों के बंदियों ने भरपूर उत्साह के साथ जेल रेडियो का सिग्नेचर ट्यून बनाया और यह सिलसिला चल पड़ा. इसकी एक बानगी इस प्रकार है-

“और नहीं अब और नहीं,
गम के अंधेरे और नहीं.
तिनके ने दिया सहारा,
नया आसमां घर हमारा…”

(अम्बाला जेल की थीम सांग की कुछ पंक्तियां)

इन तीनों जेलों में ट्रेनिंग पूरी होने के साथ ही इनमें जेल रेडियो का विधिवत उद्घाटन हो गया. पहला जेल रेडियो 16 जनवरी 2020 को पानीपत जेल से शुरू हुआ. हरियाणा के जेल रेडियो का उद्घाटन हरियाणा के जेल मंत्री रंजीत सिंह, गृह सचिव राजीव अरोड़ा IAS और जेल महानिदेशक के. सेल्वराज, आईपीएस ने किया.

हरियाणा के जेल मंत्री रंजीत सिंह, गृह सचिव राजीव अरोड़ा आईएएस, जेल महानिदेशकके. सेल्वराज, आईपीएस, जेल के अधीक्षक देवी दयाल और वर्तिका नन्दा

इसके बाद फरीदाबाद और अम्बाला में जेल रेडियो की शुरूआत हुई.फरीदाबाद जेल से पांच महिलाओं को तिनका जेल रेडियो के लिए प्रशिक्षण दिया गया.

जिला जेल फरीदाबाद 28 जनवरी 2021, जयकिशनछिल्लर अधीक्षक और जेल के चयनित बंदियों के साथ वर्तिका नन्दा

हरियाणा की जेलों के इस रेडियो को हरियाणा सरकार द्वारा भरपूर सहयोग मिला है.

(हरियाणा सरकार का ट्वीट- तस्वीर में गृह सचिव राजीव अरोड़ा आईएएस, जेल महानिदेशकके. सेल्वराज, आईपीएस, जेल के अधीक्षक लखबीर सिंह बरार और वर्तिका नन्दा)

हरियाणा की जेलों में रेडियो लाने के पहले चरण की समाप्ति के बाद दूसरे चरण को शुरू किया गया. हरियाणा की जेलों के महानिदेशक के. सेल्वराज ने इस काम को कई स्तरों में विभाजित किया ताकि काम सुचारू ढंग से हो सके. इसमें जिन जेलों को शामिल किया गया हैं. वे हैं ज़िला जेल रोहतक, ज़िला जेल गुरुग्राम, केंद्रीय जेल हिसार और ज़िला जेल करनाल. इन जेलों से ऑडिशन के ज़रिए 26 बंदियों का चयन किया गया था. इनमें 5 महिलाएं और एक ट्रांसजेंडर भी शामिल है. इन बंदियों को प्रशिक्षण डॉ. वर्तिका नन्दा ने दिया. इस कार्यक्रम को जिला जेल, गुरुग्राम में आयोजित किया गया. कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि के. सेल्वराज, आईपीएस, जेल महानिदेशक, हरियाणा थे. कार्यक्रम में चारों जेलों के सुपपरिटेंडेट सुनील सांगवान, हरिंदर सिंह, दीपक शर्मा और अमित कुमार मौजूद रहे. बंदियों के लिए सर्टिफिकेट को हरिंदर सिंह, सुपरिटेंडेंट गुरुग्राम ने रिलीज किया.

जेल की एक अलग दुनिया है जो बाहरी दुनिया से अलग तो है पर ये लोग हमारे समाज का ही हिस्सा है, हम सबके बीच के ही लोग है, जिनकी सुध किसी को नहीं है. समाज ने उनके प्रति एक नकारात्मक धारणा बना ली है जबकि हकीकत यह है कि कोई भी जन्म से अपराधी नहीं होता है उसके पीछे बहुत परिस्थितियां और कारण हो सकते है. जेल को समाज की बनी-बनाई कसौटियों पर कसा नहीं जा सकता.

बहरहाल इन बंदियों ने जेल रेडियो में अपना आसरा ढूंढ लिया है. उनके पास अभिव्यक्ति का माध्यम है उनका अपना रेडियो है- उनके मन का रेडियो जिससे वे जो सोचते हैं, समझते है, महसूसते हैं उन सभी भावनाओं को बयां कर सकते हैं. अपने मन की बात सबसे साझा कर सकते है. अब यह रेडियो उनका आसरा है. जेल की सियाह चारदीवारी के एक बीच एक नई उम्मीद की किरण है. जेलों को सालों से समझते हुए तिनका तिनका अब एक प्रीजन रिफोर्म मॉडल बना रहा है जो पूरी दुनिया की जेलों के लिए सच की कसौटी पर उतरता हुआ एक अनूठा दस्तावेज होगा.

(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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