Explained:आखिर क्यों संसदीय समिति चाहती है कि सरकार ये कृषि कानून लागू करे

नई दिल्ली.  तीन नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) को लेकर संसद से लेकर सड़क तक हंगामा मचा है. दिल्ली की सीमा पर किसान पिछले 114 दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं. विपक्षी दल के नेता बार-बार ये दोहरा रहे हैं कि सरकार को ये तीनों कानून वापस लेना होगा. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि किसान झुकने वाले नहीं है और सरकार को ये कानून वापस लेने ही होंगे. लेकिन इस बीच इस कानून की विवेचना को लेकर बनी संसदीय समिति ने कहा है कि सरकार को तीन में से एक कानून को बिना किसी फेरबदल के लागू कर देना चाहिए.

खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण को लेकर बनी स्टैंडिंग कमेटी ने सरकार को आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 लागू करने के लिए कहा है. आईए विस्तार से ये समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर ये कमेटी क्यों चाहती है कि सरकार इस कानून को लागू करे.

क्या है ये नया कानून?
>>संसद ने पिछले साल आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 को पास किया था.>>इसके पास होने के बाद अब अनाज, दलहन, आलू, प्याज, खाद्य तेल जैसी चीजें आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में नहीं होंगी. यानी अब निजी खरीददारों को इन वस्तुओं के भंडारण या जमा करने पर सरकार का नियंत्रण नहीं होगा.

>>हालांकि संशोधन के तहत ये भी व्‍यवस्‍था की गई है कि अकाल, युद्ध, कीमतों में वृद्धि को नियंत्रित किया जा सकता है.
>>सरकार का कहना है कि अब भारत इन वस्तुओं का काफी मात्रा में उत्पादन करता है, ऐसे में अब इन पर नियंत्रण की जरूरत नहीं है.

इस कानून से क्या होगा फायदा और क्या है सरकार का तर्क?
मोदी सरकार का कहना है कि संशोधित विधेयक से उत्‍पाद, उत्‍पाद सीमा, आवाजाही, वितरण और आपूर्ति की आजादी मिलेगी और बिक्री की अर्थव्‍यवस्‍था को बढ़ाने में मदद मिलेगी. इससे कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र और विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश आ सकता है.
क्यों संसदीय समिति चाहती है कि सरकार ये कृषि कानून लागू करे?
स्टैंडिंग कमेटी ने सरकार को आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 लागू करने के लिए कहा है.
>>इस संसोधित कानून की तारीफ करते हुए कमेटी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इससे किसानों को फायदा होगा. साथ ही उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी.
>>कमेटी के मुताबिक किसानों को उनके फसलों की सही कीमत नहीं मिल रही है, क्योंकि देश में निवेश न होने के चलते अच्छे कोल्ड स्टोरेज और गोदामों की कमी है. इस काननू के लागू होने पर किसानों को अच्छी सुविधा मिलेगी.
>> कमेटी ने आगे कहा कि अच्छी फसल के बावजूद किसानों को भारी नुकसान हो रहा है. लिहाजा इस कानून से हालात बेहतर होंगे.

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कौन-कौन हैं इस कमेटी में?
इस स्टैंडिंग कमेटी में लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदनों के कुल मिलाकर 13 दलों के 30 सदस्य हैं. ये हैं- भगवंत मान (AAP), गिरीश भालचंद्र बापट, गंगासंधरा सिद्धप्पा बसवराज, प्रतिमा भौमिक, अनिल फिरोजिया, संगन अमरप्पा कराडी, अजय (टेनी) मिश्रा, खगेन मुर्मू, मितेश रमेशभाई (बकाभाई) पटेल, सुब्रत पाठक, हिमाद्री सिंह, सतीश चंद्र सिंह, सतीश चंद्र सिंह (सभी भाजपा); सप्तगिरि साकार उलाका, राजमोहन उन्नीथान, वैथीलिंगम वे और राजमणि पटेल (सभी कांग्रेस), गणेशन सेल्वम (डीएमके); कविता सिंह (JD (U)), केजी केनये (नागा पीपल्स फ्रंट); फारूक अब्दुल्ला (NC) फौजिया तहसीन अहमद खान (एनसीपी); एमसी मैरीकॉम (नामांकित); अंबुमणि रामदौस (पीएमके); राजेंद्र ढेडिया गावित (शिवसेना); शफीकुर रहमान बर्क (एसपी) शांता छेत्री (टीएमसी), और नंदीगाम सुरेश; वाईएसआरसीपी).

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