Chacha Vidhayak Hai Hamare 2 Review: चाचा विधायक तो हैं, मगर उनकी पकड़ कमजोर है

देश के प्रसिद्ध स्टैंडअप कॉमेडियन जाकिर खान (Zakir Khan) ने छोटे साइज और बड़े सपनों वाले शहर के उभरते युवा नेताओं की एक खास किस्म पर एक बढ़िया “स्लाइस ऑफ़ लाइफ” कॉमेडी ‘चाचा विधायक हैं हमारे’ (Chacha Vidhayak Hai Hamare 2) की रचना की है. पहला सीजन सफल रहा था और दूसरा सीजन, तीन साल के लम्बे अंतराल के बाद आया है.

इंदौर के जाकिर, उनके मित्र और कवि बिलासपुर के विश्वास शर्मा और झांसी के आयुष तिवारी ने ‘चाचा व‍िधायक हैं हमारे सीजन 2’ में कहानी को नेताओं के भाषण में वादों की तरह सजाया है. फर्क सिर्फ इतना है कि जाकिर और उनकी मंडली वादा पूरा करती है.

जाकिर रॉनी भैय्या के किरदार में हैं. बातें बड़ी-बड़ी, मुफ्त का ओवर कॉन्फिडेंस, विधायकजी से परिचय और नज़दीकियों के किस्से और लोगों पर रौब ग़ालिब करने के नए नए तरीके ढूंढता, माध्यमवर्गीय परिवार का नाकारा लड़का, जो सबका एटलस बनना चाहता है. काफी बोझा उठा लेता है, कभी बोझ से बचना चाहता है और कभी अपनी क्षमता से ज्‍यादा बोझा उठाने के चक्कर में पृथ्वी को भी गिरा ही देता है. सीजन 1 में सहज नजर आते जाकिर, इस बार काफी थके हुए नजर आये.

फोटो साभार- Amazon Prime Video India/Youtube

जाकिर के दो जिगरी दोस्त हैं. एक है अनवर (व्योम शर्मा) – ये वो शख्स है जो “कुँए में कूदने को कहा जाए तो कूद जाएगा” वाला अगाध प्रेम और श्रद्धा रखता है. दूसरा है क्रांति (कुमार वरुण) जिसके दिल में रॉनी जैसी “क्षेत्र में पकड़” रखने का वो ख्वाब है जो पूरा नहीं होगा. कहानी इन्हीं तीन लोगों के इर्द गिर्द घूमती है.

Chacha Vidhayak Hai Hamare Review, Zakir Khan

हालांकि जो उम्मीद पहले सीजन से जागी थीं वो दूसरे सीजन में सो गयी. किसी भी किरदार से कोई सहानुभूति या किसी प्रकार की इंटेंस इमोशन नहीं जगते हैं. जाकिर सहजता में भरोसा करते हैं और इस वजह से थोड़ा ड्रामा में कमी महसूस होती है. पहले सीजन में उनकी जीत, उनकी हार, उनकी भावनाएं, उनकी हरकतें और उनकी करतूतें अपनी सी लगती थी. इस बार ऐसा कुछ नजर नहीं आता. विक्की माहेश्वरी (सनी हिंदूजा) के आने से शो में कोई फर्क नहीं पड़ा, और न ही जाकिर के किरदार को कोई नया डायमेंशन.

अवंतिका (वीनस सिंह), तन्वी (ओनिमा कश्यप), राजेश (ज़ाकिर हुसैन), अमृता (अलका अमिन) और चाचा (अभिमन्यु सिंह) के किरदार हैं भी और नहीं भी हैं. उनके होने न होने से किसी तरह का कोई इजाफा नहीं हो रहा. जाकिर और उनके पिता के बीच के एक सीन के अलावा, मामला कुछ जम ही नहीं पाया.

Chacha Vidhayak Hai Hamare Review, Zakir Khan

फोटो साभार- Amazon Prime Video India/Youtube

दोनों ही सीजन में लिखावट थोड़ी कमजोर रही. इस बार, ज़ाकिर मित्रता निभाते रहे और उनका खुद का कद, इस वेब सीरीज पर भरी रहा. दस्विदानिया, बजाते रहो, चलो दिल्ली जैसी सेंसिटिव फिल्मों के निर्देशक शशांत ने इस सीजन को डायरेक्ट किया है. लगता है वो भी जाकिर के आभा मंडल में अपनी ऑब्जेक्टिविटी खो बैठे.

सीजन 2 देखने में मजेदार है, छोटे एपिसोड्स हैं, जल्द खत्‍म हो जाते हैं मगर पहले सीजन की तरह इसमें कोई भावनात्मक तादात्म्य नहीं जुड़ पाता. छोटे शहरों की छोटी छोटी बातें इसमें आती हैं मगर कोई इम्पैक्ट नहीं छोड़ती. इसके एपिसोड के दौरान उठ कर चाय बनाने जा सकते हैं, कुछ छूटा नहीं लगेगा. यदि सीजन 1 और सीजन 2 साथ में देखेंगे तो मामला बेहतर रहेगा.

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