Apple watch काे टक्कर देने के लिए फेसबुक ला रहा है Smart watch

ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) से हाेगी लैस

इस वॉच में सेलुलर कनेक्टिविटी की सुविधा हाेगी जिससे उपयाेगकर्ता के लिए स्मार्टफाेन पर निर्भर न हाे. खबर यह भी है कि फेसबुक अपना खुद का ऑपरेटिंग सिस्टम भी विकसित कर रहा है.

नई दिल्ली. अपने आप में सबसे एडवांस कहलाई जाने वाली Apple watch काे टक्कर देने के लिए Facebook भी अपनी Smart watch उतारने की तैयारियाें में जुटा है. यह वॉच इसलिए भी खास हाेगी क्याेंकि इसमें ऑगमेंटेड रियलिटी (Augmented reality)  AR स्मार्ट ग्लास टेक्नाेलॉजी से लैस हाे सकती है.  पिछले साल सितंबर में फेसबुक ने Ray-Ban के साथ पार्टनरशिप की घाेषणा की थी अपने नए स्मार्ट ग्लास के लिए. वहीं खबर यह भी है फेसबुक जिस एंड्रॉइड आधारित स्मार्टवॉच पर काम कर रहा है उसे लेकर अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वाे Google के वेयर ऑपरेटिंग सिस्टम पर ही चलेगी या नहीं. रिपाेर्ट यह भी बताती है कि इस वॉच में सेलुलर कनेक्टिविटी की सुविधा हाेगी जिससे उपयाेगकर्ता के लिए स्मार्टफाेन पर निर्भर न हाे. खबर यह भी है कि फेसबुक अपना खुद का ऑपरेटिंग सिस्टम भी विकसित कर रहा है. 

CTRL Labs का अधिग्रहण किया था

मालूम हाे 2019 में फेसबुक ने न्यूरल इंटरफेस स्टार्ट अप CTRL Labs का अधिग्रहण किया था जाे वायलेस इनपुट मैकेनिज्म में स्पेशलिस्ट माने जाते है. और जाे ऐसे उपकरण बनाने में माहिर है जिनके इस्तेमाल के लिए या कहे जिन्हें इनपुट के लिए किसी टचस्क्रीन या भाैतिक बटन की आवश्यकता के बिना मस्तिष्क से विद्युत उपकरणाें तक विद्युत संकेताें काे प्रसारित कर सकते है. जिसने इस बात काे ओर ज्यादा संभावना बढ़ा दी कि फेसबुक अपने स्मार्ट ग्लास स्मार्टवॉच या ओकुलस हेडसेट में इस टेक्नाेलॉजी का इस्तेमाल करेगा. 

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यह फीचर मिल सकते है

जानकारी के अनुसार फेसबुक अपनी वॉच के साथ  एक तरह का एक्शन बैंड की तरह भी हाेगा इसमें टाइपिंग, गेम खेलना, निशाना लगाना, स्वाइपिंग जैसे हर एक्शन AR की मदद से ऐसा लगेगा जैसा आप सच में सब कर रहे है. इसके लिए आपके नर्व सिस्टम काे ट्रैक करेगा.

क्या हाेता है ऑगमेंटेड रियलिटी

ऑगमेंटेड रियलिटी वर्चुअल रियलिटी का ही दूसरा रूप है. इस तकनीक में आपके आसपास के वातावरण से मेल खाता हुए एक कंप्यूटर जनित वातावरण तैयार किया जा सकता है. आसान भाषा में कहे ताे आपके आसपास के वातावरण के साथ एक आभासी दुनिया काे जाेड़कर एक वर्चुअल सीन तैयार किया जाता है, जाे देखने में वास्तविक लगता है. ये भी वर्चुअल रियलिटी के जैसे ही है पर ये आपकी ही दुनिया में रख कर आपके नजर काे एडवांस बना देता है या कहे आप वास्तविक दुनिया और आभासी दुनिया के बीच फर्क नहीं बता पाएंगे.




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