खिलाड़ियों की चोट और बचाव का मनोविज्ञान

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सिडनी में कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामलों के बीच बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (Border Gavaskar Trophy) के तीसरे टेस्ट को कोई खतरा नहीं है (PIC : AP)

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज का चौथा मैच 15 जनवरी से खेला जाएगा.

भारत और ऑस्ट्रेलिया (India vs Australia) के बीच टेस्ट सीरीज का चौथा मैच 15 जनवरी से खेला जाएगा. यह सीरीज का आखिरी मैच है. दोनों टीमों फिलहाल सीरीज में 1-1 की बराबरी पर हैं. भारतीय टीम (Team India) इस मैच में अपनी बेस्ट प्लेइंग इलेवन के साथ नहीं उतर पाएगी क्योंकि उसके तकरीबन 10 खिलाड़ी चोटिल हैं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 13, 2021, 7:34 PM IST

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर अपने खिलाड़ियों की चोट और हाड़तोड़ थकान से परेशान हो गई है. ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर गए दल के आधे से ज्यादा खिलाड़ी चौथा टेस्ट खेलने लायक नहीं बचे. भारतीय दल एक अभूतपूर्व स्थिति में है. क्रिकेट प्रशासक खासी मुसीबत में हैं. समस्या के समाधान के लिए तात्कालिक और लंबे सोचविचार पर लगना पड़ रहा है. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज का चौथा मैच 15 जनवरी से खेला जाएगा. यह सीरीज का आखिरी मैच है. दोनों टीमों फिलहाल सीरीज में 1-1 की बराबरी पर हैं. भारतीय टीम इस मैच में अपनी बेस्ट प्लेइंग इलेवन के साथ नहीं उतर पाएगी क्योंकि उसके तकरीबन 10 खिलाड़ी चोटिल हैं.

मौजूदा हालात और कारणों पर नज़र
ईशांत शर्मा और भुवनेश्वर कुमार आईपीएल के दौरान पहले ही चोटिल हो गए थे. इसीलिए दौरे पर जा ही नहीं पाए. रोहित शर्मा आइपीएल में चोटिल होने के कारण शुरू के दो टेस्ट नहीं खेल पाए. मोहम्मद शमी का एडिलेड टेस्ट में बैटिंग करते हुए हाथ में फै्रक्चर हो गया. उमेश शर्मा को पिंडली की मांसपेशी की दिक्कत हो गई और वे दूसरा टेस्ट बीच में छोड़कर स्वदेश लौट आए. केएल राहुल को नेट प्रैक्टिस के दौरान कलाई पर चोट लग गई. उन्हें भी इंग्लैंड सीरीज की तैयारी के मद्देनज़र इलाज के लिए वापस बुलाना पड़ा. रवींद्र जडेजा बैटिंग करते हुए मिचेल स्टार्क की गेंद पर अंगूठा चोटिल कर बैठे. वे लंबे समय के लिए खेल से बाहर हो गए और यहां तक कि इंग्लैंड दौरे पर भी नहीं जा पाएंगे. ऋषभ पंत को सिडनी में कोहनी में चोट लगी. और उनको फिर से दर्द उठने का अंदेशा बना हुआ है. गौर किया जाना चाहिए कि उन्हें सिडनी टेस्ट में विकेटकीपिंग में समस्या आ रही थी. हनुमा बिहारी की हैमस्ट्रिंग इंजरी अब ग्रेड टू तक पहुंच गई है. वे चौथे टेस्ट के आगे अब इंग्लैंड दौरे से भी बाहर हो गए हैं. अश्विन की समस्या खासतौर पर गौरतलब है. उनके बारे में एक तथ्य यह है कि उन्हें इस दौरे पर 134 ओवर की गेंदबाजी करनी पड़ी. नतीजन उनके शरीर पर इतना जोर पड़ गया कि वे इस समय कमर दर्द से परेशान हैं, सो नहीं पा रहे हैं और अपने जूते के फीते तक नहीं बांध पा रहे हैं. मंयक को नेट प्रैक्टिस में चोट लगी. और दिक्कत यह कि हनुमा विहारी के विकल्प समझे जाने वाले मयंक को चोटिल स्थिति में ही चौथा टेस्ट खिलाना पड़ सकता है. इधर जसप्रीत बुमराह के पेट में खिंचाव आ गया है और वे भी चौथा टेस्ट नहीं खेल पाएंगे. यानी ऑस्टेलियाई दौरे पर गए आधे से ज्यादा खिलाड़ियों का दल एक अस्पताल में तब्दील हो चुका है और ये तय करना मुश्किल हो रहा है कि चौथे टेस्ट में उतारने के लिए टीम बनाएं कैसे?

फिटनेस और चोट से बचाव की व्यवस्था पर सोचना पड़ेगाकोच रवि शास्त्री इस बारे में जरूर सोच रहे होंगे. जैसे तैसे चौथा टेस्ट भी निपट जाएगा. लेकिन इस दौरे के इस शोचनीय अनुभव के बाद खेल प्रशासकों को खिलाड़ियों की फिटनेस और चोट से बचाव की व्यवस्था पर गंभीरता से सोचने के काम पर लगना पड़ेगा. यह मामला सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र के उपचार विभाग का ही नहीं माना जाना चाहिए. मसला आरोग्य या बचाव का भी है. और यह बचाव मनोविज्ञान के नुक्तों तक पहुंचता है.

मनोविज्ञान क्या सुझा सकता है
विज्ञान की एक स्वतंत्रशाखा है विक्टिमोलॉजी. इस विज्ञान में पीड़ितों का अध्ययन किया जाता है. इसमें पीड़ित होने की प्रवणता यानी विक्टिम प्रोननैस का आकलन करते हैं. ऐसी पड़ताल हो तो बहुत संभव है कि यह निष्कर्ष निकले कि अपने खिलाड़ियों को हद से ज्यादा खिलवाकर हमने उनकी विक्टिम प्रोननेस बढ़ा दी. अपनी क्रिकेट टीम के चोटिल खिलाड़ियों में आधे खिलाड़ियों पर यही बात लागू होती है.

बचाव का मनोविज्ञान
शारीरिक हलचल वाले लगभग हर खेल में त्वरित प्रतिक्रिया या परिवर्ती क्रिया या रिफ्लेक्स एक्शन की सबसे बड़ी भूमिका होती है. खासतौर पर बचाव के लिए रिफ्लेक्स का अच्छा होना बहुत जरूरी माना जाता है. क्रिकेट के अच्छे कोच यही सिखाते हैं कि आखिरी समय तक गेंद को देखते रहने की आदत डालें. बाकी काम खिलाड़ी का अभ्यास और प्रकृति प्रदत्त रिफ्लेक्स खुद कर लेता है. लेकिन इधर फटाफट क्रिकेट के फॉर्मेट ने खिलाड़ियों पर जोखिम लेकर खेलने का दबाव बढ़ा दिया है. अपने जितने खिलाड़ी बल्लेबाजी करते हुए चोटिल हुए हैं, वे उस दबाव के शिकार माने जा सकते हैं. कोच और खेल प्रशासक अगर विशेषज्ञ सेवाएं लेने के बारे में सोच रहे हों तो उन्हें चिकित्सा क्षेत्र के अलावा खेल मनोविज्ञानियों को भी निगाह में रखना चाहिए.




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