राष्ट्रीय स्तर से भी ज्यादा है बिहार की आर्थिक विकास दर, लेकिन प्रति व्यक्ति आय बहुत कम

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बिहार विधानसभा चुनाव 2020

नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Election 2020) के लिए जोर-शोर से प्रचार चल रहा है. ऐसे में​ अगर इस चुनाव में बिहार के ​आर्थिक प्रदर्शन को एक प्रमुख मापदंड माना जाता है तो नीतिश कुमार की अगुवाई वाली NDA का पलड़ा भारी दिख रहा है. बिहार के 14वें इकोनॉमिक सर्वे 2019-20 को इसी साल फरवरी में जारी किया गया था. इस आंकड़े के मुताबिक, साल 2005-06 से लेकर 2014-15 के बीच बिहार का औसत विकास दर 10 फीसदी के करीब रहा है जोकि राष्ट्रीय स्तर से ज्यादा है. य​ह तेजी बिहार सरकार द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर किए गए खर्च की वजह से हुआ है. 2015-16 में बिहार सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी करीब 2.96 लाख करोड़ रुपये रहा है. 2005-06 में यह केवल 76,000 करोड़ रुपये ही था.

बिहार सरकार की राजस्व प्राप्ति और खर्च में अंतर
बीते कुछ सालों की बात करें तो बिहार सरकार द्वारा खर्च राज्य के राजस्व से मेल खाते नहीं दिख रहा है. हालिया इकोनॉमिक रिपोर्ट से पता चलता है कि 2018-19 में बिहार का राजस्व खर्च (Revenue Expenditure) 1,24,897 करोड़ रुपये और कुल खर्च 1,54,655 रुपये रहा है. इस प्रकार बिहार के लिए राजस्व खर्च में 21.7 फीसदी का इजाफा हुआ है. इस दौरान कुल राजस्व प्राप्ति (Revenue Receipt) 1,31,793 करोड़ रुपये रहा, जिसमें केवल 12.2 फीसदी का ही इजाफा हुआ है. साल 2004-05 से ही यह राज्य अनुदान राशि और केंद्रीय टैक्स राजस्व के लिए केंद्र सरकार पर अधिक निर्भर रहा है. 2018-19 में बिहार के कुल राजस्व प्राप्ति का 75 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार के अनुदान और टैक्स राजस्व के जरिए हुआ है.

यह भी पढ़ें: सिर्फ 5000 रुपए लगाकर कमाएं लाखों, शुरू करें ये बिजनेस हर महीने होगी मोटी कमाईबिहार की आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी खेती पर ही निर्भर है. इस राज्य में अभी भी इंडस्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग हब के लिए भरपूर संभावनाएं हैं. 2015-16 में बिहार के जब इंडस्ट्रियल सेक्टर के 7.1 फीसदी की तेजी से बढ़ रहा था, तब भी यहां के जीएसडीपी में इसका योगदान केवल 19 फीसदी ​ही था. राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत 30 फीसदी का है.

प्रति व्यक्ति आय कम
एक तरफ बिहार की इकोनॉमी में अच्छी तेजी देखने को मिल रही है. लेकिन, दूसरी तरफ प्रति व्यक्ति आय चिंता पैदा करती है. आज भी बिहार के करीब 70 फीसदी श्रम बल कृषि पर ही निर्भर है. भारतीय रिज़र्व बैंक के एक आंकड़े से पता चलता है कि बिहार में जीडीपी प्रति व्यक्ति आय 28,485 रुपये रहा. यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2017-18 का है. राष्ट्रीय स्तर पर यह 1,00,268 रुपये है. ​बीते 5 साल के दौरान बिहार में आॅपरेट करने वाली कुल फैक्ट्रियों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है. जून 2019 तक, बिहार के 6​ जिले देश के सबसे पिछले 117 जिलों में से एक है. ये जिले नवादा, अररिया, सीतामढ़ी, बांका और पुर्णियां है.

बेरोजगारी बड़ी समस्या
इस बार चुनाव में महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने राज्य में बेरोजगारी के मुद्दे को उठाया है. तेजस्वी प्रसाद यादव ने कहा है कि मौजूदा सरकार रोजगार के नये अवसर पैदा करने में विफल रही है. उन्होंने वादा किया है कि उनकी सरकार बनने पर राज्य के 10 लाख युवओं को नौकरी मिलेगी. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियान इकोनॉमी यानी सीएमआईई के आंकड़ों से पता चलता है कि बिहार में बेरोजगारी देश के अन्य राज्यों से कहीं ज्यादा है. जनवरी 2018 के बाद से अब तक बिहार और पूरे देश के औसत बेरोजगारी दर में अंतर बढ़ा है. कोविड-19 आउटब्रेक में भी बिहार के लोगों के सामने कई स्तर पर सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी.

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इस साल सितंबर तक राज्य में बेरोजारी दर 11.9 फीसदी रही, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 6.7 फीसदी पर रही है. ध्यान देने वाली बात है कि सीएमआईई के आंकड़े में अनौपचारिक इकोनॉमी में कार्यरत श्रमबल का आंकड़ा शामिल नहीं होता है. वास्तविक स्तर पर, अगर इन आंकड़ों को भी शामिल कर लिया जाता है तो बिहार में बेरोजगारी की बहुत बुरी स्थिति सामने आएगी.

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