J&K के 6 दलों ने लिया संकल्प-विशेष दर्जा वापस लेने के लिए लड़ेंगे, BJP ने बताया ‘दिवास्वप्न’ | nation – News in Hindi

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J&K के 6 दलों ने लिया संकल्प-विशेष दर्जा वापस लेने के लिए लड़ेंगे, BJP ने बताया

नेशनल कांफ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला ने पार्टी के पदाधिकारियों से मुलाकात की, वे एक साल से अधिक समय से नजरबंद थे (ट्विटर / J&K नेशनल कॉन्फ्रेंस)

चार अगस्त 2019 की ‘गुपकर घोषणा’ की बैठक (meeting) के बाद प्रस्ताव में कहा गया था कि दल सर्वसम्मति से घोषणा करते हैं कि जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) की पहचान, स्वायत्तता और विशेष दर्जे (Special Status) की रक्षा के लिए वे एकजुट रहेंगे.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    August 22, 2020, 10:27 PM IST

श्रीनगर. कश्मीर (Kashmir) में राजनीतिक दलों (political parties) ने शनिवार को सर्वसम्मति से संकल्प लिया कि वे जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में पांच अगस्त 2019 से पहले की तरह विशेष दर्जे (special status) की बहाली के लिए संघर्ष करेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उठाया गया कदम ‘‘द्वेष से पूर्ण अदूरदर्शी’’ तथा ‘‘पूरी तरह असंवैधानिक’’ (completely unconstitutional) था. विभिन्न दलों ने कहा कि वे ‘गुपकर घोषणा’ से बंधे हुए हैं, जो चार अगस्त 2019 को नेशनल कॉन्फ्रेंस (National Conference) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) के गुपकर आवास पर सर्वदलीय बैठक के बाद घोषित की गई थी. वहीं बीजेपी ने अनुच्छेदों (articles) को फिर से बहाल किये जाने की बात को “दिवास्वप्न देखना” और “असंंभव जैसा होना” बताया.

चार अगस्त 2019 की बैठक (meeting) के बाद प्रस्ताव में कहा गया था कि दल सर्वसम्मति से घोषणा करते हैं कि जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) की पहचान, स्वायत्तता और विशेष दर्जे की रक्षा के लिए वे एकजुट रहेंगे. इसके एक दिन बाद पांच अगस्त को केंद्र ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा (Special Status) वापस लेने और इसे दो केंद्रशासित प्रदेशों (Union Territory) में बांटने की घोषणा की थी.

गुपकर घोषणा में ऐसे कदम को बताया गया था आक्रामकता
‘गुपकर घोषणा’ में कहा गया था, ‘‘अनुच्छेद 35ए और अनुच्छेद 370 में संशोधन या इन्हें खत्म करना, असंवैधानिक सीमांकन या राज्य का बंटवारा जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के लोगों के खिलाफ आक्रामकता होगा.’’दलों ने करीब एक वर्ष से अधिक समय के बाद शनिवार को संयुक्त बयान जारी कर कहा कि वे पिछले वर्ष की घोषणा का पालन करेंगे.

जम्मू-कश्मीर के सभी प्रमुख दलों के नेता हुए इसमें शामिल
नेशनल कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जारी बयान में कहा गया कि पिछले वर्ष चार अगस्त को ‘गुपकर घोषणा’ पर हस्ताक्षर करने वाले दलों के बीच बहुत कम संवाद हो सका क्योंकि सरकार ने ‘‘कई पाबंदियां और दंडात्मक रोक’’ लगा रखी थीं, जिनका उद्देश्य ‘‘सभी सामाजिक और राजनीतिक बातचीत को रोकना था.’’

संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में नेशनल कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष जी. ए. मीर, माकपा के नेता एम. वाई. तारिगामी, जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन और जम्मू-कश्मीर आवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुजफ्फर शाह शामिल हैं.

बीजेपी ने कहा- अनुच्छेदों ने गलतफहमी का महासागर बनाने के अलावा कुछ नहीं किया
बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, जम्मू-कश्मीर भाजपा के अध्यक्ष रविंदर रैना ने कहा कि कश्मीर के राजनेता संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A की बहाली के बारे में “दिवास्वप्न देख रहे हैं” जो “असंभव के जैसा” है. उन्होंने दावा किया कि विवादित अनुच्छेद एक “घृणा की दीवार” की तरह थे, जिन्होंने “गलतफहमी का एक महासागर बनाने” के अलावा कुछ भी नहीं किया था और पहले के राज्य की बढ़त और विकास को रोके रखा था. उन्होंने कहा कि “अनुच्छेद 370 और 35 (ए) की बहाली असंभव जैसी है.”

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