बिहार की राजनीति: मांझी ने अपना दांव चल दिया, क्या पासवान भी फकेंगे पासा | nation – News in Hindi

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बिहार की राजनीति: मांझी ने अपना दांव चल दिया, क्या पासवान भी फकेंगे पासा

जीतन राम मांझी के महागठबंधन से निकलने के बाद बिहार की राजनीति में कुछ बड़े बदलाव दिख सकते हैं. (फाइल फोटो)

हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi) विपक्षी महागठनबंधन से अलग हो गए हैं. विधानसभा चुनाव में एनडीए को मात देने की कोशिश में लगे महागठबंधन के लिए इसे बड़ा झटका माना जा रहा है. अगर वो सत्ताधारी गठबंधन की तरफ जाते हैं तो क्या राम विलास पासवाल कोई नया दांव चलेंगे?

नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) के महज तीन पहले राज्य की दलित और महादलित राजनीति का मामला गर्मा गया है. हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi) विपक्षी महागठनबंधन से अलग हो गए हैं. विधानसभा चुनाव में एनडीए को मात देने की कोशिश में लगे महागठबंधन के लिए इसे बड़ा झटका माना जा रहा है.

क्या बोले HAM  के प्रवक्ता दानिश रिजवान
HAM के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा-अब हमारी पार्टी महागठबंधन का हिस्सा नहीं है. बिहार के राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मांझी सत्ताधारी गठबंधन की तरफ अपना रुख कर सकते हैं.

श्याम रजक फिर आरजेडी पहुंचेइससे पहले इसी सप्ताह में बिहार के उद्योग मंत्री श्याम रजन ने मतभेदों को लेकर जेडीयू से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल ज्वाइन कर लिया है. श्याम रजक फुलवारी शरीफ सुरक्षित सीट से विधायक हैं और मजबूत दलित चेहरे हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अपनी विधानसभा में उनकी पकड़ अल्पसंख्यकों में भी काफी मजबूत है. 2009 में जेडीयू ज्वाइन करने के पहले श्याम रजक राष्ट्रीय जनता दल में ही थे. अब माना जा रहा है मांझी के जरिए रजक की खाली जगह भरी जा सकती है.

लोक जनशक्ति पार्टी का क्या होगा रुख
उधर लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान इस वक्त अप्रवासी मजदूरों और कोरोना महामारी को लेकर सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे हैं. कहा जा रहा है कि बिहार विधान परिषद में 12 नॉमिनेशन्स को लेकर जेडीयू द्वारा अहमियत न मिलने की वजह से पासवान खेमे में नाराजगी है.

गौरतलब है कि जेडीयू साफ करती रही है कि राज्य में उसका एलजेपी के साथ कोई गठबंधन नहीं है. जीतन राम मांझी के साथ पार्टी की नजदीकी की वजह से एक मजबूत दलित चेहरा भी गठबंधन को मिल सकता है. इस वजह से माना जा रहा है कि निकट भविष्य में लोकजनशक्ति पार्टी की तरफ से भी कोई नया राजनीतिक दांव खेला जा सकता है.

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