उपभोक्ता मंत्री ने चेक की दवा की एक्सपारी डेट, गड़बड़ी मिलने पर छापेमारी के बाद कंपनी को भेजा नोटिस | business – News in Hindi

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उपभोक्ता मंत्री ने चेक की दवा की एक्सपारी डेट, गड़बड़ी मिलने पर छापेमारी के बाद कंपनी को भेजा नोटिस

इस दवा पर एक्सपायरी डेट के अलावा निर्माता कंपनी का नाम और पता भी पढ़ने योग्य नहीं था.

विटामिन की दवा पर पारदर्शी तरीके से एक्सपायरी डेट नहीं लिखे जाने पर के शिकायत दर्ज की गई है. विक्रेताओं के माध्यम से दवा निर्माता कंपनी को नोटिस भेजा गया है. यह मामला केंद्रीय उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) से जुड़ा है.

नई दिल्ली. विटामिन की एक दवाई पर एक्सपायरी डेट (Expiry Date) सही से न लिखा पाए जाने पर केंद्रीय उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) की एक शिकायत पर कार्रवाई की गई है. गौर करने वाली बात है कि मामला केंद्रीय मंत्री के मंत्रालय से जुड़ा है. दरअसल, पिछले महीने जब केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने अपने घर में इस दवा की एक्सपायरी डेट पढ़नी चाही तो दवा पर पारदर्शी तरीके से एक्सपायरी डेट लिखा नहीं मिला. इसके अलावा निर्माता कंपनी का नाम और पता भी पढ़ने योग्य नहीं था. केंद्रीय मंत्री ने खुद के विभाग से मामले पर कार्रवाई करने को कहा गया.

इसके बाद आंध्र प्रदेश के गुंटूर और महाराष्ट्र में संबंधित दवा विक्रेताओं की फैक्ट्री में छापेमारी की गई और फिर केस दर्ज किया गया. पिछले महीने केस दर्ज कराया गया है. विक्रेताओं के माध्यम से दवा निर्माता कंपनी को नोटिस भेजा गया है.

दवा की एक्सपायरी डेट का मतलब क्या होता है?
आप कोई भी दवा खरीदें या स्वास्थ्य से जुड़ा कोई भी पदार्थ, आपको उसमें दो तारीखें स्पष्ट नजर आएंगी. पहली उसकी मैन्युफैक्चारिंग डेट यानी वह तारिख जिस दिन यह दवा बनी थी और एक्सपायरी डेट यानी वह तारिख जिसके बाद से इस दवा के प्रभाव की गारंटी उसे बनाने वाली कंपनी नहीं लेगी. दवाएं किसी किस्म का केमिकल होती हैं. सभी केमिकल पदार्थों की यह विशेषता है कि समय बीतने के साथ उनका असर बदलता जाता है. ऐसा ही दवाओं के साथ भी होता है. हवा, नमी, गर्मी इत्यादि की वजह से कई बार समय बीतने के साथ दवाओं की प्रभावशीलता धीरे-धीरे घटने लगती है. इसी वजह से इसके साइड-इफेक्ट यानी दुष्परिणाम भी हो सकते हैं.यह भी पढ़ें: टाटा की IT कंपनी TCS पर लगा चोरी आरोप! कोर्ट ने लगाया 2100 करोड़ का जुर्माना

क्या एक्सपायर होते ही खराब हो जाती हैं दवाएं?
अमेरिका के मेडिकल संगठन AMA ने 2001 में एक जांच की. उन्होंने 122 अलग-अलग दवाइयों के 3000 बैच लिए और उनकी स्थिरता को जांचा. इस स्थिरता के आधार पर AMA ने करीब 88% दवाइयों की एक्सपायरी डेट करीब 66 महीने तक आगे बढ़ा दी. इसका मतलब साफ है कि अधिकतर दवाओं के कार्य करने की क्षमता उनपर छपी हुई एक्सपायरी डेट से बहुत अधिक होती है. जिन दवाओं की एक्सपायरी डेट AMA ने आगे बढ़ाई थी उनमें एमोक्सिसिलिन, सिप्रोफलोक्सेसिन, मोर्फिन सलफेट आदि शामिल थीं. हालांकि 18% दवाओं को उनकी एक्सपायरी के साथ ही फेंक दिया गया था.

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