तथागत और सौगत रॉयः बंगाल चुनाव 2021 में ‘राम और लखन’ की क्या होगी भूमिका? | nation – News in Hindi

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तथागत और सौगत रॉयः बंगाल चुनाव 2021 में

सौगत और तथागत राय.

तथागत रॉय (Tathagata Roy) और उनके छोटे भाई सौगत रॉय (Saugata Roy) बंगाल की राजनीति में जानी मानी हस्ती हैं. हिंदुओं के रक्षक के रूप में उभरे संघ से जहां एक तरफ तथागत प्रभावित थे तो वहीं दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस के वर्तमान सांसद उनके छोटे भाई सौगत रॉय बंगाल में कम्यूनिस्टों के दमन भरे किस्सों को सुनसुनकर बड़े हुए और गांधीवादी विचारधारा के मुरीद बने.

कोलकाता. 27 दिसंबर 1963 में जम्मू एवं कश्मीर के हजरतबल दरगाह (Hazratbal Shrine) से मुस्लिमों की एक पवित्र निशानी चोरी होने से नाराज समुदाय ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) और पूर्वी पाकिस्तान (East Pakistan) में जमकर हिंसात्मक प्रदर्शन किए. 4 जनवरी, 1964 में रहस्यात्मक ढंग से जब तक वह पवित्र निशानी मिल नहीं गई यह खूनी प्रदर्शन जारी रहे. सांप्रदायिक दंगों से पूरा बंगाल जल उठा. शरणार्थी हिंदूओं इन दंगों की आग में जल रहे थे.  इस घटना से बेहद आहत कलकत्ता से कुछ ही दूर बंगाल इंजिनियरिंग कॉलेज, सिबपुर में पढ़ने वाले सिविल इंजिनियरिंग के छात्र तथागत ने जैसे तैसे इन दंगों से खुद को बचाया.

सांप्रदायिक हिंसा और खूनी दंगों के बीच तथागत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और हिंदुओं के लिए काम करने वाले समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता करीब आ गए. बंगाल में तथागत रॉय और उनके छोटे भाई सौगत रॉय बेहद जाना माना नाम हैं. लेकिन फिलहाल तथागत मीडिया की सुर्खियों में इस बार मेघालय के गवर्नर पद से सेवानिवृत्त होने की वजह से हैं. 19 अगस्त 2020 की शाम को तथा सेवानिवृत्त हुए.

कौन हैं तथागत और सौगत रॉय
तथागत रॉय (Tathagata Roy) और उनके छोटे भाई सौगत रॉय (Saugata Roy) बंगाल की जानी मानी हस्ती हैं. तथागत रॉय का जन्म कलकत्ता के एक जाने-माने बेहद संपन्न घराने में हुआ था. इस घराने का संबंध दशकों पुराने जमींदार खानदान से था. खेती-बाड़ी, डेयरी और मछली पालन जैसे साधनों से संपन्न घराने में पैदा हुए तथागत जहां एक तरफ अपने पुरखों की संपन्नता के किस्से सुनकर बड़े हुए थे वहीं दूसरी तरफ बंग्लादेश बंटवारे के दौरान हुई खूनी हिंसा के गवाह बने अपने पुरखों से सुनी उस वक्त हुए अत्याचार की कहानियां भी उनके बचपन से लेकर जवानी तक के सफर का हिस्सा रहीं.दरअसल, बंटवारे के बाद पूर्वी पाकिस्तान में रहने वाले उनके पुरखों को अपनी सारी जायदाद छोड़कर जैसे-तैसे अपनी जान बचाकर भागना पड़ा था. बंटवारे का दंश झेलने वाले शरणार्थी हिंदुओं के दर्द और उन पर हुए अत्याचार की कहानियों के बीच तथागत बड़े हुए. दो बार 1947 और 1971 में बंटवारे के दौरान के किस्से उन्होंने किसी और से नहीं बल्कि इस दौरान हुई हिंसा का दंश झेलने वाले अपनों से सुने.

हिंदुओं के रक्षक के रूप में उभरे संघ से जहां एक तरफ तथागत प्रभावित थे तो वहीं दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस के वर्तमान सांसद उनके छोटे भाई सौगत रॉय बंगाल में कम्यूनिस्टों के दमन भरे किस्सों को सुनसुनकर बड़े हुए और गांधीवादी विचारधारा के मुरीद बने.

दोनों भाइयों पर एक ही गुरु का पड़ा प्रभाव
भारतीय लेखक, शिक्षाविद् और बंगाल के पूर्व सांसद प्रमाथा नाथ विसी का दोनों भाईयों पर गहरा प्रभाव था. विसी 1962-1968 तक पश्चिम बंगाल विधान सभा के सदस्य रहे.  1972-1978 तक राज्यसभा के नामित सदस्य रहे. तथागत और सौगत ने एक ही गुरु के दो पहलुओं को अलग-अलग अपनाया. News18.com से बातचीत के दौरान तथागत ने बताया बिसी सर ने वामपंथ विरोध होने के साथ ही गांधीवादी विचारधारा को गहराई से अपनाया था. सौगत ने गांधीवादी विचारधारा को अपनाया तो मैंने वामपंथ विरोध को.

(सुजीत नाथ की स्टोरी से इनपुट्स के साथ. पूरी स्टोरी यहां क्लिक कर पढ़ी जा सकती है.)

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