Pak army and ISI chief on Riyadh damage control trip | पाक सेना और आईएसआई प्रमुख रियाद की क्षति नियंत्रण यात्रा पर

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इस्लामाबाद, 18 अगस्त (आईएएनएस)। सऊदी के नेतृत्व वाले संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की ओर से कश्मीर मुद्दे पर कोई समर्थन न मिलने पर हाल ही में पाकिस्तान की बौखलाहट देखने को मिली थी। उसने इस मुद्दे पर ओआईसी की आलोचना की, जिसके बाद सऊदी अरब ने कठोर प्रतिक्रिया के तौर पर पाकिस्तान को दी जा रही वित्तीय सहायता की तत्काल वापसी की बात कही। अब पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य अधिकारी और खुफिया एजेंसी के प्रमुख दोनों देशों के तनावपूर्ण संबंधों को संतुलित करने के लिए रियाद के दौरे पर हैं।

उनका यह दौरा एक क्षति नियंत्रण यात्रा (डैमेज कंट्रोल ट्रिप) के तौर पर कहा जा सकता है।

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद के साथ दोनों देशों के बीच संबंधों को ठीक करने के प्रयास में सऊदी नेतृत्व से मिलने के लिए रियाद में हैं।

सऊदी रक्षा मंत्रालय के एक बयान में कहा गया, बैठकों के दौरान, उन्होंने सैन्य सहयोग की संभावनाओं और इसे बढ़ावा देने के साथ-साथ सामान्य हित के अन्य विषयों पर चर्चा की।

सऊदी अरब द्वारा पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के चेतावनी भरे बयान पर प्रतिक्रिया देने के बाद यह यात्रा काफी महत्व रखती है। कुरैशी ने हाल ही में कश्मीर मुद्दे पर ओआईसी पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने ओआईसी के सहयोग के बिना ही कश्मीर मुद्दे पर एक अन्य देश में मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित करने की धमकी दी थी।

इस बयान के बाद सऊदी नेतृत्व की ओर से भी गुस्सा देखने को मिला, जिसने इसकी प्रतिक्रिया के तौर पर 2018 में पाकिस्तान को प्रदान किए गए 3.2 अरब डॉलर की तेल ऋण सुविधा पर रोक लगा दी। इसके साथ ही सऊदी ने तीन अरब डॉलर के ऋण को वापस करने के लिए भी कहा, जिसे उसने पाकिस्तान को एक बेलआउट पैकेज के तौर पर दिया था।

सैन्य प्रतिष्ठान के सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि सऊदी अरब और पाकिस्तान दोनों के बीच पारंपरिक रूप से घनिष्ठ संबंध हैं, रियाद पाकिस्तान की उस आलोचना से गुस्से में है कि सऊदी अरब कश्मीर मुद्दे पर उदासीन बना हुआ है, यही वजह है जिसने सेना प्रमुख को सऊदी अरब जाने के लिए प्रेरित किया।

दरअसल भारत की ओर से पांच अगस्त 2019 को जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35ए को निरस्त कर दिया था, जिसके बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है।

कुरैशी ने कहा, मैं एक बार फिर से पूरे सम्मान के साथ ओआईसी से कहना चाहता हूं कि विदेश मंत्रियों की काउंसिल की मीटिंग से हमारी अपेक्षा है। अगर आप इसे बुला नहीं सकते हैं तो मैं प्रधानमंत्री इमरान खान से यह कहने के लिए बाध्य हो जाऊंगा कि वह ऐसे इस्लामिक देशों की मीटिंग बुलाएं, जो कश्मीर मुद्दे पर हमारे साथ खड़े होने के लिए तैयार हैं।

कुरैशी के बयान की विपक्षी दलों ने आलोचना करते हुए इसे गैर जिम्मेदाराना करार दिया था।

दुनिया में इस्लामी देशों के सबसे बड़े संगठन ओआईसी से पाकिस्तान कई बार गुजारिश कर चुका है कि वह कश्मीर मुद्दे पर एक मीटिंग आयोजित करे, लेकिन संगठन ने हर बार उसकी अपील को दरकिनार किया है।

दरअसल ओआईसी में किसी भी कदम के लिए सऊदी अरब का साथ सबसे ज्यादा जरूरी होता है। ओआईसी पर सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों का दबदबा है। कश्मीर पर सऊदी अरब के कदम नहीं उठाने से पाकिस्तान की कुंठा बढ़ती ही जा रही है।

एकेके/एएनएम

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