MS Dhoni Retirement: बस कुछ इंच रह गए…बहुत भारी था पवेलियन की सीढ़ियां चढ़ते धोनी के पैरों का ‘बोझ’ | cricket – News in Hindi

0
13
MS Dhoni Retirement: बस कुछ इंच रह गए...बहुत भारी था पवेलियन की सीढ़ियां चढ़ते धोनी के पैरों का

नई दिल्ली. वो योद्धा है, कभी हार न मानने वाला. कभी धैर्य न खोने वाला, भावनाएं छिपाने में माहिर. मगर वो है तो एक इंसान ही…

ये वो खिलाड़ी है जो मुश्किल से मुश्किल हालात में भी हंसता नजर आता है. वो खिलाड़ी जिसने भारत को ऐसे अनगिनत मैच जिताए, जिसमें जीतने की उम्मीद हर कोई छोड़ चुका था. वो खिलाड़ी जिसे टीम इंडिया में संकट के समय सबसे पहले याद किया जाता है.

मगर न्यूजीलैंड के खिलाफ वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मुकाबले में भारत का यह संकटमोचक फिनिशिंग लाइन पार नहीं कर सका. 71 रन पर पांच विकेट भारतीय टीम गंवा चुकी थी. क्रीज पर हार्दिक पंड्या का साथ देने धोनी उतरे. तब जीत के लिए चाहिए थे 27 ओवर में 169 रन. यानी सब कुछ माही के अनुसार. आखिर ऐसे मुश्किल हालात में तपकर ही तो धोनी सोना बने हैं.

धोनी और बाकी खिलाड़ियों में फर्क!मगर पूर्व कप्तान का साथ हार्दिक पंड्या भी ज्यादा देर नहीं निभा सके और वैसा शॉट खेलकर आउट हुए जो बताता है कि धोनी और बाकी खिलाड़ियों में आखिर फर्क क्या है. धोनी थे तो उम्मीद थी, और वर्ल्ड कप की आस भी. उन्हें साथ मिला एक ऐसे खिलाड़ी का जिसे टीम ने शुरुआती सात मैचों में टीम में जगह ही नहीं दी थी. इंग्लैंड में भारत का ट्रंपकार्ड यानी रवींद्र जडेजा. जडेजा को एक छोर पर मजबूती से डटे धोनी का विश्वास मिला तो वो शुरू हो गए ताबड़तोड़ अंदाज में जीत का फासला कम करने में. दोनों समझबूझ और आक्रमण व डिफेंस में तालमेल के साथ टीम को जीत के काफी करीब ले आए. यहां रवींद्र जडेजा 77 रन बनाकर 48वें ओवर की आखिरी गेंद पर आउट हो गए. दो ओवरों में अब टीम को 31 रन की दरकार थी. यानी जडेजा अपना काम कर चुके थे. अब ये बाजी धोनी की ही थी. उन्हीं की हो भी सकती थी.

गप्टिल के सीधे थ्रो ने तोड़ा भारतीयों का दिल
49वें ओवर की पहली गेंद… बैकवर्ड प्वाइंट के ऊपर से झनझनाता छक्का धोनी ने रसीद करते हुए फग्युर्सन का स्वागत किया. मानो कह रहे हों कि यहां और इन हालात का राजा मैं हूं. दूसरी गेंद पर कोई रन नहीं बना. और फिर आई वो गेंद, जिसने दुनियाभर के क्रिकेट प्रशंसकों को स्तब्‍ध कर दिया. धोनी ने फग्युर्सन की इस उठती गेंद को लेग साइड पर खेला और इस विश्वास के साथ दौड़ पड़े कि वो दूसरा रन पूरा कर लेंगे. पूरा कर भी लेते अगर मार्टिन गप्टिल के सीधे थ्रो ने भारतीयों का दिल न तोड़ दिया होता तो. धोनी बस 1-2 इंच दूर रह गए. और यही फासला फाइनल और टीम इंडिया के बीच का भी साबित हुआ.

चेहरे पर थी मायूसी और बेबसी
शॉट खेलते ही धोनी ने अपने हाथ को झटका जो बता रहा था कि उनके अंगूठे की चोट के बावजूद वो टीम को जीत दिलाने के लिए मजबूती से डटे थे. और जब अपने बड़े-बड़े रिकॉर्डों से पूरी दुनिया नाप चुका ये खिलाड़ी मैदान से बाहर जा रहा था तो चेहरे पर मायूसी और बेबसी दोनों एक साथ उतर आई थी. पवेलियन की सीढ़ियां चढ़ते महेंद्र सिंह धोनी को शायद इससे पहले कभी अपने पैरों का इतना बोझ महसूस नहीं हुआ होगा, जितना कि अब हो रहा था.

अब नीली जर्सी में खेलते नहीं दिखेंगे माही
350 वनडे का करियर और अनगिनत रिकॉर्ड. बतौर बल्लेबाज, बतौर कप्तान, बतौर विकेटकीपर, बतौर मेंटर, बतौर रणनीतिज्ञ हर भूमिका में खरा. कहते हैं कि बाकी कप्तान और खिलाड़ी मैच के दौरान जहां पिच पढ़ते हैं, वहीं महेंद्र सिंह धोनी वो नाम है जो पिच से लेकर, मौसम की स्थिति, विपक्षी टीम की ताकत-कमजोरी, आउटफील्ड और हवा का रुख सब भांप लेता है. ये खिलाड़ी अब हमें नीली जर्सी में खेलता नजर नहीं आएगा, लेकिन एक चीज जो टीम इंडिया में हमें हमेशा नजर आएगी, वो है धोनी का अहसास, जिसे न कभी मिटाया जा सकेगा और न ही भुलाया जा सकेगा.

महेंद्र सिंह धोनी… सिर्फ नाम ही काफी है.

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here