NBFC और HFC को नकदी संकट से उबारेगी सरकार, PCGS नियमों में दी ढील | business – News in Hindi

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NBFC और HFC को नकदी संकट से उबारेगी सरकार, PCGS नियमों में दी ढील

आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत 20 मई को पीसीजीएस 2.0 योजना की घोषणा की गई थी.

संकट से जूझ रही NBFC और HFC को अतिरिक्त नकदी उपलब्ध कराने के मकसद से सरकार ने सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा उनके वाणिज्यिक पत्रों और बांड को खरीदने की आंशिक ऋण गारंटी योजना (PCGS) के नियमों में ढील दी है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    August 17, 2020, 11:39 PM IST

नई दिल्ली. संकट से जूझ रही गैर बैंकिग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और आवास वित्त कंपनियों (HFC) को अतिरिक्त नकदी उपलब्ध कराने के मकसद से सरकार ने सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा उनके वाणिज्यिक पत्रों और बांड को खरीदने की आंशिक ऋण गारंटी योजना (PCGS) के नियमों में ढील दी है. सरकार ने याजना की अवधि को भी तीन माह बढ़ा दिया है. योजना के तहत हुई प्रगति को देखते हुये सरकार ने कुछ कदम उठाये हैं. जहां तक इन वित्त संस्थानों के AA और AA- रेटिंग वाले बांड और कॉमर्शियल पेपर को लेने की बात है, इनके लिये तय सीमा को करीब करीब हासिल कर लिया गया है जबकि कम रेटिंग वाले कॉमर्शियल पेपर में खरीदार नहीं मिल रहे हैं. यही वजह है कि सरकार ने अब पीसीजीएस 2.0 मे सुधार करने का फैसला किया है.

पोर्टफोलियो बेहतर करने के​ लिए 3 महीने का समय
वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने एक वक्तव्य में कहा है कि पोर्टफोलियो को बेहतर बनाने के लिये तीन माह का अतिरिक्त समय दिया गया है. छह माह की समाप्ति यानी 19 नवंबर 2020 को वितरित की गई वास्तविक राशि के आधार पर पोर्टफोलियो को वास्तविक रूप दिया जायेगा, उसके बाद ही गारंटी प्रभाव में आयेगी.

कॉमर्शियल पेपर के नियमों में ढीलइसमें कहा गया है कि पोर्टफोलियो के स्तर पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा योजना के तहत खरीदे गये एए और एए- निवेश वाले पोर्टफोलियो बांड और कॉमर्शियल पेपर कुल पोर्टफोलियो का 50 फीसदी से अधिक नहीं होने चाहिये. इससे पहले यह सीमा 25 फीसदी तय की गई थी. बयान में कहा गया है कि ऐसी उम्मीद है कि इस सुधार से बैंकों को पीसीजीएस 2.0 के तहत बांड और ऋण पत्रों को खरीदने में कुछ लचीलालापन मिलेगा.

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राहत पैकेज में हुआ था ऐलान
सरकार के 20.97 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज (Atmnirbhar Bharat Package) के तहत 20 मई को PCGS 2.0 योजना की घोषणा की गई थी. इसमें एनबीएफसी और एचएफसी, सूक्ष्म वित्त संस्थानों द्वारा जारी एए और इससे कम रेटिंग वाले बांड एवं ऋण पत्रों को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा खरीदने पर गारंटी का प्रावधान है.

PCGS 2.0 के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कुल मिलकर 21,262 करोड़ रुपये के 28 संस्थानों द्वारा जारी एए और एए- रेटिंग वाले बांड एवं रिण पत्रों और 62 संस्थनां द्वारा जारी किये गये AA- से कम रेटिंग वाले बांड और रिण पत्रों को खरीदने को मंजूरी दी है.

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सरकारी घोषणा में PCGS 2.0 के तहत 45,000 करोड़ रुपये के बांड और कॉमर्शियल पेपर्स को खरीदने का प्रावधान किया गया था. इसमें एए और एए- वाले बांड के लिये 25 फीसदी पोर्टफोलियो की अनुमति थी जो कि 11,250 करोड़ रपये तक था. इसके अलावा सरकार ने अलग से विशेष तरलता योजना की भी घोषणा की थी. इसमें तीन माह तक की शेष अवधि के लिये जिसे तीन माह और आगे बढ़ाया जा सकता है, उसमें 30,000 करोड़ रुपये तक के बांड और गैर परिवर्तनीय डिबेंचर खरीदने का प्रावधान किया गया.

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