राजस्थान संकट: क्या होता है विश्वासमत, अविश्वासमत से ये किस तरह अलग? | jaipur – News in Hindi

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राजस्थान संकट: क्या होता है विश्वासमत, अविश्वासमत से ये किस तरह अलग?

अशोक गहलोत की सरकार ने राजस्थान विधानसभा में विश्‍वासमत (Trust Vote) के प्रस्‍ताव को लेकर नोटिस दिया है. अब विधानसभा अध्‍यक्ष डॉ. सीपी जोशी इस पर फैसला लेंगे.जानते हैं क्या होता है विश्वासमत और किस तरह इससे उलट होता अविश्वास प्रस्ताव.

राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सदस्य हैं. इसमें कांग्रेस के पास 107 विधायक हैं. सचिन पायलट ने 19 विधायकों के साथ विद्रोह किया था लेकिन अब उनका अशोक गहलोत गुट के साथ फिर मेलमिलाप हो चुका है. इसके अलावा कांग्रेस सरकार को कई और दलों के विधायकों का समर्थन हासिल है, जिसमें बीपीपी 02 विधायक, सीपीआई (एम) 02 विधायक, आरएलडी 01 विधायक.और 12 निर्दलीय विधायक शामिल हैं.

वहीं विपक्ष के पास 76 विधायक हैं, इसमें भारतीय जनता पार्टी के 72 और आऱएलपी के 03 व 01 निर्दलीय विधायक है.

इससे ये लगता है कि राजस्थान विधानसभा में अशोक गहलोत के लिए विश्वास मत हासिल करना कोई मुश्किल नहीं होना चाहिए. 200 सदस्यों के इस सदन में कांग्रेस को बहुमत साबित करने के लिए 101 वोटों की जरूरत होगी लेकिन मौजूदा आंकड़ा कहता है कि उसके पास कुल 124 विधायक हैं.ये भी पढ़ें :- पाकिस्तान का 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाना क्या कानूनी तौर पर गलत है

विश्‍वासमत क्‍या होता है?
विश्‍वास प्रस्‍ताव या विश्‍वासमत के जरिए सरकार लोकसभा सांसदों के बहुमत को साबित करती है. विश्‍वासमत विपक्ष के अविश्‍वास प्रस्‍ताव या सरकार की ओर से विश्‍वास मत लाने के बाद सामने आता है. जैसे राजस्थान में मौजूदा अशोक गहलोत सरकार ने स्पीकर के सामने विश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस दिया है. अगर स्पीकर इसे मंजूर कर लेते हैं तो उन्हें विश्वास मत पर साबित करना होगा यानी बहुमत साबित करना होगा.

विश्वास मत के जरिए सत्ताधारी दल ये साबित करता है कि उसे सदन में बहुमत हासिल है (फाइल फोटो)

अगर विश्वास मत हार जाएं तो
अगर सरकार विश्‍वास मत हार जाती है तो आमतौर पर दो स्थितियां बनती हैं: सरकार इस्‍तीफा देती है और दूसरी पार्टी या गठबंधन सरकार बनाने का दावा करती है. इसके अलावा सदन को रद कर चुनाव भी कराए जा सकते हैं.

अविश्‍वास प्रस्‍ताव क्‍या होता है?
किसी भी सरकार को सत्‍ता में बने रहने के लिए लोकसभा या विधानसभा में बहुमत और विश्‍वासमत की जरूरत होती है. विपक्षी दल अविश्‍वास प्रस्‍ताव यह बताने के लिए लाते हैं कि सत्‍ताधारी दल के पास सदन में बहुमत नहीं है. अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाने वाले सांसदों को इस‍के लिए कोई वजह‍ बताने की आवश्‍यकता नहीं होती है. लोकसभा स्‍पीकर के इस प्रस्‍ताव को स्‍वीकार करने के बाद सरकार को सदन में बहुमत साबित करना होता है.

वैसे राजस्थान में एक दिन पहले तक भारतीय जनता पार्टी ने कहा था कि राजस्थान सरकार का सत्र शुरू होने पर वो उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे. हालांकि ये स्पीकर पर निर्भर करता है कि वो क्या करे, खासकर जबकि सत्तापक्ष विश्वास प्रस्ताव पहले ही पेश कर दे.

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कौन ला सकता है अविश्वास प्रस्ताव
सदन में कोई भी पार्टी या सदस्‍य अविश्‍वास प्रस्‍ताव ला सकता है. यह केवल लोकसभा और विधानसभा में ही लाया जा सकता है. इसे राज्‍य सभा में पेश नहीं लाया जाता. अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाने के लिए इसे सदन में सुबह 10 बजे से पहले लिखित रूप में पेश करना होता है. इसके बाद स्‍पीकर इसे सदन में पढ़ता है. इसमें कम से कम 10 फीसदी सदस्यों के समर्थन की जरूरत होती है. ऐसा होने पर स्‍पीकर अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर चर्चा के लिए तारीख का ऐलान करता है. अविश्‍वास प्रस्‍ताव स्‍वीकार होने के 10 दिन के भीतर इस पर बहस करनी होती है. ऐसा नहीं होने पर प्रस्‍ताव फेल हो जाता है.

तब सरकार को इस्तीफा देना होता है
विश्वास मत और अविश्वास मत दोनों ही स्थितियों में अगर सरकार सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाती तो उसे इस्‍तीफा देना पड़ता है.ये स्थितियां कई बार देश में विधानसभाओं और लोकसभा में देखने में आई हैं.

व्हिप क्‍या होता है?
व्हिप एक तरह का आदेश होता है जिसमें राजनीतिक दल अपने सांसदों या विधायकों को सदन में मौजूद रहने और वोट देने के लिए जारी होता है. यदि कोई सांसद या विधायक व्हिप को नहीं मानता है तो पार्टी उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है और उसे पार्टी से निकाला भी जा सकता है.

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