कर्नाटक में आदि शंकराचार्य की प्रतिमा पर मिला ‘SDPI का झंडा’, तनावपूर्ण हालात | nation – News in Hindi

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कर्नाटक में आदि शंकराचार्य की प्रतिमा पर मिला

शंकराचार्य की प्रतिमा के ऊपर पड़े कपड़े एसडीपीआई का झंडा बताया जा रहा है.

राज्य के चिकमंगलूर जिले में आदि शंकराचार्य की प्रतिमा पर सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (Socialist Democratic Party of India-SDPI) के झंडे से मिलता-जुलता कपड़ा मिलने के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नाराज स्थानीय नेताओं का आरोप है कि ये झंडा SDPI का है. इन नेताओं ने मामले की जांच की मांग की है.

बेंगलुरु. एक विवादित फेसबुक पोस्ट को लेकर तीन दिन पहले बेंगलुरु में हुई हिंसा के बाद कर्नाटक के एक और जिले में विवाद बढ़ गया है. राज्य के चिकमंगलूर जिले के श्रृंगेरी इलाके में आदि शंकराचार्य की प्रतिमा पर सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (Socialist Democratic Party of India-SDPI) के झंडे से मिलता-जुलता कपड़ा मिलने के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नाराज स्थानीय नेताओं का आरोप है कि ये झंडा SDPI का है. इन नेताओं ने मामले की जांच की मांग की है.

धार्मिक तौर पर विख्यात है श्रृंगेरी
रिपोर्ट्स के मुताबिक इलाके के पूर्व विधायक डीएन देवराज ने इसे लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया है. गौरतलब है कि चिकमंगलूर का श्रृंगेरी टाउन धार्मिक तौर पर विख्यात है. आदि शंकराचार्य की प्रतिमा को इलाके में बेहद श्रद्धापूर्ण भाव से देखा जाता है. आदि शंकराचार्य ने यहां पर श्रृंगेरी मठ की स्थापना की थी. डीएन देवराज ने कहा है-‘ये झंडा एसडीपीआई का है और ऐसा करके भावनाएं भड़काने की कोशिश की जा रही है. हम इस मामले जांच की मांग करते हैं. अपने धर्म का अपमान नहीं सहन करेंगे.’

क्या बोले एसपीचिकमंगलूर के एसपी ने एक वेबसाइट से बातचीत में कहा है कि उन्होंने मामले को लेकर एफआईआर दर्ज कर ली है. जांच की जा रही है कि ये झंडा वाकई एसडीपीआई का है या फिर किसी और संस्था से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा है कि ये कपड़ा कहीं और से उड़कर भी आया हुआ हो सकता है. हम कोशिश कर रहे हैं कि इसे लेकर दो समुदायों के बीच में तनाव जैसी स्थिति न पैदा हो.

SDPI पर लग सकता है बैन!
गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार में मंत्री केएस ईश्वरप्पा ने कहा है कि SDPI एक वाहियात संगठन है और इस पर बैन लगाने पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने कहा है कि दो कदमों पर विचार किया जा रहा है. पहला, बेंगलुरु सांप्रदायिक हिंसा में शामिल लोगों की संपत्ति जब्त कर जुर्माना वसूलने का और दूसरा, SDPI पर बैन. SDPI का नाम बेंगलुरु हिंसा में सामने आया है. 11 अगस्त की रात को बेंगलुरु में भीड़ (Bengaluru Violence) की हिंसा में जांच आगे बढ़ने के साथ, SDPI सुर्खियों में आ गई है.

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