नेपोटिज्म पर बहस को संजय गुप्ता ने कहा बकवास, सुशांत सिंह राजपूत के पास नहीं थी फिल्मों की कमी | bollywood – News in Hindi

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नेपोटिज्म पर बहस को संजय गुप्ता ने कहा बकवास, सुशांत सिंह राजपूत के पास नहीं थी फिल्मों की कमी

निर्माता-निर्देशक संजय गुप्ता और सुशांत सिंह राजपूत.

डायरेक्टर संजय गुप्ता (Director Sanjay Gupta) ने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) के पास फिल्म के प्रस्तावों में कोई कमी नहीं थी. यह सच नहीं है कि फिल्म इंडस्ट्री में लोगों ने उसे अकेला छोड़ दिया था. सुशांत ऐसे नहीं थे, जो सीढ़ी चढ़ रहे थे, वे अपने नाम पर फिल्में बेच सकते थे. वे एक बैंकेबल स्टार थे.

मुंबई. फिल्म निर्माता संजय गुप्ता (Sanjay Gupta) ने इन आरोपों का जवाब दिया है कि दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) से बॉलीवुड में आउटसाइडर शख्स के रूप में व्यवहार किया जाता था. निर्देशक ने कहा कि एक बाहरी व्यक्ति के रूप में उनका खुद का अनुभव सुखद रहा है और गैंग बनाकर उन्हें किसी ने परेशान नहीं किया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में, संजय ने कहा कि इनसाइडर और आउटसाइडर डिबेट (Insider-Outsider Debate) को बहुत बड़ा मुद्दा बना दिया गया. उन्होंने मेरा स्वागत किया. मैं भी एक बाहरी व्यक्ति हूं. मेरे परिवार में कोई फिल्म इंडस्ट्री में नहीं है. उन्होंने कहा कि, ‘इनसाइडर और आउटसाइडर को सिर्फ एक मुद्दा बना दिया गया है, जो पूरी तरह बकवास है. बॉलीवुड में शायद ही ऐसा कोई उदाहरण रहा हो, जहां सभी ने गैंग बनाया हो और कहा हो कि इस आदमी को सबक सिखाएं या उसे घर पर बैठा दें. कोई भी ऐसा नहीं करता है.’

संजय ने कहा कि सुशांत के पास फिल्म के प्रस्तावों की कमी नहीं थी और वह फिल्मों के ऑफर को मना कर देते थे, जिनकी स्टोरी उन्हें ‘पसंद’ नहीं आती थी. भगवान उनकी आत्मा को शांति दे. उन्होंने कहा कि, ‘सुशांत को फिल्मों के प्रस्ताव मिल रहे थे, लेकिन वे हर ऑफर को स्वीकार नहीं कर रहे थे और यह उनकी पसंद थी. यह सच नहीं है कि, सबने उनका बहिष्कार कर दिया था. सुशांत सिंह राजपूत कोई ऐसे नहीं थे, जो सीढ़ी चढ़ रहे थे, वे अपने नाम पर फिल्में बेच सकते थे. वे एक बैंकेबल स्टार थे, लेकिन जो हुआ है वह वास्तव में घृणित है. सुशांत और उसके परिवार को अकेला छोड़ दो.’

सुशांत की मौत को राष्ट्रीय टेलीविजन पर ‘तमाशा’ में बदल दिया गयासंजय के अनुसार, सुशांत की मौत को राष्ट्रीय टेलीविजन पर ‘तमाशा’ में बदल दिया गया और हर दिन, ‘कोई नया’ शख्स सामने आ रहा है और कुछ कह रहा है. उन्होंने पूछा कि, ‘ये लोग कौन हैं और ये कैसे मायने रखते हैं? जब सुशांत जिंदा थे, तब ये लोग कहां थे, अब हर कोई मीडिया में आकर बयान दे रहा है. हर कोई इसे अपने दृष्टिकोण से देख रहा है, हर शख्स अपने उस दृष्टिकोण से देख रहा है जो उसे लाभ पहुंचाता है. मुझे नहीं लगता कि यह सुशांत के लिए किसी का प्यार है कि वे आगे आ रहे हैं और अपने विचार दे रहे हैं. हर कोई इसमें विषय में अपने फायदे के लिए बोल रहा है.’

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