भारतीय मजदूर संघ रोज़गार और नौकरी सृजन को लेकर केंद्र सरकार पर बना रहा है दबाव! | business – News in Hindi

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भारतीय मजदूर संघ रोज़गार और नौकरी सृजन को लेकर केंद्र सरकार पर बना रहा है दबाव!

नई दिल्ली. आरएसएस (RSS) से जुड़े मजदूर संगठन ने देश मे रोज़गार और नौकरियों को लेकर केंद्र सरकार पर दवाब बनाना शुरू कर दिया है. कोरोना के कारण देशव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से लाखों की संख्या में लोगों को अपनी नौकरी और रोज़गार से हाथ धोना पड़ा है. अब जबकि देश अनलॉक (Unlock) से गुजर रहा है और लोगों के सामने रोज़ी रोटी का संकट खड़ा हो गया है, तो भारतीय मजदूर संघ केंद्र पर रोज़गार और नौकरी सृजन को लेकर लगातार दवाब बना रही है.

रोज़गार और स्किल डेवलपमेंट को लेकर केंद्र सरकार की मंत्री समूह की बैठक में भारतीय मजदूर संगठन ने रोज़गार और नौकरी को लेकर कई सुझाव रखे. 6 और 7 अगस्त को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत की अध्क्षयता में मंत्री समूह की बैठक हुए. इस बैठक में थावर चंद गहलोत, अर्जुन मुंडा, संतोष गगवार, महेन्द्रनाथ पांडेय, प्रह्लाद पटेल, जी किशन रेड्डी, प्रताप सारंगी ने शिरकत की.

मंत्रिसमूह की बैठक में बीएमएस ने दृढ़ता से महसूस किया कि, जब तक नीति निर्माताओं और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सोच में बदलाव नहीं होगा, वांछित परिवर्तन नहीं आएगा. इसलिए समय की जरूरत बॉक्स ऑफ थिंक से बाहर है और भारत में प्रचलित विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नई रणनीति तैयार कर रही है.

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1. श्रम आधारित क्षेत्र मसलन एग्रीकल्चर, प्लांटेशन, बीड़ी उद्योग, हैंडलूम, फिशिंग आदि में मौजूदा रोजगार की रक्षा हो.
2. रोजगार के रूप में समुदाय आधारित व्यवसायों को मान्यता दिया जाए. उन्हें बचाने के लिए सभी सुरक्षात्मक उपाय केंद्र सरकार करे.
3. उन जिलों की पहचान किया जाए जो स्थानीय संसाधनों और स्थानीय क्षमताओं के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार प्रदान कर सकते हैं. अधिक रोजगार बढ़ाने के लिए उनकी सहायता किया जाए.
4. प्रत्येक जिले में 20-25 गाँवों के समूह को विकसित करके, गांवों के एकीकृत विकास का काम केंद्र और राज्य सरकार करे.
5. निर्माण कार्यो में शामिल श्रमिक, स्ट्रीट वेंडर्स, होटल वर्कर्स, घरेलू कामों के लिए दैनिक मज़दूर श्रमिक की पहचान करके उनकी पहचान पत्र जारी किया जाए. और उनके लिए रोज़गार सृजन का काम किया जाए.

6. प्रवासी श्रमिकों के अलावा, गांव में स्थानीय श्रमिको की एक बड़ी संख्या है जो शहरी क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए उपयोगी हो सकती है. सरकार को इन श्रमिकों के लिए काम प्रदान करने के लिए एक तंत्र स्थापित करना चाहिए.

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7. क्रॉप सीडिंग और कटिंग पीरियड के दौरान मनरेगा के काम नहीं होने चाहिए. पंजीकृत श्रमिकों को नौकरी प्रदान करने के लिए मानदंड बदलने की जरूरत है.
8. राज्य सरकारों और केंद्र सरकार को प्रवासी श्रमिकों के डेटा को ठीक से एकत्र करना चाहिये. ये डेटा मैन पावर असेसमेंट के लिए उपयोगी साबित हो सकता है. इन लाखों प्रवासी श्रमिकों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए राज्य सरकारों के साथ कुछ समन्वित प्रयास तेज करने चाहिये.

भारतीय मजदूर संघ के सुझावों को मंत्रिसमूह ने गंभीरता से लिया है. हालांकि केंद्र सरकार राज्य सरकारों से मिलकर इस कोरोना काल मे रोज़गार और नौकरी सृजन करने के किये कई योजनाओं और नीतियों पर काम कर रही है.

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