अगले महीने से देनी होगी EMI, री-पेमेंट के पैसे नहीं होने पर RBI की इस सुविधा का उठाएं लाभ | business – News in Hindi

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अगले महीने से देनी होगी EMI, री-पेमेंट के पैसे नहीं होने पर RBI की इस सुविधा का उठाएं लाभ

नई दिल्ली. लॉकडाउन के तुरंत बाद ही भारतीय रिज़र्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने लोन मोरेटोरियम का ऐलान किया था. शुरुआत में यह ऐलान तीन महीने के लिए किया गया था, लेकिन 22 मई को इसे और तीन महीनों के लिए बढ़ा दिया गया. RBI के इस फैसले के बाद बैंकों से लोन लेने वाले ग्राहकों को इन 6 महीने तक लोन की EMI देने की बाध्यता खत्म हो गई थी. लेकिन लोन मोरेटोरियम (Loan Moratorium ends on 31st August) की अवधि अब 31 अगस्त को खत्म होने जा रही है. यानी सितंबर महीने से ग्राहकों को EMI भरना अनिवार्य हो जाएगा. बीते गुरुवार को भी मौद्रिक नीति समीक्षा (RBI MPC) बैठक के बाद शक्तिकांत दास ने मोरेटोरियम की अवधि बढ़ाने के बारे में कोई बात नहीं कही है. हालांकि, उन्होंने ​लोन रिस्ट्रक्चरिंग (Loan Restructuring) का ऐलान जरूर किया.

इसके बाद अब उन ग्राहकों के लिए सितंबर से EMI जमा करने का बोझ बढ़ जाएगा जो अब तक मोरेटोरियम का लाभ ले रहे थे और उनके पास रिपेमेंट के लिए पर्याप्त फंड नहीं है. RBI द्वारा लोन मोरेटोरियम की अवधि नहीं बढ़ाए जाने को लेकर एनलिस्ट्स में दो तरह की राय है. हालांकि, बैंकर्स का कहना है कि मोरेटोरियम की जगह रिस्ट्रक्चरिंग की सुविधा से ज्यादा लाभ मिलेगा. बीते दिनों आदित्य पुरी और एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार का भी यही कहना था.

कैश बचाने के लिए अधिकतर लोग ले रहे थे मोरेटोरियम का लाभ
फाइनेंशियल एनलिस्ट नीरज भगत ने CNBC आवाज़ से एक सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि मोरेटोरियम को लेकर 43 फीसदी लोगों का कहना है कि उन्हें एक डर है कि कैश बचाना चाहिए. इसीलिए वो मोरेटोरियम का लाभ ले रहे हैं. अन्य मायनों में उनका कैश फ्लो ठीक है. करीब 33 फीसदी लोग ही हैं, जिन्हें फंड्स की वास्तव में कमी है और इसीलिए उन्होंने मोरेटोरियम का लाभ लेने का फैसला किया है.यह भी पढ़ें: PM-Kisan Scheme: 8.69 करोड़ किसानों के खाते में पहुंचे 6 हजार रुपये

मोरेटोरियम की अवधि बढ़ाने से ग्राहकों व बैंकों पर असर
भगत ने कहा कि बीते एक महीने में अर्थव्यवस्था रिकवरी (Recovery in Economy) के मोड में आ चुकी है. हालांकि, अभी भी लोगों को थोड़ी-बहुत परेशानी हो रही है. लेकिन, मोरेटोरियम की अवधि बढ़ाई जाएगी तो भार आगे जाकर ग्राहकों पर भार बढ़ता जाएगा. इसके अलावा पूरे फाइनेंशियल स्ट्रक्चर पर भी असर पड़ेगा. बैंक का कैश फ्लो खराब होने की संभावना बढ़ जाएगी. मोरेटोरियम में ऐसा नहीं है कि बैंक ग्राहकों का लोन माफ कर रहा है. बल्कि इसकी अवधि को ही बढ़ा रहा है. ऐसे में जब तक सरकार की तरफ से रिस्ट्रक्चरिंग पॉलिसी नहीं आएगी, जिसमें वन टाइम वेवर होगा या कुछ फीसदी तक लोन माफ हो जाए, तभी फायदा है. मोरेटोरियम को आगे बढ़ाने का मतलब होगा दिक्कतें बढ़ेंगी.

क्या है रघुराम राजन का कहना?
आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का भी कहना है कि लोन मोरेटोरियम की अवधि नहीं बढ़ानी चाहिए. राजन ने कहा, ‘जब आप लोगों से कहते हैं कि वो रिपेमेंट न करें तो उनमें फिर से रिपेमेंट की आदत लाना मुश्किल होता है क्योंकि उनके पास कोई बचत नहीं है. उनके पास पैसे नहीं हैं.’

आरबीआई ने लोन रिस्ट्रक्चरिंग का ऐलान कर दिया है
हालांकि, शक्तिकांत दास ने कोरोना वायरस से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने के प्रयास जारी रखते हुए कंपनियों और पर्सनल लोन (Personal Loan) के रिस्ट्रक्चरिंग की सुविधा की छूट दी. एक बार रिस्ट्रक्चर करने के बाद, ऐसे लोन को स्टैंडर्ड माना जाएगा. इसका मतलब यह है कि अगर उधारकर्ता नए पेमेंट स्ट्रक्चर का पालन करता है तो डिफॉल्टर के रूप में उधारकर्ता को क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट नहीं किया जाएगा.

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RBI के अनुसार, पर्सनल लोन में व्यक्तियों को दिए गए कंज्यूमर क्रेटिड, एजुकेशन लोन, अचल संपत्तियों के निर्माण या इनकैशमेंट के लिए दिए गए लोन (उदाहरण के लिए हाउसिंग लोन), और फाइनेंशियल एसेट्स (शेयर, डिबेंचरऔर इसी तरह) में निवेश के लिए दिए गए लोन शामिल हैं. इस प्रकार के लोन रिस्ट्रक्चरिंग के लिये बैंकों को हानि-लाभ के खातों में ऊंचा प्रावधान करने की आवश्यकता नहीं होगी.

रिस्ट्रक्चरिंग से इन्हें मिलेगा फायदा
RBI के रिजॉल्यूशन फ्रेमवर्क के अनुसार, स्ट्रेस्ड पर्सनल लोन का रिजॉल्यूशन केवल उन उधारकर्ताओं के लिए उपलब्ध होगा जो 1 मार्च 2020 को 30 दिन से अधिक की चूक नहीं हुई है. ऐसे लोन को बैंक दो साल का कर्ज विस्तार दे सकते हैं. यह विस्तार लोन किस्त के भुगतान पर रोक के साथ अथवा बिना किसी तरह की रोक के साथ दिया जा सकता है. ग्राहक 31 दिसंबर से पहले रिस्ट्रक्चरिंग का आवेदन दे सकते हैं. बैंकों को इन आवेदनों पर 90 दिन के भीतर फैसला लेना होगा. बैंक और वित्तीय संस्थान लोन के रिपेमेंट का पीरियड अधिकतम 2 साल ही बढ़ा सकेंगे. इसका फैसला वे व्यक्ति की आय के आधार पर ले सकेंगे.

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क्या है लोन मोरेटोरियम और लोन रिस्ट्रक्चरिंग में अंतर?
RBI ने लोन मोरेटोरियम के तहत किस्तें न चुकाने की छूट थी. इस दौरान जो भी ब्याज बनता, वह बैंक आपके मूल धन में जोड़ देते हैं. जब EMI शुरू होगी तो आपको पूरी बकाया राशि पर ब्याज चुकाना होगा. यानी मोरेटोरियम अवधि के ब्याज पर भी ब्याज लगेगा. लोन का रिस्ट्रक्चरिंग में बैंक तय कर सकेंगे कि ईएमआई को घटाना है या लोन का पीरियड बढ़ाना है, सिर्फ ब्याज वसूलना है, या ब्याज दर एडजस्ट करना है.

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