वो महिला जासूस जो फ्लर्ट करके नाजी सैनिकों को ट्रैप करती थी और लेती थी जानकारियां | knowledge – News in Hindi

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वो महिला जासूस जो फ्लर्ट करके नाजी सैनिकों को ट्रैप करती थी और लेती थी जानकारियां

कोई महिला अगर खूबसूरत हो, बिंदास हो. गजब की लड़ाका सैनिक भी हो.और जासूसी के काम में इतनी तेज तो आप उसके बारे में क्या कहेंगे. इस महिला का नाम था नैंसी ग्रेस ऑगस्ता वेक. लोग उसे नैंसी वेक कहते थे. वो दूसरे विश्व युद्ध की फेमस महिला लड़ाकों में थी. कई मायनों में उसकी शख्सियत बहुत विराट थी.

नैंसी वेक का जन्म न्यूजीलैंड में 30 अगस्त 1912 में हुआ. 98 साल की उम्र में 07 अगस्त 1912 में उनका निधन इंग्लैंड में हुआ. नाजियों से उसकी दुश्मनी बहुत मशहूर थी.

16 साल की उम्र में आस्ट्रेलिया से फ्रांस भाग गई
बहुत रोचक भी इस जबरदस्त लड़ाका की कहानी. जब वो 16 साल की हुई तो स्कूल से भाग गईं. आस्ट्रेलिया से पहुंच गई फ्रांस. वहां पत्रकार का काम करने लगीं. वहीं उसकी आंखें फ्रेंच कारोबारी हेनरी फिओक्का से लड़ीं. रोमांस हुआ. फिर दोनों ने विवाह कर लिया.07 अगस्त 1947 : जिन्ना ने हमेशा के लिए भारत छोड़ दिया, माउंटबेटन से मिला आलीशान गिफ्ट

फ्रांसीसी वायु सैनिकों की मदद की
वो जोशीली भी थी और बहादुर भी. इसका पता तब चला जबकि सन 1939 में जर्मनों ने फ्रांस पर हमला किया. नैंसी वेक फ्रांसीसी की मदद करने लगी. उसने वायु सैनिकों को स्पेन में सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में मदद दी.जब जर्मनों पर उसका भेद जाहिर हुआ तो 1942 में वो स्पेन होते हुए ब्रिटेन भाग गईं.

नैंसी वेक ने तीन दिन में 500 किलोमीटर का सफर साइकल से पूरा किया और फिर दुश्मन के कैंप में घुसकर खुफिया जानकारी लेकर लौटी

फिर ब्रिटिश जासूसी एजेंट बनी, कोड नाम था हेलन
पति हेनरी फिओक्का तो फ्रांस में ही छूट गए. पकड़ लिए गए. नाज़ियों ने यातना के बाद उन्हें मार दिया. ब्रिटेन में उसने ब्रिटिश स्पेशल ऑपरेशंस एग्जिक्यूटिव (एसओई) एजेंट्स के साथ काम शुरू किया. वहां उसका कोड नाम रखा गया हेलन. वो कई ख़तरनाक मिशनों में शामिल हुईं. कहा जाता है कि उसने एक बार केवल हाथों से ही एक जर्मन संतरी को मार दिया था. ये काम उसने किया था जूड़ो-चॉप से, जो एसओई में ट्रेनिंग के दौरान सीखी थी.

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500 किमी साइकल चलाने के बाद दुश्मन के कैंप में घुसी
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उसने एक ऐसा गजब का काम किया कि हर कोई हैरान रह गया. दरअसल जंग के दौरान सहयोगी देशों के रेडियो कोड्स खो गए. इसके रिप्लेसमेंट दुश्मन के इलाके में घुसकर ही मिल सकते थे. वो करीब 500 किलोमीटर दूर. क्या आप सोच सकते हैं कि कोई लड़की साइकिल चलाते हुए ये जोखिम भरा काम कर सकती है. नैंसी ने ये काम केवल तीन दिनों में कर दिया.

जर्मन सैनिक इस तरह हो जाते थे ट्रैप
आप सोच रहे होंगे कि ऊपर फ्लर्ट और रोमांस की बात की गई, उसका जिक्र कब होगा. दरअसल वेक युद्ध के दौरान जर्मनियों से जानकारियां हासिल करने के लिए उनके साथ डेटिंग पर जाती थीं. उनसे प्यार का नाटक करती थी. ऐसा रोमांस करती थी कि एकदम रियल लगे. वो फ्लर्ट इतने मादक अंदाज में करती थी कि जर्मन सैनिक उसके जाल में आ गिरते थे. वेक की खुफिया जानकारियों से जर्मन सेना और नाजी खुफिया सर्विस गस्टापो को खूब नुकसान पहुंचा.

हे भगवान मैं कितना फ्लर्ट करती थी
एक ऑस्ट्रेलियाई समाचार पत्र को उसने बताया था , “थोड़ा सा पाउडर और रास्ते में थोड़ी सी शराब पीकर मैं जर्मन पोस्ट्स से गुजरती थी. उनसे पूछती थी कि क्या वे मेरी तलाशी लेना चाहेंगे. हे भगवान, मैं कितना फ्लर्ट करती थी।” उसकी जीवनी लिखने वाले पीटर फिट्ज़सिमोन्स ने लिखा, वो कई दफ़ा जर्मनों के चंगुल में आते-आते बची थी. उसके बचने की कला से ही जर्मन उसे व्हाइट माउस कहकर बुलाते थे. उसकी जीवनी का भी यही नाम है.

फिर इंटैलिजेंस अफसर बनी
दूसरे विश्व युद्ध के बाद वो ब्रिटेन की एयर मिनिस्ट्री में इंटैलिजेंस आफिसर बन गई. वेक ने अपने जासूसी के काम के लिए चाहे जितने रोमांस और फ्लर्ट किए हों लेकिन उसने फिर कभी दूसरी शादी नहीं की.

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