PM Modi को अयोध्या में भूमि पूजन करता देख खुश हुईं उनकी मां हीराबेन, दिया आशीर्वाद | nation – News in Hindi

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PM Modi को अयोध्या में भूमि पूजन करता देख खुश हुईं उनकी मां हीराबेन, दिया आशीर्वाद

नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन मोदी ने टीवी पर अयोध्या राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम देखा.

प्रधानमंत्री मोदी के मंदिर शिलान्यस के बाद देशभर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं. इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी की मां हीराबेन मोदी (Heeraben modi) की तस्वीर भी सामने आई हैं.

नई दिल्ली. अयोध्या (Ayodha) के लिए आज बड़ा दिन है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने बुधवार को अयोध्या में राम मंदिर (Ram mandir) का भूमि पूजन किया. इस कार्यक्रम में देशभर के साधु-संतों, राष्ट्रीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत समेत कई राजनेता उपस्थित थे. प्रधानमंत्री मोदी के मंदिर शिलान्यस के बाद देशभर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं. इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी की मां हीराबेन मोदी (Heeraben modi) की तस्वीर भी सामने आई हैं.

हीराबेन मोदी टीवी पर नरेंद्र मोदी को टीवी पर अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन करते देख काफी उत्साहित नजर आ रही हैं. इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन टीवी के सामने बैठी हुई हैं. जिस दौरान पीएम मोदी राम मंदिर का शिलान्यास कर रहे हैं उस दौरान वो हाथों को जोड़े हुए नजर आ रही हैं. हीराबेन की इन तस्वीरों को देखकर ऐसा कहा जा सकता है कि वो मन ही मन अपने बेटे को आशीर्वाद दे रही हों.

400 क्विंटल फूलों से सजाई गई राम नगरी
देशभर में फैल रहे कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए राम मंदिर भूमिपूजन के दौरान पुरोहित और पीएम मोदी के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा गया था. इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मौजूद रहीं.अयोध्या को 400 क्विंटल फूलों से सजाया गया है. थाईलैंड से ऑर्किड तो बेंगलुरु से अपराजिता के फूल मंगाए गए हैं. वहीं, नारंगी और लाल रंग के डबल टोन्ड गेंदा के फूल कोलकाता से आए हैं.

साढ़े तीन साल में पूरा होगा निर्माण कार्य
राममंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट ने भूमि पूजन के बाद साढ़े तीन साल का लक्ष्य रखा है. शुरुआती ढेड़ साल में मंदिर का भूमि तल पर निर्माण कार्य को पूरा करने का वक्त तय किया है. इसके बाद अगले दो सालों में ऊपरी दोनों तलों पर निर्माण कार्य को पूरा करने का टारगेट रखा है. इस तरह से साढ़े तीन साल में मंदिर के शिखर तक के काम को पूरा कर लेना है.

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