पुरुष प्राइवेट अस्पताल और एलोपैथी, जबकि महिलाएं प्राकृतिक चिकित्सा को देती हैं तवज्जो: सर्वे | nation – News in Hindi

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पुरुष प्राइवेट अस्पताल और एलोपैथी, जबकि महिलाएं प्राकृतिक चिकित्सा को देती हैं तवज्जो: सर्वे

पुरुष एलोपैथी और प्राइवेट अस्पतालों को देते हैं तवज्जो (सांकेतिक फोटो)

पुरुषों को एलोपैथिक उपचार (allopathic treatment) अधिक मिलता है, फलस्वरूप उपचार के वैकल्पिक स्रोतों (alternative sources) से उपचार करने वाली महिलाओं का प्रतिशत- ‘भारतीय चिकित्सा पद्धति’, ‘प्राकृतिक चिकित्सा’, ‘योग’ (Yoga) आदि से इलाज में पुरुषों की तुलना में अधिक है.

नई दिल्ली. जुलाई, 2017 से जून, 2018 की अवधि के दौरान राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office) की ओर से किए गए नवीनतम राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NSS) में स्वास्थ्य सेवा (Health Services) तक पहुंच के बारे में भारतीय पुरुषों और महिलाओं के बीच स्पष्ट अंतर पाया गया है. कई सांख्यिकीय चार्ट (statistical charts), जो विभिन्न बीमारियों से पीड़ित रहने के दौरान इलाजरत लोगों के हैं, से सर्वेक्षण (Survey) के अध्ययन से कई बातें सामने आई हैं.

पहली बात कि निजी अस्पतालों (private hospitals) में महिलाओं की तुलना में पुरुषों का अधिक इलाज होता है. दूसरी कि पुरुषों को एलोपैथिक उपचार (allopathic treatment) अधिक मिलता है, फलस्वरूप उपचार के वैकल्पिक स्रोतों (alternative sources) से उपचार करने वाली महिलाओं का प्रतिशत- ‘भारतीय चिकित्सा पद्धति’, ‘प्राकृतिक चिकित्सा’, ‘योग’ (Yoga) आदि से इलाज में पुरुषों की तुलना में अधिक है. तीसरी कि ये अंतर ग्रामीण भारत (Rural India) की तुलना में शहरी व्यवस्था में अधिक स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है.

ग्रामीण व्यवस्था में अंतर का कम पता चलता है
उदाहरण के लिए, सर्वेक्षण के दौरान 15 दिनों में ग्रामीण आबादी में 32.4% पुरुषों का इलाज सरकारी अस्पतालों में हुआ, जो कि महिलाओं के आंकड़े 32.6% की तुलना में कम था. जबकि ग्रामीण इलाकों में 21.2% पुरुषों का निजी अस्पतालों में इलाज किया गया था, वहीं महिलाओं के लिए यह आंकड़ा 20.5% था.वहीं शहरी क्षेत्रों में, 25.7% पुरुषों और 26.6% महिलाओं का इलाज सरकारी अस्पतालों में किया गया, जबकि 28.7% पुरुषों और 26% महिलाओं ने शहरों में निजी अस्पतालों में इलाज कराया.

पुरुषों के इलाज में प्राइवेट हॉस्पिटल और एलोपैथी को तवज्जो
जब विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए उपचार की प्रकृति को लिंग के हिसाब से वर्गीकृत करने की बात आई तो लोगों ने ग्रामीण और शहरी दोनों जगहों पर पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने होम्योपैथी जैसे वैकल्पिक उपचार को तवज्जो दी.

एलोपैथी शहरी स्थानों और ग्रामीण स्थानों दोनों में पुरुषों के लिए उपचार का पसंदीदा तरीका था. जैसे अस्पतालों को प्राथमिकता देने के मामले में उपचार के प्रकार में पुरुषों और महिलाओं के बीच का अंतर, शहरी इलाकों में ज्यादा था.

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शहरी क्षेत्रों में एलोपैथी के माध्यम से 96.4% पुरुषों का इलाज किया गया, वहीं महिलाओं के मामले में यह आंकड़ा 94.7% था. जबकि शहरी क्षेत्रों में 1.8% पुरुषों का इलाज ‘भारतीय चिकित्सा पद्धति’ द्वारा किया गया था, जबकि 2.5% महिलाओं का इलाज इस पद्धति के माध्यम से किया गया था. जबकि शहरी भारत में केवल 1.6% पुरुष होम्योपैथी के लिए गए थे, महिलाओं के लिए यह आंकड़ा 2.4% था.

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