लैंगिक समानता: आदित्य ठाकरे ने मुंबई ट्रैफिक संकेतों में महिलाओं को शामिल कराया, ट्विटर पर छिड़ी बहस | maharashtra – News in Hindi

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लैंगिक समानता: आदित्य ठाकरे ने मुंबई ट्रैफिक संकेतों में महिलाओं को शामिल कराया, ट्विटर पर छिड़ी बहस

आदित्य ठाकरे ने ट्विटर पर शेयर की महिला पैदल यात्रियों वाले यातायात संकेतों की एक तस्वीर (साभार: ट्विटर)

बृहन्मुंबई नगरपालिका (Brihanmumbai Municipal Corporation) की ओर से नए लिंग समावेशी संकेत (gender inclusive signs) लगाए गए हैं और उसी की एक छवि ठाकरे ने ट्विटर (Twitter) पर साझा की है.

मुंबई. शिवसेना के आदित्य ठाकरे (Shiv Sena’s Aditya Thackeray) महाराष्ट्र (Maharashtra) में लैंगिक समानता (Gender Equality) बढ़ाने की दिशा में छोटे कदम उठाते नज़र आ रहे हैं. उद्धव ठाकरे के सीएम रहने के दौरान आदित्य ने मुंबई (Mumbai) की सड़कों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने के मिशन पर काम शुरू कर दिया है. और वह ट्रैफिक सिग्नल (Traffic Signals) और संकेतों पर महिला पैदल यात्रियों (women pedestrians) की छवि को जोड़कर ऐसा कर रहे हैं.

बृहन्मुंबई नगरपालिका (Brihanmumbai Municipal Corporation) की ओर से नए लिंग समावेशी संकेत (gender inclusive signs) लगाए गए हैं और उसी की एक छवि ठाकरे ने ट्विटर (Twitter) पर साझा की है. ठाकरे ने तस्वीरें ट्वीट कर इसका कैप्शन दिया, “यदि आप दादर (Dadar) से गुजरेंगे तो आपको कुछ ऐसा दिखाई देगा जिससे आप गर्व महसूस करेंगे. बृहन्मुंबई नगरपालिका एक सरल विचार के साथ लैंगिक समानता सुनिश्चित कर रहा है- संकेतों में अब महिलाएं भी हैं!”

कई सारे ट्विटर यूजर्स ने इस कदम की तारीफ की.

हालांकि, सभी इससे प्रभावित नहीं थे. कुछ ट्विटर यूजर्स ने टिप्पणी की कि महिलाओं को यातायात संकेतों में जोड़ने से सड़कों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने या महिलाओं के सामने आने वाली अन्य समस्याओं को बदलने में मदद नहीं मिलेगी. अन्य लोगों ने सोचा कि ऐसी पहलें वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने का एक तरीका हैं जो लैंगिक समानता और लिंग सशक्तिकरण को प्रभावित करते हैं.

संकेतों को समावेशी बनाने का काम पूरी दुनिया में कई देशों के में भी हो रहा है, जैसे कि जर्मनी में लैंगिक समावेश और यातायात संकेतों को अपनाया गया है. यह भी पढ़ें: Friendship Day- PM मोदी ने इजराइल के राष्ट्रपति को किया शुक्रिया, कही ये बात

यह परियोजना महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे के दिमाग की उपज है, जिन्होंने “कल्चर स्पाइन” परियोजना के तहत यह पहल की है.

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