चुनावी एकता! सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर बिहार के नेता आखिर क्यों एक साथ उठा रहे हैं आवाज़? | nation – News in Hindi

सुशांत सिंह राजपूत

Sushant Singh Rajput Death: इन दिनों बिहार के हर नेता इस केस में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं. बिहार में इन दिनों सोशल मीडिया पर जस्टिस फोर सुशांत नाम से एक कैंपेन भी चलाया जा रहा है.

(राजीव कुमार)

नई दिल्ली. सुशांत सिंह राजपूत की मौत (Sushant Singh Rajput Death) को लेकर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. खासकर पिछले हफ्ते जब से उनके परिवार वालों ने पटना में फिल्म अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाया है, तब से चीज़ें लगातार बदल रही है. आत्महत्या से लेकर हत्या, इस केस में हर एंगल पर लोग बात कर रहे हैं. बिहार (Bihar) के सारे नेता अब इस केस में एक सुर में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं. सवाल उठता है कि आखिर वहां के नेता इस मुद्दे पर आखिर कैसे एकजुट हो गए?

चुनाव पर नज़र!
बिहार में इस साल अक्टूबर नवंबर में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में हर नेता इस केस को ‘बिहार के गौरव’ से जोड़ कर देख रहा है. लिहाज़ा सुशात की ‘मौत के रहस्य’ के जरिए वो वोटरों तक पहुंचना चाहते हैं. लिहाजा इन दिनों बिहार के हर नेता इस केस में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं. बिहार में इन दिनों सोशल मीडिया पर जस्टिस फोर सुशांत नाम से एक कैंपेन भी चलाया जा रहा है.सारे नेता एक साथ

जन अधिकार पार्टी के प्रमुख पप्पू यादव ने सबसे पहले सीबीआई जांच की मांग उठाई. उन्होंने दावा किया कि राजपूत की मौत के पीछे एक ‘गहरी साजिश’ है. उधर लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर बिहार सरकार से ‘दोषी’ को दंडित करने के लिए जांच के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की. इस हफ्ते की शुरुआत में पासवान ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भी बात की. साथ ही सीबीआई जांच की मांग को दोहराया. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने भी राजपूत के परिवार से मुलाकात नहीं करने के लिए बिहार के सीएम को घेरते हुए सीबीआई जांच की मांग की. सवाल उठता है कि आखिर बिहार ने नेता इस केस को लेकर इतने गुस्से में क्यों हैं?

चुनावी फैक्टर
जाति हमेशा से बिहार चुनाव का एक अहम हिस्सा रही है. सुशांत सिंह, राजपूत जाति के थे, जिनकी ब्राह्मणों के बाद राज्य में लगभग 5% ऊंची जातियों में दूसरी सबसे बड़ी आबादी है. परंपरागत रूप से राज्य में राजपूत ऐसे लोगो को वोट में हिस्सेदारी देते हैं जो सत्ता में हो. सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और विपक्षी राजद दोनों के कई बड़े चेहरे इस समुदाय के हैं. राजपूतों से समर्थन राजद के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, जो एक अजेय चुनावी रणनीति के लिए एक नया जाति आधार जोड़कर अपने मुस्लिम-यादव संयोजन को मजबूत करने के लिए बेताब है.



वोट का खेल
लोजपा के लिए भी राजपूत जाति के वोट पार्टी की चुनावी किस्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. पासवान जूनियर की जमुई लोकसभा सीट पर 2 लाख से ज्यादा राजपूत के वोट हैं. इसी तरह हाजीपुर में 3.5 लाख से अधिक राजपूत वोट के हैं. विश्लेषकों का कहना है कि राजपूत की मौत का जिस तरह से सोशल मीडिया पर दवाब बन रहा है नीतीश कुमार का काम भी आसान हो सकता है.

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