Islamabad High Court dismisses plea against Prime Minister’s assistants | इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री के सहायकों के खिलाफ याचिका खारिज की

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इस्लामाबाद, 31 जुलाई (आईएएनएस)। इस्लामाबाद हाईकोर्ट (आईएचसी) ने प्रधानमंत्री के दोहरी राष्ट्रीयता रखने वाले विशेष सहायकों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि प्रधानमंत्री को अधिकार है कि वह जितने चाहे सहायकों की नियुक्ति कर सकते हैं।

डॉन न्यूज ने गुरुवार को अदालत के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा, प्रधानमंत्री राष्ट्र के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक का मुख्य कार्यकारी होता है और उसे कई जटिल कार्य करने पड़ते हैं। प्रधानमंत्री के रूप में निर्वाचित व्यक्ति पाकिस्तान के लोगों और मजलिस-ए-शूरा (संसद) के प्रति जवाबदेह होता है।

अदालत ने कहा, जो व्यक्ति दोहरी राष्ट्रीयता रखता है, वह वास्तव में पाकिस्तान का नागरिक है और पाकिस्तान और देशभक्ति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर संदेह नहीं किया जा सकता है।

अदालत ने कहा कि दोहरी राष्ट्रीयता रखने वाला कोई भी पाकिस्तानी नागरिक इस प्रकार से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है कि उसे प्रधानमंत्री द्वारा विशेष सहायक के रूप में नियुक्त किए जाने से वर्जित रखा जा सके।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, यह तब सामने आया जब सरकार ने हाल ही में सभी विशेष सहायकों की संपत्ति और राष्ट्रीयता को सार्वजनिक किया है, जिनमें से सात को या तो दोहरी नागरिकता या किसी अन्य देश के स्थायी निवास के रूप में बताया गया है।

सलाहकारों और विशेष सहायकों की नियुक्ति के खिलाफ लाहौर हाईकोर्ट में एक अन्य याचिका भी दायर की गई है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की डिजिटल पाकिस्तान के लिए विशेष सहायक तानिया एदरुस और स्वास्थ्य पर विशेष सहायक डॉ. जफर मिर्जा ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया। प्रधानमंत्री के 15 विशेष सहायकों की संपत्ति और दोहरी नागरिकता के सार्वजनिक होने के बाद सरकार की कड़ी आलोचनाओं के बीच तानिया और जफर मिर्जा ने इस्तीफे की घोषणा की।

मिर्जा और तानिया का कहना है कि उनकी दोहरी नागरिकता के कारण सरकार की हो रही आलोचना के चलते उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला लिया है।

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