भारत के लोग अहकाम-ए-इलाही और निजाम-ए-मुस्तफा के खिलाफ हैं | – News in Hindi

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भारत के लोग अहकाम-ए-इलाही और निजाम-ए-मुस्तफा के खिलाफ हैं

विज्ञापन पूरे पृष्ठ में छापा गया है. ज़ाहिर है इसके लिए बड़ी रक़म खर्च की गयी होगी. यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि इनको धन कहाँ से मिल रहा है. विज्ञापन में जो लिखा गया है वह आइडिया ऑफ़ इण्डिया को नकारता है

Source: News18Hindi
Last updated on: July 31, 2020, 11:19 AM IST

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय पीस पार्टी एक विज्ञापन कुछ उर्दू अखबारों में छपा है.पीस पार्टी एक निहायत ही मामूली पार्टी है और उसका प्रभाव क्षेत्र उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में सक्रिय लुम्पन मुसलमानों के बीच है. कभी कभार किसी बाहुबली के सहारे विधान सभा के चुनाव में पार्टी एकाध सीट भी जीत जाती है. लेकिन गठबंधन सरकारों के ज़माने में इनको मुख्यधारा की पार्टियां भी साथ लेने की कोशिश करने लगीं और इनका महत्व थोडा बढ़ गया था. लेकिन अब यह लोग बिलकुल हाशिये पर हैं और खबरों में बने रहने के लिए कुछ भी करते रहते हैं. उर्दू अखबारों में छपे विज्ञापन में पार्टी ने एक अपील की है जो भारत के संविधान के खिलाफ तो है ही, आजादी की लड़ाई की मूल अवधारणा पर भी कुठाराघात करता है.

विज्ञापन पूरे पृष्ठ में छापा गया है. ज़ाहिर है इसके लिए बड़ी रक़म खर्च की गयी होगी. यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि इनको धन कहाँ से मिल रहा है. विज्ञापन में जो लिखा गया है वह आइडिया ऑफ़ इण्डिया को नकारता है.पीस पार्टी ने मुसलमानों से अपील की है कि उनकी पार्टी अहकाम-ए-इलाही और निजाम-ए-मुस्तफा के अपने मिशन को हासिल करने के लिए कुछ भी कुर्बान करने के लिए तैयार है. अहकाम-ए-इलाही का मतलब है कि देश में अल्लाह के हुकुम से ही सरकार चलेगी. निजाम-ए-मुस्तफा का मतलब है कि मुस्तफा का राज कायम किया जाय. दावा किया गया है कि पिछले एक सौ वर्ष से देश में हेडगेवार, सावरकर, नेहरू , ,लोहिया और आंबेडकर का मिशन पूरा करने की बात चल रही है.सरकारी उलेमा ने इनके मिशन को पूरा करने के लिए यह ऐसा धर्म बना रखा है जो कि अहकाम-ए –इलाही और निजाम-ए-मुस्तफा की बुनियादी सोच के खिलाफ है. यहाँ यह जान लेना ज़रूरी है कि पाकिस्तानी तानाशाह जिया उल हक ने अपनी तानाशाही और बर्बर सत्ता को कायम करने के लिए अहकाम-ए –इलाही और निजाम-ए-मुस्तफा की राजनीति की बात की थी.

पीस पार्टी और उसके नेताओं को यह बता देने की ज़रूरत है कि भारत की आज़ादी के लिए जब ब्रिटिश साम्राज्यवाद को देश की जनता ने महात्मा गांधी की अगुवाई में चुनौती दी थी तो सभी विघटनकारी शक्तियों को अपनी बिलों में छुपना पडा था. अंग्रेजो की मदद करने वालों की राजनीति को देश ने साफ़ नकार दिया था. उस दौर में भी मुस्लिम साम्प्रदायिक शक्तियां भारत की स्वतंत्रता के विरोध में थीं. लेकिन ऐसा नहीं होने दिया गया क्योंकि एक नया भारत बनाने के महात्मा गांधी के संकाल्प को पूरा करने के लिए पूरा देश खड़ा था.

पीस पार्टी की इन कोशिशों की निंदा की जानी चाहिए और सरकार को इनके खिलाफ ज़रूरी ,संविधान सम्मत क़दम उठाकर इनको सज़ा दिलवानी चाहिए .


First published: July 31, 2020, 11:12 AM IST

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