Fact Check: क्या कांग्रेस को ‘चिढ़ाने के लिए’ IAF चीफ के घर के बाहर लगी Rafale की रेप्लिका? | nation – News in Hindi

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Fact Check: क्या कांग्रेस को

Fact Check: क्या कांग्रेस को 'चिढ़ाने के लिए' IAF चीफ के घर के बाहर लगी Rafale की रेप्लिका?

हवा में ईंधन भरता राफेल. (तस्वीर-ANI)

भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) को लड़ाकू विमान राफेल (Rafale) मिल जाएगा. राफेल भारत द्वारा पिछले दो दशक से अधिक समय में लड़ाकू विमानों की पहली बड़ी खरीद है. राफेल आज अंबाला बेस पर लैंड करेगा.

नई दिल्ली. देश में बुधवार को भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) को लड़ाकू विमान राफेल (Rafale) मिल जाएगा. राफेल विमान भारत द्वारा पिछले दो दशक से अधिक समय में लड़ाकू विमानों की पहली बड़ी खरीद है. इन विमानों के आने से भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता में महत्वपूर्ण रूप से बढ़ोत्तरी होने की संभावना है. भारत ने 23 सितंबर 2016 को फ्रांसीसी एरोस्पेस कंपनी दसॉ एविएशन से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए 59,000 करोड़ रुपये का सौदा किया था.

दूसरी ओर राफेल के आने से पहले फेक न्यूज की बाढ़ आ गई है. कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया है कि राफेल आने के पहले कांग्रेस मुख्यालय के सामने वायुसेना के दफ्तर के बाहर उसकी रेप्लिका यानी प्रतिकृति लगाई हुई है. सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया है कि ऐसा कांग्रेस को ‘चिढ़ाने के लिए’ किया गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं इसकी सच्चाई क्या है?

दरअसल, एक साल पहले यानी 31 मई 2019 को तत्कालानी वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ के आवास के बाहर राफेल की रेप्लिका लगाई गई थी. बता दें वायुसेना प्रमुख का आवास कांग्रेस हेडक्वार्ट्रर से कुछ ही दूरी पर स्थित है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित 24 अकबर रोड पर कांग्रेस पार्टी का मुख्यालय है. यहां से कुछ ही दूरी पर वायुसेना प्रमुख का आवास है. उनके आवास के बाहर की राफेल की यह प्रतिकृति लगाई गई है. समाचार एजेंसी ANI ने उस वक्त इसकी तस्वीर भी जारी की थी. बीते साल लगाई गई रेप्लिका से जुड़ी खबर को आप News18 Hindi पर ही यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं.

rafale replica fake news 1राफेल एक फ्रांसीसी कंपनी डैसॉल्ट एविएशन निर्मित दो इंजन वाला मध्यम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) है. राफेल लड़ाकू विमानों को ‘ओमनिरोल’ विमानों के रूप में रखा गया है, जो कि युद्ध में अहम रोल निभाने में सक्षम हैं. ये बखूबी ये सारे काम कर सकती है- वायु वर्चस्व, हवाई हमला, जमीनी समर्थन, भारी हमला और परमाणु प्रतिरोध.

भारत ने राफेल को क्यों चुना है?
राफेल भारत का एकमात्र विकल्प नहीं था. कई अंतरराष्ट्रीय विमान निर्माताओं ने भारतीय वायुसेना से पेशकश की थी. बाद में छह बड़ी विमान कंपनियों को छांटा गया. इसमें लॉकहेड मार्टिन का एफ -16, बोइंग एफ / ए -18 एस, यूरोफाइटर टाइफून, रूस का मिग -35, स्वीडन की साब की ग्रिपेन और रफाले शामिल थे.

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बीते साल 31 मई को समाचार एजेंसी ANI द्वारा जारी की गई तस्वीर

सभी विमानों के परीक्षण और उनकी कीमत के आधार पर भारतीय वायुसेना ने यूरोफाइटर और राफेल को शॉर्टलिस्ट किया. डलास ने 126 लड़ाकू विमानों को उपलब्ध कराने के लिए अनुबंध हासिल किया, क्योंकि ये सबसे सस्ता मिल रहा था. कहा गया कि इसका रखरखाव भी आसान है.

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