भारतस्थली: भारत के पारम्परिक हथकरघा के अतीत के गौरव को पुनर्जीवित करता हुआ | nation – News in Hindi

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भारतस्थली: भारत के पारम्परिक हथकरघा के अतीत के गौरव को पुनर्जीवित करता हुआ

भारतस्थली: भारत के पारम्परिक हथकरघा के अतीत के गौरव को पुनर्जीवित करता हुआ

हथकरघे का हमारे देश के विभिन्न क्षेत्रों की लोक परंपरा में एक विशेष स्थान है और बदले में यह अपने रूपांकनों के माध्यम से उन क्षेत्रों के रीति-रिवाजों को दर्शाता है.

हथकरघे का हमारे देश के विभिन्न क्षेत्रों की लोक परंपरा में एक विशेष स्थान है और बदले में यह अपने रूपांकनों के माध्यम से उन क्षेत्रों के रीति-रिवाजों को दर्शाता है.

हथकरघा भारत की समृद्ध टेक्सटाइल संस्कृति और परंपरा को दर्शाता है. यह एक ऐसे धागे के रूप में मौजूद है जो भारत के इतिहास, आदर्शों पर डटे रहने की क्षमता, स्वतंत्रता, आत्म निर्भरता और विकास को बांधे हुए है. देश की सामाजिक सांस्कृतिक विरासत का यह बेजोड़ ताना बाना अद्भुत अनुभव की अनुभूति देता है. हथकरघे का हमारे देश के विभिन्न क्षेत्रों की लोक परंपरा में एक विशेष स्थान है और बदले में यह अपने रूपांकनों के माध्यम से उन क्षेत्रों के रीति-रिवाजों को दर्शाता है. भारत का प्रत्येक क्षेत्र अपनी टेक्सटाइल परंपरा का गवाह है और उसने हथकरघा वस्त्रों के अनूठे प्रकार के उत्पादन के चलते अपनी अलग पहचान बनाई है.

ऐसे में जब देश का हर नुक्कड़ और कोना इसके शानदार अतीत की कहानियों से परिपूर्ण है, वर्तमान स्थिति को देखें तो इसके विपरीत चीज़ें खराब हो रही हैं. बिजली करघा इंडस्ट्री ने सूती मिश्रित कपड़े और सिंथेटिक सामग्री इजात करके हथकरघे को बेहद नुकसान पहुंचाया है. इनमें कम कीमत में अधिक उत्पादन होता है. मानव शरीर और पर्यावरण पर मशीन से बने उत्पादों के दुष्प्रभाव की अनदेखी की जाती है. हथकरघा उद्योग में तेज़ गिरावट को देखते हुए सुमति और पुलकित गोग्ना ने 2017 के अंत में ऑनलाइन एंटरप्राइज़ भारतस्थली की शुरुआत की.

विभिन्न स्थानीय और क्षेत्रीय हथकरघा परंपराओं को मुख्यधारा में लाकर इस श्रम क्षेत्र को पुनर्जीवित करना उनका विज़न था. पुलकित ने बताया, “हमारी कंपनी की स्थापना के समय से ही हम उन गुणों के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए आश्वस्त हो गए जो हथकरघा सामान बनाते हैं. पैटर्न, बनावट, डिज़ाइन या टिकाउपन की बात हो तो हथकरघा बेजोड़ बना हुआ है. उद्योग में समर्पित मानव हाथों द्वारा किए गए कारीगरी के स्तर और काम की बारीकी ने मशीन द्वारा उत्पन्न सामान की गुणवत्ता पर जीत हासिल कर ली.” इंडस्ट्री की बारीकी समझने के लिए काफी शोध हुआ क्योंकि दंपति ने इसके मूल ज्ञान की खातिर देश के हर हिस्से का अवलोकन किया.

सुमति और पुलकित ने पारम्परिक वस्त्र को हज़ारों वर्षों से चले आ रहे इतिहास से जोड़ने के अपने मिशन में आधुनिक टेक्नोलॉजी को अपना दोस्त बनाया. पुलकित जो खुद एक टेकी है, उसने कंपनी की वेबसाइट बनाई. पहले फोकस केवल प्योर सिल्क और कांजीवरम साड़ी पर था लेकिन अच्छी ग्रोथ के चलते कंपनी जल्द ही सिल्क और लिनन के कपड़े की भी सप्लाई करने लगी. भारतस्थली में हथकरघा ने अब सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक सौंदर्यशास्त्र के सुखद समागम का रूप ले लिया था. कारीगर हर एक उत्पाद पर अपनी रचनात्मकता और अनुभवों की छाप छोड़ते हैं. वे हमारी शानदार और वैभवशाली परंपरा के अनुरूप काम करते हैं. सादगी, हल्की व हवादार सूती साड़ी हो या चमकदार कांजीवरम साड़ी अपनी अभूतपूर्व अतीत को कालजयी बनाते हैं, भारतस्थली में कारीगर हर एक उत्पाद पर अपनी बेहतरीन कारीगरी की छाप छोड़ देते हैं. कंपनी अपनी वेबसाइट पर भिन्न-भिन्न रंगों, वैभव और मूल्यों का उत्कृष्ट समावेश रखती है जिसे वह अपने उत्पादों के माध्यम से प्रदर्शित करती है. इस संबंध में इसकी पूरी जानकारी इनके वेबसाइट bharatsthali.com पर मौजूद है.

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