सूरत के छात्र मेहुल चोकसी ने पीएम मोदी पर 9 साल में पूरी की पीएचडी | career-career – News in Hindi

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सूरत के छात्र मेहुल चोकसी ने पीएम मोदी पर 9 साल में पूरी की पीएचडी | career-career - News in Hindi

गुजरात स्थित सूरत के एक छात्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पीएचडी पूरी की है. प्रधानमंत्री मोदी पर पीएचडी करने वाले इस छात्र का नाम मेहुल चोकसी है. यह ध्यान देने वाली बात है कि उसका नाम हीरा कारोबारी से मेल खाता है, जो लोन डिफॉल्ट मामले में भगोड़ा है.

प्रधानमंत्री मोदी पर पीएचडी करने वाले मेहुल ने वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस में एमए किया है. सूरत के इस छात्र ने ‘Leadership under Government – Case Study of Narendra Modi’ टॉपिक पर पीएचडी सबमिट की है.

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समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, मेहुल ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री पर पीएचडी करने के लिए 450 लोगों का इंटरव्यू किया, जिसमें सरकारी अधिकारी, किसान, छात्र और नेता शामिल थे. मेहुल ने बताया कि सभी से 32 सवाल पूछे गए. मेहुल के मुताबिक, इस दौरान यह सामने आया कि 25 फीसदी लोग मोदी के भाषण को शानदार मानते हैं तो वहीं 48 फीसदी की मानना है कि पीएम मोदी की पॉलिटिकल मार्केंटिंग अच्छी है.यह भी पढ़ें:  गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं परवेज़ मुशर्रफ, दुबई के अस्पताल में हुए भर्ती

पेशे से वकील मेहुल ने वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के आर्ट्स डिपार्टमेंट से नीलेश जोशी के गाइडेंस में अपनी पीएचडी पूरी की. मेहुल ने साल 2010 में मोदी पर पीएचडी की शुरुआत की. उस वक्त मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री थे.

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मेहुल ने कहा कि पीएचडी के शुरुआती चरण में, मोदी के सफल नेतृत्व से संबंधित प्रश्न पूछे गए और उन्होंने कहा कि उन्हें 51 फीसदी से सकारात्मक और 34.25 फीसदी से नकारात्मक प्रतिक्रिया मिली. 46.75 फीसदी लोगों ने कहा कि लोकप्रियता हासिल करने के लिए, एक नेता को जनता को लाभ पहुंचाने वाले फैसले लेने चाहिए.

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मेहुल ने कहा, ’81 प्रतिशत लोगों सोचते हैं कि देश का प्रधानमंत्री होने के लिए सकारात्मक नेतृत्व  महत्वपूर्ण  है. वहीं 31 फीसदी का मानना है कि सच्चाई जरूरी है और 34 फीसदी का मानना है कि पारदर्शिता बहुत जरूरी है.’

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पीएचडी में मेहुल के गाइड नीलेश जोशी ने कहा, ‘हमने केस स्टडी के विषय को बहुत दिलचस्प पाया. हमने कुछ चुनौतियों का सामना किया, क्योंकि उस व्यक्ति के बारे में लिखना मुश्किल है, जो किसी उच्च पद पर है.’ प्रोफेसर ने कहा कि लोगों तक पहुंचना और उनकी प्रतिक्रिया मांगना भी पीएचडी के चुनौतीपूर्ण हिस्सों में से एक था.

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