15 दिन पहले PM ने बताया था आखिरी विकल्प लेकिन अब लॉकडाउन के लिए बन रहा दबाव

पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

करीब 15 दिन पहले ही पीएम मोदी (Narendra Modi) ने राज्यों से कहा था कि लॉकडाउन को आखिरी विकल्प माना जाए. लेकिन अब विपक्षी पार्टियों, बड़े व्यावसायियों समेत अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार एंथनी फॉसी ने भी संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए लॉकडाउन का विकल्प सुझाया है.

नई दिल्ली. देश में कोविड-19 की भयावह स्थिति के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) पर एक बार फिर लॉकडाउन (Lockdown) का दबाव बन रहा है. करीब 15 दिन पहले ही पीएम मोदी ने राज्यों से कहा था कि लॉकडाउन को आखिरी विकल्प माना जाए. लेकिन अब विपक्षी पार्टियों, बड़े व्यावसायियों समेत अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार एंथनी फॉसी ने भी संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए लॉकडाउन का विकल्प सुझाया है. एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी का इस बार का तरीका बीते साल से बिल्कुल अलग है. बीते साल 24 मार्च को देश में एकाएक लॉकडाउन की घोषणा की गई थी जिसकी वजह से देशभर में अप्रवासी मजदूरों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. संक्रामक रोगों की अमेरिकी एक्सपर्ट कैथरिन ब्लिस का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या नैरेटिव की है. सरकारें या तो पूर्ण लॉकडाउन लगा रही हैं जिससे आर्थिक त्रासदी आ रही है या फिर एकदम लॉकडाउन नहीं लगा रही है जिससे स्वास्थ्य त्रासदी सामने खड़ी हो जा रही है. ऑक्सीजन की कमी से जूझते अस्पतालों की हृदय विदारक तस्वीरें हुईं वायरल गौरतलब है कि बीते पखवाड़े में देशभर में कोरोना महामारी की वजह से भरे हुए अस्पतालों की हृदय विदारक तस्वीरें सामने आई हैं. ऑक्सीजन की कमी की वजह से कई राज्यों से मरीजों की मौत की खबरें सामने आईं हैं. एक तरफ जहां महामारी ने देश को बुरी तरह जकड़ा हुआ है वहीं दूसरी अर्थव्यवस्था की हालत भी बुरे हालात में दिख रही है. बीते एक पखवाड़े के दौरान भारतीय रुपया पूरे एशिया में सबसे खराब परफॉरमेंस वाली करेंसी रहा है.बिजनेस समुदाय से भी उठी मांग, पहले थे तेज वैक्सीनेशन के पक्षधर भारत के सबसे रईस बैंकर उदय कोटक ने सरकार से महामारी रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की अपील की है. उदय कोटक कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के हेड भी हैं. अप्रैल महीने की शुरुआत में कॉन्फेडरेशन लॉकडाउन के खिलाफ था और देश में तेज वैक्सीनेशन की मांग कर रहा था. लेकिन अब मांग बदल चुकी है.





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