सौरव गांगुली का फूटा दर्द, बोले- 2005 में कप्तानी से हटाना करियर का सबसे बड़ा झटका था

सौरव गांगुली(Sourav Ganguly) ने कहा कि जिंदगी में किसी चीज की गारंटी नहीं है. ऐसे में हर तरह के हालात से लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए. (Sourav Ganguly Twitter)

सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) के करियर में भी ऐसा दौर आया था, जब उन्हें 2005 में कप्तानी से हटाने के बाद टीम से बाहर कर दिया गया था. गांगुली का मानना है कि ये उनके लिए सबसे बड़ा झटका था. हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और फिर टीम में दमदार तरीके से वापसी की थी.

नई दिल्ली. सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) को भारतीय क्रिकेट में बदलाव के चेहरे के रूप में पहचाना जाता है. उनकी कप्तानी में टीम इंडिया (Team India) ने विदेशी जमीन पर जीत दर्ज करने का जो सिलसिला शुरू किया था, वो आज विराट कोहली (Virat Kohli) की अगुआई में भी जारी है. लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब गांगुली अपने करियर के सबसे बुरे दौर से गुजरे थे. उन्होंने इसका खुलासा भी किया. गांगुली के मुताबिक, 2005 में कप्तानी से हटाने के बाद टीम से बाहर होना उनके लिए सबसे बड़ा झटका था. इसलिए उनका मानना है कि जिंदगी में किसी चीज की गारंटी नहीं हैं और आपको हमेशा दबाव झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए.

गांगुली ने एक ऑनलाइन प्रमोशनल इवेंट में कहा कि आपको ऐसे हालात से निपटना होगा. यह आपकी मानसिकता के बारे में है. चाहें खेल, व्यवसाय या कुछ और जिंदगी का कोई भरोसा नही. अपको हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा. हर आदमी की जिंदगी में प्रेशर होता है और उसे उससे निपटना होता है. गांगुली की कप्तानी में भारत ने टेस्ट, वनडे मिलाकर कुल 196 मैच खेले हैं. इसमें से 97 जीते और 79 हारे हैं.

खिलाड़ियों पर प्रदर्शन में निरंतरता का दवाब होता है: गांगुली
उन्होंने आगे कहा कि जब आप पहला टेस्ट खेलते हैं, तो खुद को स्थापित करने के लिए अलावा दुनिया को ये साबित करना होता है कि आप इस मंच के लिए बने हैं. कुछ मैच खेल लेने के बाद जब आप स्थापित हो जाते हैं तो फिर खेल में निरंतरता बनाए रखने की जद्दोजहद शुरू हो जाती है. आपके प्रदर्शन में जरा भी चूक या कमी रह गई तो लोग आपकी आलोचना शुरू कर देंगे. ये किसी भी खिलाड़ी की जिंदगी में लंबे वक्त तक चलता है.मोईन अली पर तस्लीमा नसरीन के ट्वीट से मचा बवाल, जोफ्रा आर्चर ने दिया लेखिका को करारा जवाब

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भारतीय खिलाड़ी बायो-बबल में रहने में सक्षम
इस कार्यक्रम में बीसीसीआई अध्यक्ष गांगुली ने बायो-बबल को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने ये माना कि खिलाड़ियों के लिए लंबे समय तक बायो बबल में रहना मुश्किल है. लेकिन, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय काफी सहनशील होते हैं और हर चुनौती के लिए तैयार रहते हैं. इसलिए उन्हें नहीं लगता है कि आईपीएल में भारतीय खिलाड़ियों को खास परेशानी होगी. गांगुली ने कहा कि मुझे पता है कि बायो-बबल में रहना आसान नहीं है. लेकिन भारतीय परिस्थितियों से जल्दी तालमेल बैठा लेते हैं. उन्होंने आगे कहा कि मैं इंग्लैंड, वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया समेत तमाम देशों के खिलाड़ियों के साथ खेला हूं. मुझे लगता है कि हम भारतीय विदेशी खिलाड़ियों की तुलना में मानसिक रूप से ज्यादा मजबूत और सहनशील होते हैं.

हाल ही में टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने कहा था कि खिलाड़ियों के लिए लगातार बायो- बबल में रहना मुश्किल है. विराट ने खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति को लेकर भी चिंता भी जताई थी.





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