सीएम योगी का रानी अवंतीबाई बलिदान दिवस पर बड़ा ऐलान- वीरांगना के नाम पर महिला बटालियन

सीएम योगी आदित्यनाथ पीएसी में अवंतीबाई के नाम से महिला बटालियन का ऐलान किया है.

Lucknow News: उत्तर प्रदेश् के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में शहीद वीरांगना अवंतीबाई के बलिदान दिवस पर बड़ा ऐलान किया है. सीएम ने कहा है कि आज से पीएसी में अवंतीबाई के नाम से महिला बटालियन की हो रही शुरुआत.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने आज भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली प्रथम महिला शहीद वीरांगना अवंतीबाई के बलिदान दिवस पर लखनऊ (Lucknow) के हजरतगंज स्थित उनकी माल्यार्पण कर श्रंद्धांजलि अर्पित की. सीएम योगी के साथ उन्नाव के सांसद साक्षी महाराज (BJP MP Sakshi Maharaj), मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती (Uma Bharti) समेत प्रदेश सरकार के कई मंत्री भी मौजूद रहे.

मुख्यमंत्री ने अवंतीबाई समेत तमाम वीरांगनाओं को याद करते हुए कहा कि रानी लक्ष्मीबाई और अवंतीबाई लोधी ने विदेशी हुकूमत की दासता स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और देश की स्वाभिमान के लिए वे अंतिम दम तक लड़ती रहीं. उनका बलिदान भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए हमें एक नई प्ररेणा देता है. इन महान वीरांगनाओं से प्ररित होकर यूपी सरकार ने प्रदेश में मातृशक्ति की सुरक्षा, सम्मान के लिए मिशन शक्ति का कार्यक्रम शुरू किया.

इन तीन महिला बटालियन की घोषणा

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश के 1535 स्थानों में 350 तहसीलों में महिला सुरक्षा डेस्क स्थापित किया गया है. प्रदेश सरकार ने तीन (रानी अवंतीबाई लोधी, उदय देवी और झलकारीबाई) महान वीरांगनाओं के नाम पर तीन महिला बटालियन की घोषणा की है, जिन्होंने देश की स्वाधीनता की आंदोलन में अपना बलिदान दिया. मुख्यमंत्री ने अवंतीबाई के नाम से PAC में महिला बटालियन की स्थापना का ऐलान करते हुए कहा है कि इस बटालियन की आज से स्थापना होने जा रही है.जानिए कौन हैं वीरांगना रानी अवंतीबाई

रानी अवन्तीबाई लोधी भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली प्रथम महिला शहीद वीरांगना थीं. 1857 की क्रांति में रामगढ़ की रानी अवंतीबाई रेवांचल में मुक्ति आंदोलन की सूत्रधार थीं. 1857 के मुक्ति आंदोलन में इस राज्य की अहम भूमिका थी, जिससे भारत के इतिहास में एक नई क्रांति आई.

1817 से 1851 तक रामगढ़ राज्य के शासक लक्ष्मण सिंह थे. उनके निधन के बाद विक्रमाजीत सिंह ने राजगद्दी संभाली. उनका विवाह बाल्यावस्था में ही मनकेहणी के जमींदार राव जुझार सिंह की कन्या अवंतीबाई से हुआ. विक्रमाजीत सिंह बचपन से ही वीतरागी प्रवृत्ति के थे. अत: राज्य संचालन का काम उनकी पत्नी रानी अवंतीबाई ही करती रहीं. उनके दो पुत्र हुए-अमान सिंह और शेर सिंह. अंग्रेजों ने तब तक भारत के अनेक भागों में अपने पैर जमा लिए थे, जिनको उखाड़ने के लिए रानी अवंतीबाई ने क्रांति की शुरुआत की और भारत में पहली महिला क्रांतिकारी रामगढ़ की रानी अवंतीबाई ने अंग्रेजों के विरुद्ध ऐतिहासिक निर्णायक युद्ध किया. जो भारत की आजादी में बहुत बड़ा योगदान है, जिससे रामगढ़ की रानी अवंतीबाई अब पूरे भारत मैं अमरशहीद वीरांगना रानी अवंतीबाई के नाम से हैं.




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