ये है लोकतंत्र: वोटर्स ने ममता को हराया, झोपड़ी में रहने वाली चंदना को जिताया

चंदना बाउरी को 91 हजार 648 वोट मिले हैं, जबकि टीएमसी प्रत्याशी को 87 हजार 503 वोट हासिल हुए हैं.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) में बीजेपी (BJP) की प्रत्‍याशी चंदना बाउरी (Chandna Bauri) को 91 हजार 648 वोट मिले हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) प्रत्याशी को 87 हजार 503 वोट हासिल हुए हैं. चंदना बाउरी ने संतोष कुमार मोंडल को 4145 वोटों से मात दी है.

कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) के नतीजे आ चुके हैं. इस बार के चुनाव में एक ओर जहां तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) की बड़ी जीत हुई है वहीं बीजेपी (BJP) की उम्‍मीदों पर पानी फिर गया है. इस बार के विधानसभा चुनावों ने एक बार फिर बताया दिया है कि दुनिया में भारत का लोकतंत्र (Democracy) सबसे मजबूत है. इस बार के चुनाव में सूबे की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी को जहां मतदाताओं ने हरा दिया वहीं सालतोरा सीट से झोपड़ी में रहने वाली मजदूर की पत्‍नी चंदना बाउरी को विधानसभा तक पहुंचा दिया. चुनाव के नतीजे आने के बाद अब बीजेपी की हार से ज्‍यादा चंदना बाउरी की जीत चर्चा का विषय बनी हुई है. बता दें कि चंदना बाउरी उन नेताओं से बिल्‍कुल अलग हैं, जो पैसे दम पर चुनाव लड़ते हैं. भारतीय जनता पार्टी के नेता सुनील देवघर ने ट्वीट कर जानकारी दी कि चंदना बाउरी एक गरीब मजदूर की पत्नी हैं, जिनकी उम्र भर की जमा पूंजी सिर्फ 31 हजार 985 रुपये हैं. चंदना आज भी झोपड़ी में रहती हैं और उनके पास 3 बकरियां और 3 गाय हैं. भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाली चंदना बाउरी ने सालतोरा सीट पर टीएमसी के संतोष कुमार मोंडल को मात दे दी है.

इसे भी पढ़ें :- ममता की जीत से विपक्ष में खुशी की लहर! 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए जगी उम्मीदेंचुनाव में चंदना बाउरी को 91 हजार 648 वोट मिले हैं, जबकि टीएमसी प्रत्याशी को 87 हजार 503 वोट हासिल हुए हैं. चंदना बाउरी ने संतोष कुमार मोंडल को 4145 वोटों से मात दी है. इस सीट पर तीसरे नंबर सीपीआई (एम) के प्रत्याशी नंदलाल बाउरी रहे, उन्हें महज 14084 नसीब हुए जबकि नोटा के बटन को 3363 लोगों ने दबाया. इसे भी पढ़ें :- नंदीग्राम की हार के बाद भी क्‍या CM बनी रहेंगी ममता? जानें क्‍या कहता है संविधान बता दें कि चंदना बाउरी के पति के पास किसी तरह की कृषि भूमि नहीं है. वह दिहाड़ी मजदूर हैं और मजदूरी से ही अपना घर चलाते हैं. चंदना भी अपने पति के साथ ही काम करती है और उनके साथ हाथ बंटाती है. चंदना ने 12वीं तक पढ़ाई की है जबकि उनके पति सिर्फ 8वीं पास हैं. पिछले साल उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 60 हजार की पहली किश्त भी मिली थी, जिससे उन्होंने अपना घर पक्का किया था.





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