म्यांमार से तेजी से भारत आ रही है पिंक ड्रग, महानगरों में बढ़ रही है डिमांड

इससे पहले 2019 में तकरीबन 50 करोड़ से ज्यादा की ड्रग पकड़ी गई थी और इस साल अब तक 16 करोड़ रूपये की ड्रग पकड़ी जा चुकी है.

इस ड्रग में मुनाफ़ा काफी ज्यादा है जो गोली म्यांमार में महज़ 10 रुपये में बिकती है वो मिज़ोरम में आकर 300 रूपये और दिल्ली, मुम्बई जैसे अन्य महानगरों तक जाते-जाते 2000 रूपये से ज्यादा प्रति गोली में बिकती है.

आईजोल. म्यांमार में जारी हालात के चलते भारत में शर्णार्थियों के साथ बड़ी तादाद में ड्रग की तस्करी का ख़तरा बढ रहा है. आईजोल के ग्राउंड में प्रैक्टिस करते ये सभी युवा भारतीय सेना में शामिल होने की तैयारी कर रहे है. ये उन युवाओ में से है जो कि ड्रग के नशे से दूर रहकर अपना भविष्य बेहतर कर लेना चाहते है. आसानी और सस्ते में मिल जाने वाली ड्रग याबा या कहे पिंक ड्रग या कहे मेटामेफ्टामाइन. गुलाबी रंग की छोटी सी गोली ने मिज़ोरम के लोगों के खून में ज़हर घोल रखा है और ये गोली म्यांमार के रास्ते भारत के बड़े शहरो तक पहुंचती है.

इस ड्रग में मुनाफ़ा काफी ज्यादा है जो गोली म्यांमार में महज़ 10 रुपये में बिकती है वो मिज़ोरम में आकर 300 रूपये और दिल्ली, मुम्बई जैसे अन्य महानगरों तक जाते-जाते 2000 रूपये से ज्यादा प्रति गोली में बिकती है. असम रायफल के 23 सेक्टर कमांडर ब्रिगेडियर दिग्विजय सिंह का कहना है कि मिज़ोरम में ड्रग की लत के पीछे सबसे बड़ा करण है कि आसानी से ड्रग उपलब्ध हो जाना. उनका कहना है कि मिजोरम एक ड्राई स्टेट है. यानि राज्य में पूर्ण रूप से शराबबंदी लागू है, ऐसे में लोग इस गुलाबी नशे का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं.

कई प्रतिबंधित वस्तुओं की हो रही है स्मगलिग
ऐसा नहीं है कि सिर्फ पिंक ड्रग ही स्मगलिग से भारत में पहुंचती है. इसके अलावा हेरोईन, गोल्ड और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की भी स्मगलिंग म्यांमार से होती है. कोरोना के चलते म्यांमार और भारत के बीच मौजूदा करारा फ़्री बॉर्डर मूवमेंट रिजीम को सस्पेड कर दिया गया है और ये अब भी जारी है बावजूद इसके असम रायफल ने पिछले साल कोरोना के दौरान भी क़रीब 35 करोड़ से ज्यादा की ड्रग पकड़ी थी और 40 लोगों को गिरफ़्तार किया था.2019 में पकड़ी गई थी 50 करोड़ से ज्यादा की ड्रग

इससे पहले 2019 में तकरीबन 50 करोड़ से ज्यादा की ड्रग पकड़ी गई थी और इस साल अब तक 16 करोड़ रूपये की ड्रग पकड़ी जा चुकी है. खास बात तो ये है कि इस पिंक ड्रग को बड़ी आसानी से स्मगल की जाती है जितनी भी खेप अब तक पकड़ी गई है वो छोटे-छोटे पैकेट में पकड़ी गई है और हर पैकेट में 20 हज़ार गोलियां पैक की जाती है.

चूंकि मिज़ोरम एक लैंड लॉक स्टेट है जो की दो तरफ से बंगलादेश और म्यांमार से घिरा है ऐसे में कहा जाता है कि पुराने समय में व्यापार भारत के मिज़ोरम से लाओस, म्यांमार और थाईलैंड हुआ करता था जिसे ओल्ड सिल्क रूट भी कहा जाता है और नमक के लिए मिज़ोरम इसी रूट की इस्तेमाल किया जाता था तो इसे बाद में सॉल्ट रूट का भी नाम दिया गया था और इसी रूट का इस्तेमाल कर ड्रग भारत में तस्करी हो रही है.

रिफ्यूजी के जरिए भारत में बढ़ सकती है ड्रग तस्करी
जानकारों की मानें तो मौजूदा समय में ये नशे का कारोबार गोल्डन ट्रायंगल से बदलकर गोल्डन पेंटागन में बदल गया है यानि लाओस म्यांमार और थाईलैंड के साथ अब मलेशिया और इंडोनेशिया भी शामिल हो गए. ऐसे में चुनौतियां बढ़ गई है और जिस तरह से हालात म्यांमार के है ऐसे में बड़ी तादाद में रिफ्यूजी के भारत में आने की संभावना है और इन्हीं के जरिए ड्रग की तस्करी भी बढ़ सकती है. असम रायफल यहां के लोगों को खास तौर पर युवाओं को नशे के जाल में फंसने से रोकने के लिए राज्य सरकार और एनजीओ की मदद से कई प्रोग्राम चला रही है जिसमें सेना में भर्ती के लिए भी ट्रेनिंग दी जा रही है.

युवाओं का कहना है कि नशे ने बहुत से लोगों को बर्बाद कर दिया है. दसवीं पास करने के बाद से वो इसे तरह के गुट में शामिल हो जाते हैं जो नशा करते है और फिर बाहर नही निकल पाते. भारत और म्यांमार एक साथ 1600 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी सीमा को साझा करते है और मिज़ोरम के साथ लगने वाली सीमा 510 किलोमीटर है और आंकड़ों को देखें तो 1984 से अब तक ड्रग अब्यूज की वजह से 1578 लोगों की मौत हुई. बहरहाल नशे के इस कनेक्शन को तोड़ने के लिए असम रायफल पूरी शिद्दत से जुटी हुई है.




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