मुख्यमंत्रियों से संवाद के दौरान पीएम मोदी ने दिए यह पांच खास संदेश

मुख्यमंत्रियों से संवाद के दौरान पीएम मोदी

कोविड-19 की स्थिति और मौजूदा टीकाकरण अभियान को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ संवाद के दौरान मोदी ने कहा कि वह आश्वस्त हैं कि सभी मुख्यमंत्री सभी दलों और लोगों को साथ लेकर अपने-अपने संबंधित राज्यों में हालात बदलेंगे.

(अमन शर्मा)


नई दिल्ली. 
देश में कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के बढ़ते मामलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने एक बार फिर राज्यों के मुख्यमंत्रियों से संवाद किया. पीएम के संवाद में जो पांच खास बातें थी उसमें इकॉनमी को ऑपरेशनल रखने के लिए और लॉकडाउन ना लगाना, टेस्ट-ट्रैक-ट्रीट-कंटेन की रणनीति पर वापस जाना, ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग पर ध्यान देना, 45+ लोगों का टीकाकरण और कोविड  का असर कम करना शामिल है.

सभी के लिए पीएम का यह संदेश राहत भरा था कि लॉकडाउन दूसरी लहर से निपटने का तरीका नहीं है. पीएम की सोच से वाकिफ लोगों का कहना है कि केंद्र अब लॉकडाउन के पक्ष में नहीं है. संवाद के दौरान मोदी ने खुद कहा कि सरकार अब दूसरी लहर से लड़ने के लिए टेस्टिंग और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए तैयार है.हालांकि, लोगों को वायरस के खतरे से सावधान रखने के लिए एक मनोवैज्ञानिक उपाय के रूप में रात का कर्फ्यू जारी रह सकता है लेकिन पीएम ने निर्देश दिया है कि इसे सुबह रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक किया जाए ताकि अर्थव्यवस्था पर प्रभाव कम से कम हो.

वैक्सीनेशन किस आधार पर?
मुख्यमंत्रियों से किए गए संवाद के दौरान पीएम ने एक अहम संदेश यह दिया कि टीकाकरण के दायरे  के मुद्दे पर वैक्सीनेशन के मामले में भारत दुनिया से अलग कुछ नहीं कर रहा. सरकार यहां आंकड़ों के हिसाब से काम कर रही है जिसके अनुसार  कोविड की वजह से भारत में लगभग 90% मौतें 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में हुई हैं.  कोविड के कारण 45 से ऊपर आयु वर्ग के लोगों की मृत्यु दर (संक्रमित लोगों में मरने वाले) लगभग 2.9% है, जो कि देश की समग्र 1.3% मृत्यु दर से कहीं अधिक है. ऐसे में सरकार 45+ के वैक्सीनेशन पर जोर दे रही है.

वैक्सीन की आपूर्ति जून या जुलाई तक सीमित होने के कारण स्पुतनिक और अन्य टीकों को मंजूरी मिलने तक सरकार वैक्सीन के लिए लोगों की भीड़ से बच रही है. टीका लगाने वालों की की सीमित उपलब्धता भी एक और मुद्दा है. सरकार ने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया में वैक्सीनेशन पैटर्न का अध्ययन किया है. सरकार का मानना है कि टीकाकरण का उद्देश्य जीवन को बचाना और मृत्यु दर को कम करना है. हालांकि अगले दो-तीन महीनों में अधिक से अधिक आपूर्ति आएगी और अगर तब तक 45 से अधिक आबादी का टीकाकरण हो जाता है, तो केंद्र अधिक आयु-समूहों को दायरे में लाने का फैसला करेगा.

हम मौतों के बारे में अधिक चिंतित- अधिकारी
एक वरिष्ठ अधिकारी ने News18 को बताया कि ‘हम 1.27 लाख संक्रमणों की तुलना में रोजाना 650 लोगों की मौत के बारे में अधिक चिंतित हैं. ऐसे में हमें पुरानी रणनीति पर वापस जाना होगा. उस मॉडल को फिर से लागू किए जाने की जरूरत है. इस बात से कोई इनकार नहीं है कि राज्यों ने पिछले एक साल में अच्छा किया.’ पीएम ने मुख्यमंत्रियों ने को उसी मॉडल पर वापस जाने को कहा.  एक वरिष्ठ अधिकारी ने News18 को बताया, ‘लॉकडाउन लगाना आसान है लेकिन टेस्ट-ट्रैक-ट्रीट-ट्रीट मॉडल को पूरी तरह से लागू करना कठिन है.’

पीएम ने इस बात पर भी जोर डाला कि वैक्सीनेशन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद राज्यों ने परीक्षण के बारे में भूल गए हैं. आरटी-पीसीआर टेस्टिंग में गिरावट आई जिसके परिणामस्वरूप मार्च में पॉजिटिविटी रेट 2.2 फीसदी था जो अब बढ़कर अप्रैल में 8.4 फीसदी हो गया है. पीएम ने संवाद के दौरान यह भी संदेश देने की कोशिश की है कि इस मुद्दे पर राजनीति ना करें. पीएम ने कहा कि वह वैक्सीन पर हो रही राजनीति देख रहे हैं लेकिन वह उस पर एक शब्द नहीं करेंगे क्योंकि उनका ध्यान संक्रमण का मुकाबला करने पर है.





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