ममताVsशुभेंदू: जुबानी जंग के बाद अब असली टेस्ट, नंदीग्राम में दीदी की परीक्षा

नंदीग्राम में ममता बनर्जी का मुकाबला शुभेंदू अधिकारी से है. (फाइल फोटो)

पार्टी छोड़ने के बाद से ही शुभेंदू अधिकारी ममता और टीएमसी पर हमलावर हो गए. ममता बनर्जी ने भी नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी. राज्य के पूर्वी मिदनापुर जिले में पड़ने वाला यह इलाका शुभेंदू अधिकारी और उनके परिवार का गढ़ कहा जाता है. इस सीट पर कल वोटिंग होनी है.

कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस (TMC) में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के बेहद नजदीकियों में शुमार किए जाने वाले शुभेंदू अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बीते नवंबर महीने बटोरी थीं. तब उन्होंने टीएमसी से इस्तीफा दिया था और सब तरफ इसे ममता बनर्जी को लगा बड़ा झटका बताया गया. पार्टी छोड़ने के बाद से ही शुभेंदू अधिकारी ममता और टीएमसी पर हमलावर हो गए. ममता बनर्जी ने भी नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी.

राज्य के पूर्वी मिदनापुर जिले में पड़ने वाला यह इलाका शुभेंदू अधिकारी और उनके परिवार का गढ़ कहा जाता है. इस सीट पर कल वोटिंग होनी है. इस बीच ममता और शुभेंदू के बीच जुबानी जंग भी जमकर हुई है. आखिर ममता के सबसे नजदीकी रहे शुभेंदू सबसे बड़े दुश्मन में कैसे तब्दील हो गए?

करीब 40-45 सीटों पर है अधिकारी प्रभाव
दरअसल शुभेंदु अधिकारी और उनके परिवार का पूर्वी और पश्चिमी मिदनापुर सहित पहले-दूसरे चरण की 40-45 सीटों पर वर्चस्व है. बांकुरा, पुरुलिया, झाड़ग्राम और बीरभूम के अलावा अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद में परिवार का जबरदस्त प्रभाव है. कभी ममता के बेहद खास रहे अधिकारी परिवार के असर का फायदा पहले टीएमसी को मिलता था जो अब बीजेपी को मिलने की उम्मीद है.खुद ममता के लिए महत्वपूर्ण रहा है ये इलाका

अगर टीएमसी की बात करें तो ये ही वो इलाके हैं जहां से ममता के राजनीतिक जीवन को भी मजबूती मिली थी. नंदीग्राम के आंदोलन के बाद ही ममता राजनीतिक ऊंचाइयों पर पहुंची. फिर 2011 में लेफ्ट को बाहर कर पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज हुईं. अब ममता के सामने भी चैलेंज है कि वो बीजेपी और अधिकारी प्रभाव की काट कैसे ढूंढेंगी.

शुभेंदू अधिकारी ममता बनर्जी के साथ 2007 के नंदीग्राम आंदोलन के वक्त से जुड़े रहे. तब करीब 34-35 साल के शुभेंदू युवा नेताओं में शुमार किए जाते थे. बाद में राज्य की सत्ता में ममता बनर्जी के काबिज होने के बाद शुभेंदू का कद बढ़ता गया. वो बीते दस सालों में ममता के सबसे करीबी नेताओं में शुमार किए जाते रहे. लेकिन बीते साल के आखिर में इस्तीफा देने के पहले दोनों के बीच मतभेद काफी बढ़ गए थे.

शुभेंदू ने टीएमसी छोड़ी और उसके बाद से ही पूरे राज्य में घूम-घूमकर प्रचार कर रहे हैं. ममता भी उन्हें टक्कर देने गढ़ में आ पहुंची हैं. अब देखना होगा कि पश्चिम बंगाल की इस हॉट सीट पर ममता बनर्जी कैसे अपनी करीबी रहे शुभेंदू अधिकारी का मुकाबला करेंगी.





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