बीजेपी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने पेश किया इंसानियत का बेमिसाल उदाहरण

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा (फाइल फोटो)

नड्डा इस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और राजनीति के शीर्ष पर हैं. लेकिन समर्थकों की भारी भीड़ और अपने रोड के बीच फंसी एंबुलेंस पर उनकी नजर पड़ ही गयी.

नई दिल्ली. हिंदी फिल्मों में अक्सर देखा है कि कैसे नेताओं की रैलियों और वीआईपी मूवमेंट की वजह से आम आदमी को तकलीफें उठानी पड़ती हैं. राजनेताओं को लोग मान कर ही चलते हैं कि ऐसी मुश्किलें तो आम आदमी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में झेलता ही रहता है. ऐसे मे इंतजार उस रहनुमा का होता है जो इस भीड़ में रास्ता दिखाए. हर रोज तो नहीं लेकिन असली जिंदगी में ऐसे कुछ मसीहा अक्सर दिख ही जाते हैं जो घायलों या फिर जाम में फंसे आम आदमी की मदद के लिए आगे आ ही जाते हैं. कुछ ऐसी ही मिसाल पेश की है बीजेपी के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने. नड्डा इस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और राजनीति के शीर्ष पर हैं. लेकिन समर्थकों की भारी भीड़ और अपने रोड के बीच फंसी एंबुलेंस पर उनकी नजर पड़ ही गयी.

पश्चिमी मिदनापुर के घाटाल शहर में बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा का रोड शो अपने पूरे चरम पर था. कार्यकर्ताओं की अपार भीड़, रोड शो में शामिल होने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा पड़ा था. बीजेपी समर्थकों की भारी नारेबाजी के बीच एकाएक नड्डाजी ने अपनी माइक पर बोलना शुरू कर दिया तो लोग चौके और खामोश भी हो गए. कुछ पलो की खामोशी के बीच नड्डा की आवाज ही गूंज रही थी. एंबुलेंस को रास्ता दो….एंबुलेंस को रास्ता दो. नड्डाजी तब तक नहीं थमे जब तक एंबुलेंस को बिना थमे उस भीड़ से रास्ता देख कर निकाल दिया गया. वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर नड्डा के इस काम को सराहा.

खास बात ये है कि नड्डा ने इसकी परवाह भी नहीं की कि शाम हो रही है और वो और थोड़ी देर फंसे रहे तो उनका हेलिकाप्टर कोलकाता के लिए उड़ नहीं पाएगा जहां पहले से ही संगठन की कई बैठकें तय थीं.

नड्डा ने इस बात की भी परवाह नहीं की कि पश्चिमी मिदनापुर का इलाका खासा संवेदनशील भी है. आज के दौर में जब रोजमर्रा के ट्रैफिक में लोग एंबुलंस के लिए रास्ता नहीं छोड़ते, सड़क पर कोई घायल पड़ा तो अस्पताल नहीं पहुंचाते. जेपी नड्डा ने अपने इस कदम से ऐसी मिसाल कायम की है जो ये संदेश दे रहा है कि सभी नेता एक जैसे नहीं होते और मानवता अभी भी बाकी है.




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