पाकिस्‍तान में बढ़ी गधों की संख्‍या, जानिए भारत में कितनी है इनकी आबादी

पाकिस्‍तान में गधों की संख्‍या बढ़ी है जबकि भारत में लगातार कम हो रही है. कॉन्सेप्ट इमेज.

पाकिस्‍तान में गधों की संख्‍या में जहां हर साल एक लाख का इजाफा हो रहा है वहीं भारत में गधों की कुल आबादी एक लाख 20 हजार है. भारत में गधों की संख्‍या में लगातार कमी आ रही है.

नई दिल्‍ली. पाकिस्‍तान में गधों की संख्‍या में भारी इजाफा हुआ है. बृहस्‍पतिवार को जारी किए गए पाकिस्‍तान (Pakistan) के इकोनॉमिक सर्वे 2020-21 से पता चला है कि वहां गधों की संख्‍या में हर साल एक लाख की बढ़ोत्‍तरी हुई है. ऐसे में पाकिस्‍तान में गधों की संख्‍या बढ़कर 56 लाख पहुंच गई है लेकिन क्‍या आपको मालूम है कि भारत में गधों (Donkeys in India) की आबादी क्‍या है.

भारत में पाकिस्‍तान के मुकाबले गधों की संख्‍या काफी कम है. दिलचस्‍प है कि पाकिस्‍तान में गधों की संख्‍या में ही इजाफा हुआ है जबकि अन्‍य जानवरों की संख्‍या में 13 साल से अभी तक कोई वृद्धि नहीं हुई है. वहीं भारत की बात करें तो 2012 से लेकर 2019 तक भारत में गधों की संख्‍या में भारी गिरावट आई है. 2012 में भारत में गधों की आबादी तीन लाख 20 हजार थी.

ब्रुक इंडिया की ओर से भारत में 2019 में की गई पशु जनगणना में सामने आया है कि यहां गधों की कुल संख्‍या एक लाख बीस हजार ही है. पाकिस्‍तान की तुलना में यह संख्‍या काफी कम है. वर्तमान में गधों की कुल जनसंख्या में 2012 में हुई इसकी जनगणना की तुलना में 61.23% की कमी आई है जो कि चिंताजनक है.

भारत में 2019 में हुई जनगणना से पता चला है कि देश में घोड़े, गधे और खच्‍चरों की कुल आबादी में भारी कमी आई है. 2012 की जनगणना के मुकाबले इनकी संख्‍या में 51.9% की कमी देखी गई है. ब्रुक इंडिया के अनुसार आंकड़ों की तुलना करने पर पता चला है कि गधे की आबादी में सबसे ज्यादा गिरावट आई है और यह गंभीर इसलिए है क्योंकि यह मामला चीनी बाजारों में गधे की चर्बी से बने “ईजियो” के निर्यात से जुड़ा है.पाकिस्‍तान को लेकर भी गधों को चीन में निर्यात करने की बात कही जा रही है. वहीं चीन में ईजियो की इस भारी मांग की वजह से दुनिया में गधों की संख्या काफ़ी कम हो गयी है और भारत में गधों की कम होती जनसंख्या की भी इसीलिए जांच की आवश्यकता बताई गई है.

बता दें कि भारत में कामकाजी अश्व, गधे और खच्चर गरीब और पिछड़े वर्ग के ग्रामीण समुदायों के लिए आजीविका के प्रमुख स्रोत हैं. इन जानवरों का प्रयोग ईंट भट्टों, निर्माण, पर्यटन, कृषि और माल ढोने के लिए होता है और कई बार तो लोगों के परिवहन में भी इनका इस्तेमाल होता है.





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