टला खतरा, धरती के बगल से 34KM प्रति सेकेंड की रफ्तार से गुजरा एस्‍टेरॉयड

धरती के बगल से 34KM प्रति सेकेंड की रफ्तार से गुजरा एस्‍टेरॉयड (प्रतिकात्‍मक फोटो)

एस्टेरॉयड (Asteroid) का नाम 2001 FO32 है. ये एस्टेरॉयड धरती (Earth) के करीब से 34KM प्रति सेकेंड की रफ्तार से गुजर गया. खगोलविदों के मुताबिक एस्टेरॉयड की ये रफ्तार धरती पर तबाही लाने के लिए काफी थी.

नई दिल्‍ली. अंतरिक्ष (Space) में अकसर कुछ न कुछ ऐसा होता रहता है जो कभी हमें आश्‍चर्यचकित करता है तो कभी हमें डरने पर मजबूर कर देता है. रविवार की रात अंतरिक्ष में एक ऐसी घटना घटी जो धरती (Earth) के लिए खतरनाक साबित हो सकती थी. दरअसल कल रात धरती के बेहद करीब से एक एस्टेरॉयड (Asteroid) गुजरा जो अगर धरती से टकरा जाता तो बड़ा नुकसान हो सकता था. इस एस्टेरॉयड का नाम 2001 FO32 है. ये एस्टेरॉयड धरती के करीब से 34KM प्रति सेकेंड की रफ्तार से गुजर गया. खगोलविदों के मुताबिक एस्टेरॉयड की ये रफ्तार धरती पर तबाही लाने के लिए काफी थी.

रविवार रात करीब 9 बजे एस्टेरॉयड 2001 FO32 पृथ्‍वी से मात्र 20 लाख किलोमीटर दूर से निकल गया. खगोलविदों के मुताबिक अंतरिक्ष के लिहाज से ये गति और दूरी ज्‍यादा नहीं होती है. एस्टेरॉयड पलक झपकते ही गायब हो जाते हैं और अगर ये किसी चीज से टकरा जाएं तो तबाही भी मचा सकते हैं.

इसे भी पढ़ें :- अंतरिक्ष में बनने जा रहा 400 लोगों के लिए होटल, मिलेंगी कई सुविधाएं, पढ़ें इसकी पूरी जानकारीनासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक अमूमन एस्टेरॉयड इतनी तेज गति से नहीं घूमते हैं. लेकिन जिस तेज गति से ये धरती के पास से गुजरा है उसे देखने के बाद हम कह सकते हैं कि इस गति के पीछे इसकी ऑर्बिट है. ये जिस ऑर्बिट में घूम रहा है उसमें सूर्य की ताकत इसे ज्यादा मिल रही है. वैज्ञानिकों ने बताया कि एस्टेरॉयड 2001 FO32 को जब हमने देखा तो पाया कि वह धरती की तरफ 39 डिग्री पर झुका हुआ था, जिसके कारण वह सूर्य के बेहद करीब पहुंच रहा था और उसकी गति बढ़ रही थी. इसे भी पढ़ें :- अंतरिक्ष का कचरा साफ करने के लिए जापान ने लॉन्च किया मैगनेटिक सैटेलाइट

इटली के सेसानो स्थित वर्चुअल टेलिस्कोप के एस्ट्रोफिजिसिस्ट जियालुका मासी ने कहा जब हमने एस्‍टेरॉयल 2001 FO32 को पहली बार देखा था तो वह अंतरिक्ष में काफी तेज चकदार वस्‍तु की तरह दिखाई दे रहा था. वह तेजी से सूर्य की तरफ जाता था. एस्टेरॉयड 2001 FO32 को सूर्य का चक्‍कर लगाने में 810 दिन का समय लगता था. इस एस्टेरॉयड के बारे में हमें 20 साल पहले पता चला था लेकिन यह कभी भी धरती के लिए खतरा नहीं बना.




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