जानिए, शरीर के कौन से अंग है Corona के लिए सॉफ्ट टारगेट

बढ़ते प्रकोप के बीच कोरोना संक्रमण ने नया ही रिकॉर्ड बनाया और लगातार तीसरे दिन 2 लाख से ज्यादा मामले दर्ज हुए. इस बीच मौत की दर भी तेजी से ऊपर जा रही है. विभिन्न राज्यों की सरकारें अपने स्तर पर लॉकडाउन लगा रही हैं, इसके बाद भी संक्रमण तेज हो रहा है. इस बीच समझते हैं कि शरीर में बाहर और भीतर ऐसे कौन से अंग हैं, जो कोरोना वायरस के हमले का सबसे आसान शिकार हैं.

ये है पूरी प्रक्रिया 
सबसे पहले वायरस की कांटेदार संरचना शरीर की कोशिकाओं से जुड़कर भीतर प्रवेश करती है. एक बार कोशिका तक पहुंचने के बाद वो अपनी संख्या तेजी से बढ़ाने लगता है. ये वो समय है, जब वायरस स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करता होता है. शुरू में मरीज में खास लक्षण नहीं दिखते लेकिन जैसे-जैसे वायरल लोड बढ़ता है, मरीज बीमार महसूस करने और दिखने लगता है. यही वो समय है, जिसमें इलाज न मिलने पर लक्षण बिगड़ते चले जाते हैं और मरीज की हालत खराब हो जाती है.

बाहरी अंगों की बात करें तो वो सारे ही अंग वायरस के लिए सॉफ्ट टारगेट हैं, जहां म्यूकस मेंब्रेन है (Graphic- news18 Hindi)

ये तो हुई कोरोना के शरीर पर हमले के बाद की प्रक्रिया, लेकिन एक बार ये समझना जरूरी है कि मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने का दावा करने के बाद भी लोग बीमार क्यों हो रहे हैं?

क्या कहते हैं एक्सपर्ट 
इस बारे में डॉ श्रीकांत शर्मा (Dr Srikant Sharma), सीनियर कंसल्टेंट फिजिशयन, दिल्ली अपनी राय देते हुए उन अंगों की बात करते हैं, जो वायरस के लिए सॉफ्ट टारगेट हैं.

म्यूकस मेंब्रेन के जरिए शरीर में आता है
बकौल डॉ शर्मा, इनमें सबसे पहला कारण है मास्क का गलत ढंग से पहना जाना. इससे कोरोना नाक या मुंह से होते हुए सीधे फेफड़ों तक पहुंच जाता है. दरअसल शरीर के बाहरी अंगों की बात करें तो वो सारे ही अंग कोरोना वायरस के लिए सबसे सॉफ्ट टारगेट हैं, जहां म्यूकस मेंब्रेन है. बता दें कि म्यूकस मेंब्रेन नाक, मुंह, आंखों के अलावा शौच करने के रास्ते यानी गुदाद्वार में पाई जाती है. ये एक झिल्ली की तरह संचरना होती है, जिससे होता हुए वायरस शरीर में घुसता है. यही कारण है कि लगातार कहा जा रहा है कि कोरोना मरीज के साथ टॉयलेट भी साझा नहीं करना चाहिए, वरना गुदा के जरिए संक्रमण हो सकता है.

Coronavirus

गलत तरीके से या फिर मास्क न पहनना ऐसे करता है संक्रमित (Graphic- news18 Hindi)

ये बाहरी अंग सबसे संवेदनशील 
शरीर के बाहरी हिस्सों में नाक, मुंह और आंखें वायरस के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं. जैसे मास्क ठीक से न पहनने पर सीधे सांस के जरिए संक्रमण फैलता है. वहीं संक्रमित सतह को छूने के बाद अगर आंखों या मुंह को छुआ जाए तो स्वस्थ व्यक्ति भी बीमार हो सकता है. फिलहाल संक्रमण जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसमें सारे कोरोना प्रोटोकॉल मानने की जरूरत है. इनमें सबसे पहला है- मास्क को सही तरीके से पहनकर ही बाहर निकलना और उसमें भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना.

ये भी पढ़ें: जानें, कैसा संगठन है तहरीक-ए-लब्बैक, जिसे PAK में बैन किया गया 

मास्क का गणित समझते हैं 
कई स्टडीज में मास्क और संक्रमण को जांचते हुए आंकड़े निकाले गए. इसमें दिखता है कि अगर कोरोना मरीज मास्क पहने तो दूसरों का संक्रमण का खतरा 5 से 10% तक रहता है. वहीं अगर स्वस्थ लोग मास्क पहने हुए हों, वहीं कोरोना के मरीज ने मास्क न पहना तो संक्रमण का खतरा 30% तक हो जाता है. अगर मरीज और स्वस्थ, दोनों ही ने मास्क पहने हों तो संक्रमण फैलने का डर 1 से 2% तक ही रह जाता है. इसके साथ दोनों ने मास्क पहने और सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन हो तो वायरस के फैलने का डर घटकर 0.5% तक रह जाता है, यानी बहुत कम.

ये भी पढ़ें: Sputnik V: कैसे काम करती है रूस की वैक्सीन, देसी टीकों से कितनी अलग है?   

अब अगर शरीर के अंदरुनी अंगों को देखें तो वायरस का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों पर दिख रहा है. श्वसन तंत्र प्रणाली की कोशिकाओं में ऊपरी वायुमार्ग से भीतर जाने के बाद वायरस फेफड़ों तक पहुंच जाता है और उसे तबाह करना शुरू कर देता है. इससे सांस लेना मुश्किल होता जाता है. मरीज को ऐसा लगता है जैसे वो डूब रहा हो.

Coronavirus

भीतर जाने पर वायरस ऐसे करता सिस्टम को तबाह (Graphic- news18 Hindi)

वेंटिलेटर पर रखकर समय लेते हैं ताकि वायरस खत्म हो सकें 
सांस लेने में मुश्किल होने के शुरुआती समय में ऑक्सीजन देनी होती है. लेकिन एक स्थिति ऐसी भी आती है, जब फेफड़े भी अपना काम नहीं कर पाते. तब मरीज को वेंटिलेटर पर रखा जाता है ताकि वो फेफड़ों की मदद कर सके. यही स्टेज सबसे खतरनाक है और वायरल लोड जल्दी खत्म न हो तो मरीज की मौत भी हो सकती है.

इन अंगों पर भी हमला 
फेफड़ों के अलावा वायरस शरीर के दूसरे अंगों, जैसे किडनी, लिवर, आंतों पर भी हमला करता है. इस दौरान सांस लेने में मुश्किल की बजाए दूसरी तरह के लक्षण दिखते हैं. हालांकि ये स्थिति फेफड़ों पर हमले से कम गंभीर है और इलाज मिलने पर मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है.

ये भी पढ़ें: Explained: मॉडर्ना क्यों भारत को नहीं देना चाहता वैक्सीन, और Pfizer ने रख दी शर्त 

खून के थक्के जमना 
इसके अलावा एक और चरण भी है, जिसमें शरीर के किसी भी महत्वपूर्ण अंग, जैसे फेफड़े, दिल, किडनी आदि के रास्ता ब्लॉक हो जाता है और उस अंग तक खून नहीं पहुंच पाता, बल्कि खून का थक्का जमने लगता है. इसे थ्रोम्बोसिस कहते हैं. ये काफी खतरनाक स्थिति है. ऐसे में मान लो दिल तक खून न पहुंच सके तो मल्टी-ऑर्गन फेल हो जाते हैं और मरीज की मौत हो जाती है.

Source link

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

21,913FansLike
2,765FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles