क्या प्रियंका गांधी कांग्रेस में नंबर दो की हैसियत में आ गई है?

काफी लंबे वक्त तक कांग्रेस में प्रियंका गांधी की भूमिका को लेकर असमंजस था.

उत्तर प्रदेश से इतर प्रियंका गांधी जिस तरह से अपने भाई राहुल गांधी के साथ मिलकर पांच राज्यों में चुनाव प्रचार अभियान को ताबड़तोड़ तरीके से चला रही हैं उससे तो यही लगता है कि कांग्रेस में उनकी हैसियत नंबर दो की हो गई है.

नई दिल्ली. असम और केरल में धुआंधार चुनाव प्रचार कर रही प्रियंका गांधी किसी मझे हुए राजनेता की तरह भाषण दे रही हैं. लोगों से अपनेपन से मिल रही है और कांग्रेस के पक्ष में जनमत बनाने की कोशिश कर रही हैं. परिवार में काफी सोच-विचार के बाद उत्तर प्रदेश के दायरे से निकलीं प्रियंका गांधी तमिलनाडु भी जाने वाली हैं. कांग्रेस में राहुल गांधी के बाद पांच चुनावी राज्यों से सबसे ज्यादा मांग प्रियंका गांधी के दौरे की ही आई है. ऐसे में प्रियंका गांधी के यूपी से बाहर निकलने को किस तरह देखा जाए? क्या प्रियंका, राहुल गांधी के बाद कांग्रेस में अब दूसरे नंबर के हैसियत वाली नेता बन गई हैं?

यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि बिहार चुनाव से ही सोनिया गांधी ने सार्वजनिक मंच से कांग्रेस के लिए कोई चुनाव प्रचार नहीं किया है. वह पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष जरूर हैं लेकिन सारे फैसले दिल्ली में बैठकर ही कर रही हैं. बढ़ती उम्र और सेहत दोनों उन्हें बहुत ज्यादा सक्रिय होने से रोक रही है. क्या
कांग्रेस में राहुल-सोनिया की जोड़ी की जगह अगर राहुल-प्रियंका की जोड़ी ने ले ली है? उत्तर प्रदेश से इतर प्रियंका गांधी जिस तरह से अपने भाई के साथ मिलकर पांच राज्यों में चुनाव प्रचार अभियान को ताबड़तोड़ तरीके से चला रही हैं उससे तो यही लगता है.

दरअसल, काफी लंबे वक्त तक कांग्रेस में प्रियंका गांधी की भूमिका को लेकर असमंजस था. कई लोगों का तर्क था कि प्रियंका गांधी के राजनीति में आने से राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल उठ सकते हैं. लंबे वक्त तक प्रियंका गांधी ने सही समय का इंतजार किया और उसके बाद गांधी परिवार में बनी आम सहमति के बाद उन्हें महासचिव बनाकर उत्तर प्रदेश के आधे हिस्से का प्रभार दिया गया और आधा हिस्सा ज्योतिरादित्य सिंधिया के हवाले किया गया था. प्रियंका गांधी काफी अरसे तक उत्तर प्रदेश के बाहर नहीं निकली और यूपी में ही पार्टी के संगठन को मजबूत करती रही. उसके पहले उनकी भूमिका सिर्फ अमेठी और रायबरेली तक ही सीमित थी. जानकार कहते हैं ये सब कुछ एक योजना का हिस्सा था. सोनिया गांधी चाहती थीं कि राहुल गांधी राजनीति में स्थापित हो जाए और उसके बाद ही प्रियंका गांधी पार्टी में सक्रिय हो.ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने के बाद प्रियंका गांधी पूरे यूपी की महासचिव बना दी गईं. महासचिव बनने के बाद काफी अरसे तक प्रियंका गांधी ने खुद को यूपी तक ही सीमित रखा. अब प्रियंका गांधी ने यूपी के बाहर कदम बढ़ाया है और एक महासचिव और स्टार प्रचारक की हैसियत से पांच राज्यों के चुनाव मैदान में कूद पड़ी हैं. कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि यह फैसला गांधी परिवार के बीच काफी चिंतन मनन और मंथन के बाद लिया गया है. यानी अब यह तय है की सियासी महाभारत में राहुल गांधी अर्जुन की भूमिका में और प्रियंका गांधी उनके सारथी कृष्ण की भूमिका में आगे बढ़ेंगे.

दरअसल, पार्टी के अंदर राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर G-23 नेताओं की चुनौती ने भी प्रियंका गांधी को और ज्यादा सक्रिय होकर अपने भाई राहुल गांधी के पीछे चट्टान की तरह खड़े रहने के लिए आगे आने को मजबूर किया. सोनिया गांधी अब पहले जैसी सक्रिय नहीं है इसलिए भी उन्होंने प्रियंका गांधी को राहुल के
समर्थन के लिए आगे बढ़ाने का फैसला लिया. इस बात के भी कयास लगाए जाते रहे हैं कि सोनिया गांधी संभवत 2024 का लोकसभा चुनाव रायबरेली से नहीं लड़ेंगी और उनकी जगह प्रियंका गांधी ले सकती है.

कुल मिलाकर, काफी सोच विचार के बाद प्रियंका गांधी भी अब राष्ट्रीय भूमिका में नज़र आएंगी. सूत्रों का कहना है कि फिलहाल तो पांच राज्यों के चुनाव प्रचार के बाद प्रियंका का पूरा फोकस उत्तर प्रदेश ही रहेगा जहां 2022 में विधानसभा चुनाव होने वाला है. महासचिव बनने की बाद से ही प्रियंका गांधी किसानों-नौजवानों के मुद्दे को उठाते हुए यूपी में लगातार सड़क पर उतर रही हैं. समाजवादी पार्टी और बीएसपी को पीछे धकेल विपक्ष की जगह लेने की भरपूर कोशिश कर रही है.

मतलब साफ है कि प्रियंका गांधी की प्राथमिक जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश तो है लेकिन वह अब उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं रहने वाली हैं. राहुल गांधी और सोनिया गांधी से सलाह मशवरा के बाद पार्टी को जहां भी उनकी जरूरत होगी वह वहां ज़रूर जाएंगी.





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