कोरोना वैक्सीन Covishield के प्रोडक्शन में अमेरिकी कानून बना रोड़ा, भारत ने जो बाइडन के सामने उठाया मुद्दा

पुणे का सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को दुनिया की नंबर वन वैक्सीन कंपनी कहा जाता है. (फोटो साभार-News18)

Coronavirus Vaccine: अदार पूनावाला ने बीते 4 मार्च को कहा था अमेरिका द्वारा महत्वपूर्ण कच्चे माल के निर्यात पर प्रतिबंध से कोरोना वायरस टीके का उत्पादन और इसकी वैश्विक उपलब्धता बढ़ाने पर गंभीर असर पड़ सकता है.

महा सिद्दीकी/नई दिल्ली. अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधु ने जो बाइडन प्रशासन के सामने वैक्सीन बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल के निर्यात में आ रही परेशानियों का मुद्दा उठाया है. वहीं, विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि यह भारत और अमेरिका (India & US) के बीच का द्विपक्षीय मामला है और इसके ऊपर विचार किया जा रहा है. हालांकि, एक सूत्र ने बताया कि अब तक अमेरिका की तरफ से निर्यात में किसी तरह की कोई ढील का आश्वासन नहीं मिला है, लेकिन इस मसले पर काम लगातार जारी है.

दरअसल सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) ने अमेरिकी रक्षा उत्पादन कानून का मुद्दा उठाया था, जिसकी वजह से भारत को अमेरिका से निर्यात होने वाले बैग, फिल्टर, विशेष तरह के रसायन, वैक्सीन के लिए कच्चा माल और अन्य महत्वपूर्ण सामानों की कमी से जूझना होगा. इसके बाद ही भारत ने इस मामले को अमेरिका के सामने रखा है.

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला (Adar Poonawalla) ने बीते 4 मार्च को विश्वबैंक द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में साफ तौर पर कहा था अमेरिका द्वारा महत्वपूर्ण कच्चे माल के निर्यात पर प्रतिबंध से कोरोना वायरस टीके (कोविशील्ड) का उत्पादन और इसकी वैश्विक उपलब्धता बढ़ाने पर गंभीर असर पड़ सकता है.

इस बारे में जब बीते 12 मार्च को अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जैक सुलिवेन से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा था, ‘मुझे नहीं लगता कि कोई प्रतिबंध है.’ अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा रक्षा उत्पादन कानून को लागू करने का मकसद अमेरिका में टीकाकरण के लक्ष्य को पूरा करना है, लेकिन इसका नतीजा दूसरों को भुगतना पड़ेगा, खासतौर पर भारत और दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माता कंपनी एसआईआई को.ऐसा इसलिए क्योंकि यह कानून आपातकाल के दौरान अमेरिकी सरकार को प्रत्यक्ष औद्योगिक उत्पादन पर और नियंत्रण का अधिकार देता है. यह कानून कंपनियों को यह इजाजत देती है कि वह अमेरिकी राष्ट्रीय रक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण सेवाओं और सामानों के लिए कॉन्ट्रैक्ट को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकार करे. इसी वजह से यह कानून अमेरिका से भारत के लिए निर्यात होने वाले सामानों के लिए परेशानी खड़ी करता है.




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