कोरोना ने 4 हफ्तों में ढाया कहर, अब और भयानक हालात से बचा सकते हैं ये 10 उपाय

(भ्रमर मुखर्जी)

नई दिल्ली. बीते एक साल से में इन आंकड़ों की निगरानी कर रही हूं. सितंबर में वायरस का असर कम हुआ और यह अगले मध्य फरवरी यानि अगले पांच महीनों तक कम होता रहा. मेरे मित्र मुझे बताते हैं यह मामूली वृद्धि सिर्फ यादृच्छिक बदलाव हो सकती है, लेकिन मुझे कुछ अच्छा महसूस नहीं हो रहा है. स्टेटिस्टीशियन या डेटा हाउंड के लिए स्निफ टेस्ट बेहद जरूरी होता है. मैंने इन बढ़ते आंकड़ों पर 18 फरवरी को ट्वीट किया. मैंने अपील की थी कि हमे वैक्सिनेशन ड्राइव को बढ़ाना होगा. हमें प्राकृतिक संक्रमण से हर्ड इम्युनिटी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैक्सीन से मिलने वाली इम्युनिटी को बढ़ाना चाहिए. मेरे ट्वीट को बहुत ज्यादा नहीं देखा गया.

फरवरी में बढ़ते मामलों से क्या समझ आता है?
फरवरी में क्या बदला? संभव है कि इसमें कई कारण शामिल हों. जैसे पिछले संक्रमण से कम हुई इम्युनिटी, कोविड व्यवहार में कमी. चुनाव के मद्देनजर बड़ी रैलियां आयोजित हुईं. पब्लिक मेट्रो, ट्रेन पूरी क्षमता से चल रही हैं. थियेटर, मॉल, रेस्त्रां सभी खुल चुके थे. बच्चों ने स्कूल जाना शुरू कर दिया था. धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए. मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर कई लोग लापरवाह हो गए.भयानक अनुमान को हराने के 10 उपाय

नियमित जांच के साथ जीनोम सीक्वेंसिंग को मिलाया जाना है. दोबारा संक्रमण और टीकाकरण के बाद नए संक्रमण के हर मामले को सीक्वेंसिंग के लिए प्राथमिकता दी जानी है. यहां मकसद पहले से मौजूद वैरिएंट्स की पहचान करना नहीं है, बल्कि नए वैरिएंट्स के बारे में समय पर जानकारी प्राप्त करना है.

टीकाकरण बढ़ाने की जरूरत है. हमें करीब 80 करोड़ व्यसकों को दोनों डोज लगाने की जरूरत है. एक दिन में एक करोड़ डोज की मदद से हमें युवाओं को वैक्सीन लगाने में 5-6 महीने लगेंगे. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंजूरी प्राप्त वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी देना अच्छा कदम है. भारत रफ्तार के साथ वैक्सीन का निर्माण कर सकता है. वैक्सीन प्रोग्राम को हर समुदाय तक लेकर जाएं. हमें और अधिक टीकों को सुरक्षित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों से मदद लेने की आवश्यकता है.

कंटेनमेंट उपायों को और सख्त किया जाए. अंतरराज्यीय आवागमन औऱ बड़े समारोह पर प्रतिबंध लगाया जाए. पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन में राष्ट्रीय स्तर पर मास्क का आदेश जारी किया जाए. अगर हम इन उपायों का पालन करते हैं, तो हम बड़े लॉकडाउन से बच सकते हैं.

कोविड केयर क्षमता और टेस्टिंग को बढ़ाया जाए. बढ़ते मामलों की वजह से अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा जाएगी. यहां सार्वजनिक और निजी साझेदारी जरूरी है. जब व्यवस्था बिगड़ रही हो, तो क्षेत्रीय लॉकडाउन जरूरी हैं.

हमें वैक्सीन और वैरिएंट्स की जानकारी के लिए मजबूत डेटा की जरूरत है.

सोशल डिस्टेंसिंग और क्षमता से जुड़े नियमों का पालन नहीं कर रहे इंडोर डाइनिंग पर तत्काल रोक लगानी चाहिए. बार, कॉफी शॉ, जिम को हाई ट्रांसमिशन क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है. यहां लोगों की मौजूदगी कम होनी चाहिए.

हमें उन लोगों का डेटा चाहिए, तो गंभीर कोविड लक्षणों का सामना कर रहे हैं भारत को एक मजबूत हेल्थ डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है.

अंतरराष्ट्रीय यात्रियों पर सख्त क्वारंटीन लागू किए जाएं. वहीं, इस समूह में नए मामलों को सीक्वेंस किया जाए.

गरीबों, ज्यादा जोखिम वालों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए एक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है. उन्होंने गाइडलाइंस का पालन करने के लिए इंसेंटिव्स की जरूरत है.

हर्ड इम्युनिटी का कॉन्सेप्ट मायावी है. बड़े स्तर पर टीकाकरण के साथ भी हमें डेटा को समझने वाले पब्लिक हेल्थ सिस्टम की जरूरत है, जो हर केस और उसके कॉन्टैक्ट को पकड़ने में सक्षम हो. वायरस और वैरिएंट्स लंबे समय के लिए हमारे जीवन का हिस्सा रहने वाले हैं. आप मौत और मामलों में इजाफा होने का इंतजार नहीं कर सकते. हमें प्रतिक्रियाशील उपायों की नहीं बल्कि सक्रिय रोकथाम की आवश्यकता है. टीकाकरण, सीक्वेंसिंग, सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली, स्वास्थ्य डेटा और सूचना प्लेटफार्मों के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी.

(ये लेखक के निजी विचार हैं. अंग्रेजी में पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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