कॉलेजियम की बैठक पर सवाल उठाने वालों को CJI एस ए बोबडे ने दिया जवाब

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एस. ए. बोबडे. (पीटीआई फाइल फोटो)

Supreme Court Collegium Meeting: कहा जा रहा है कि इसी महीने रिटायर होने वाले चीफ जस्टिस एस ए बोबडे द्वारा गुरुवार को बुलाई गई कॉलेजियम की बैठक के समय को लेकर न्यायपालिका के भीतर से ही सवाल उठाए गए थे.

नई दिल्ली. कॉलेजियम की बैठक (Collegium Meeting) को लेकर गुरुवार को चीफ जस्टिस एस ए बोबडे (CJI SA Bobde) ने एक मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट कर दिया कि वह कॉलेजियम की बैठक बुला सकते हैं. यह एक रूटीन कार्य है जिसमें न्यायपालिका से जुड़े अहम मुद्दों पर फैसला लिया जाता है. दरअसल चीफ जस्टिस देश के विभिन्न हाईकोर्ट में अस्थाई जजों की नियुक्ति के मामले की सुनवाई कर रहे थे और उसी सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एस ए बोबडे ने कॉलेजियम की बैठक को लेकर यह बातें कहीं. चीफ जस्टिस ने कहा कॉलेजियम की बैठक में न्यायपालिका से जुड़े मुद्दे पर अहम फैसला लिया जाता है.

कहा जा रहा है कि इसी महीने रिटायर होने वाले भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी चीफ जस्टिस एस ए बोबडे द्वारा गुरुवार को बुलाई गई कॉलेजियम की बैठक के समय को लेकर न्यायपालिका के भीतर से ही सवाल उठाए गए थे. कॉलेजियम की यह बैठक सुप्रीम कोर्ट में जज के लिए संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा के लिए बुलाई गई है.

हालांकि सूत्रों के मुताबिक सवाल उठाने वालों का तर्क है कि चूँकि राष्ट्रपति ने अगले मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है तो यह पदस्थ सीजेआई के लिए ठीक नहीं होगा कि वह कोई सिफारिश करें.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 6 अप्रैल को जस्टिस एनवी रमण को भारत के अगले चीफ जस्टिस यानी भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया है. वह 24 अप्रैल को पदभार ग्रहण करेंगे और अगले साल यानी 2022 में 26 अगस्त को सेवानिवृत्त होंगे. जस्टिस रमण देश के 48वें मुख्य न्यायाधीश होंगे. मौजूदा सीजेआई एसए बोबडे ने पिछले महीने उनके नाम की सिफारिश की थी. बोबडे 23 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं.कॉलेजिएम के फ़ैसले पर कई बार गतिरोध भी पैदा हो चुका है और यह इसलिए कि कई बार इसकी सिफ़ारिश को सरकार से हरी झंडी नहीं मिली है. और अब जब जजों ने कॉलेजियम की बैठक को लेकर सवाल उठाए हैं उससे भी विवाद होता दिख रहा है. वैसे कॉलेजियम में सीजेआई के अलावा सुप्रीम कोर्ट के ही 4 वरिष्ठतम जज भी होते हैं.

बहरहाल यह समझा जाता है कि यह बैठक नये सीजेआई की नियुक्ति से जुड़ी अधिसूचना जारी होने से पहले से ही तय थी, लेकिन सवाल उठने के बाद भी चीफ जस्टिस बोबडे ने अपने फ़ैसले में कोई बदलाव नहीं किया. फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट में छह जजों की नियुक्ति की जानी है. बाद में इसी साल सीजेआई बोबडे के अलावा जस्टिस अशोक भूषण, नरीमण और नवीन सिन्हा सेवानिवृत्त होंगे।





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