आईपीएल ने न्यूजीलैंड के डैनी मॉरिसन को इंडियन बना दिया! | IPL makes New Zealands Danny Morrison an Indian IPL Blog | – News in Hindi

‘हलवा कहां है भाई, हलवा’? ये शब्द जब किसी विदेशी के ज़ुबां से पटना में निकले तो वेटर का चौंकना लाज़िमी है. हां, अगर ये विदेशी कोई आम शख़्स ना होकर पूर्व क्रिकेटर हो तो शायद आप उतना नहीं चौंकेंगे. हम बात कर रहे हैं न्यूज़ीलैंड के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ डैनी मॉरिसन की जो कॉमेंटेटर के तौर पर भारत में काफी लोकप्रिय हो चुके हैं. इसलिए तो पटना में कुछ दिनों पहले चल रही बिहार क्रिकेट लीग के दौरान खिलाड़ियों से ज़्यादा सेल्फी की डिमांड में पटना पॉयलट टीम के मेंटोर मॉरिसन ही सबसे ज़्यादा दिखे. बहरहाल, मॉरिसन को सिर्फ हलवा ही नहीं रसगुल्ला, मिस्टी दोई, लड्डू और यहां तक कि पेड़ा भी बहुत पसंद है. दरअसल, मॉरिसन को अगर आप खाना खाते एक हफ्ते देख लें तो आपको लगेगा ही नहीं कि ये कोई न्यूज़ीलैंड का नागरिक है बल्कि एकदम देसी दिखेंगे. हमारे और आपके जैसे.

पटना से चेन्नई रवाना होने से पहले मैंने मॉरिसन से क्रिकेट और ख़ासतौर पर आईपीएल को लेकर लंबी बातचीत की. चूंकि, वो पूरी दुनिया की हर तरह की क्रिकेट लीग में कॉमेंटेटर की भूमिका निभाते हैं तो पहला सवाल यही था कि आखिर आईपीएल में ऐसा ख़ास क्या है. ‘ये हमारे ग्रह का सबसे बड़ा टूर्नामेंट है. भारत में आना हमें सबसे ज़्यादा अच्छा लगता है क्योंकि जिस तरह दर्शकों का रोमांच और लगाव आपको आईपीएल में देखने को मिलता है उसकी मिसाल आपको कहीं और नहीं मिलेगी’- ये कहना है 55 साल के मॉरिसन का जो अब भी अपनी तेज़ रफ्तार से गेंद डालकर युवा खिलाड़ियों को पटना के ऊर्जा स्टेडियम में चौंका रहे थे. मॉरिसन को इस बात का मलाल है कि कोरोना काल में फैंस की ऊर्जा उनके जैसे पेशेवर लोगों को आईपीएल में नहीं मिलेगी जिसके चलते उनके प्रदर्शन में एक अलग निखार आता है.

‘हज़ारों फैंस की मौजूदगी से ही तो आईपीएल का रुतबा इतना बड़ा होता है. ये बेहद मायूस करने वाली बात है कि इस बार स्टेडियम में दर्शक नहीं होंगें और मैं आपको बता दूं कि महेंद्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ियों और CSK जैसी टीम को मुश्किल होगी क्योंकि इन्हें भारत के हर मैदान पर ज़बरदस्त समर्थन मिलता है,” ये कहना है ऑकलैंड में जन्मे मॉरिसन का जो अब ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में बस चुके हैं और दुबई में भी इनका एक घर है.

1980 और 90 के दशक में मॉरिसन कीवी टीम में महान रिचर्ड हैडली के बाद सबसे बेहतरीन गेंदबाज़ बनकर उभरे थे. उनके नाम लगभग  300 अंतरराष्ट्रीय विकेट हैं. 48 टेस्ट और 96 वनडे में शिरकत करने वाले मॉरिसन कहते हैं कि उन्हें उनके देश में शायद ही नई पीढ़ी के फैंस पहचान पाएं लेकिन इस मुल्क में उन्हें इतना प्यार और सम्मान मिलता है कि मानो वो आज के सुपरस्टार हों!

मॉरिसन के बात करने का अंदाज़ निराला है. हर बात में वो आपके चेहरे पर मुस्कुराहट ला देते हैं. अगर विराट कोहली की गाली (बेन स्टोक्स वाली!) उनकी ज़ुबां पर भी हैं जिसे वो हर किसी के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करते हैं तो ‘जल्दी करो जल्दी करो’, ‘ मैं सब समझता हूं’, जैसे हिंदी के कई सामान्य वाक्य उनके लिए काफी सहज़ हैं.

‘देखिये, आईपीएल तो एक अदभुत टूर्नामेंट है ही जहां दुनिया का हर सुपरस्टार शरीक होता है. लेकिन, जो बात मुझे इस देश में सबसे अच्छी लगती है वो यहां का अतिथिदेवोभव का भाव. एअरपोर्ट से लेकर होटल तक हमारे सूटकेस को कोई हाथ नहीं लगाने देता है जबकि हम मना करते रह जाते हैं कि भाई ये हमारा काम है, हमें उठाने दो. हमारी आदत ख़राब मत करो. लेकिन, आप भारतीय किसी की सुनते हो क्या! ऐसा कहते हुए मॉरिसन ठहाके लगा पड़ते हैं.

बहरहाल, पटना में हर फैन मॉरसिन से एक ही सवाल पूछ रहा था. इस बार आईपीएल का चैंपियन कौन बनेगा? हमने भी उनसे यही सवाल दोहरा दिया. “ये बताना हमेशा मुश्किल होता है चाहे आप कितने भी बड़े एक्सपर्ट क्यों ना हों. मेरे कहने का मतलब ये है कि मुंबई इंडियंस तो पावहाउस है ही, चेन्नई दूसरी पावरहाउस हुआ करती थी. कोलकाता ने पिछले कुछ सालों से ट्रॉफी को हाथ नहीं लगाया है और दिल्ली तो पिछली बार फाइनल में पहुंची थी.  हर कोई चाहता है कि आईपीएल में कोई नई टीम चैंपियन बने तो ऐसे में मेरे ज़ेहन में एक बात आती है कि क्या इस बार कोहली की टीम अपना दमखम दिखा सकती है क्या? इस बात तो उनके पास एक बेहद संतुलित टीम है और कप्तान ने पारी की शुरुआत करने का फैसला भी ले लिया जो मैं पिछले 6 साल से चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा था. विराट ने देर से ही सही मेरी सुन ली है लेकिन क्या इतना काफी होगा चैंपियन बनने के लिए? देखते हैं आगे होता क्या है!” मॉरिसन ने बिना नाम लिए ही इशारों ही इशारों में इस बार अपनी फेवरिट टीम का जिक्र कर डाला.अपने दौरे में मॉरिसन कुछ मायनों में शार्दुल ठाकुर जैसे गेंदबाज़ की आपको याद दिलायेंगे. रफ्तार भी उनमें थी और विविधता भी. वनडे क्रिकेट में अच्छे से अच्छे बल्लेबाज़ों का मुंह वो बंद कर देते थे अपनी चतुराई भरी गेंदबाज़ी से. ठाकुर की तरह मॉरिसन कभी थोड़े महंगे साबित हो जाया करते थे लेकिन निर्णायक विकेट लेने में माहिर थे. ऐसे में मैंने उनसे चलते चलते ये सवाल कर ही डाला कि आज के दौर में वो ठाकुर बनना चाहेंगे या फिर भुवनेश्वर कुमार जो बहुत ज़्यादा रन नहीं खर्च करते हैं भले ही विकेट मिले या ना मिले. “क्या मैं दोनों का बेहतरीन तालमेल नहीं हो सकता! मुझसे अगर पूछेंगे तो मैं जोफ्रा आर्चर बनना चाहूंगा. ये ठीक है कि आर्चर होने पर फिटनेस की समस्या होगी लेकिन जिस तरह की रफ्तार उनके पास है, विविधता है और X factor है और जितनी खूबसूरती से वो चेंज ऑफ पेस करते हैं, कौन है जो आर्चर नहीं बनना चाहेगा?” ऐसा कहते हुए मॉरिसन आधुनिक दौर के सबसे संपूर्ण गेंदबाज़ की व्याख्या भी सरल तरीके से कर देते हैं.

‘अरे, अब चाय तो पिला दो यार,’ ऐसा हिंदी में कह कर मॉरसिन अपनी ही अनूठे अंदाज़ में बातचीत को ख़त्म करते है और साथ ही उनके बगल से गुज़र रहा वेटर उनकी बात को सुनकर फिर से खुद को रोक नहीं पाता है. वो चाय पिलाता है, सेल्फी लेता हैं और थैंक्यू सर कहकर आगे बढ़ जाता है. मॉरिसन के चेहरे पर मुस्कान और संतोष का भाव होता है और हमारे चेहरे पर भी आपको यही भाव मिलते. (डिस्क्लेमर: यह लेखक के निजी विचार हैं.)

ब्लॉगर के बारे में

विमल कुमार

न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.

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